
Karnataka कर्नाटक: एल नीनो के संभावित प्रभाव को ध्यान में रखते हुए कर्नाटक सरकार ने हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर उत्पादन में कमी की आशंका के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने ऊर्जा विभाग को एक विशेष आपातकालीन कार्य योजना (स्पेशल इमरजेंसी एक्शन प्लान) तैयार करने और वैकल्पिक स्रोतों से बिजली उत्पादन पर तुरंत ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की प्रगति की पहली विस्तृत समीक्षा के दौरान यह निर्देश जारी किए। बैठक में उन्हें सूखे जैसी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पहले से किए गए एहतियाती उपायों की जानकारी दी गई। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि आम जनता को बिजली आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा का सामना न करना पड़े।
डीके शिवकुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए डेडिकेटेड कोयला खदानों को शीघ्र चालू किया जाए और राज्य में पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखने की व्यवस्था लगातार सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कमी का सीधा असर सार्वजनिक जीवन और औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ सकता है, इसलिए पहले से तैयारी जरूरी है।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में राज्य की पावर स्टोरेज स्थिति वर्तमान में बेहतर है और पिछले तीन वर्षों से राज्य में बिजली कटौती की स्थिति नहीं रही है। इस पर मुख्यमंत्री ने संतोष जताते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा के प्रभावी प्रबंधन पर जोर देते हुए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP) को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु पैटर्न और एल नीनो जैसी परिस्थितियों को देखते हुए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग बेहद जरूरी हो गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऊर्जा मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जानी चाहिए, जिसमें हरित ऊर्जा और स्टोरेज तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, ऊर्जा विभाग पहले से ही संभावित सूखे और उत्पादन में गिरावट की स्थिति को देखते हुए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री ने इन प्रयासों को और तेज करने और उन्हें समयबद्ध तरीके से लागू करने पर जोर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं का सीधा असर जल संसाधनों और हाइड्रो पावर उत्पादन पर पड़ता है, जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और स्टोरेज सिस्टम का विकास बेहद जरूरी हो जाता है।
कुल मिलाकर, कर्नाटक सरकार ने एल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता में रखते हुए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी आपात स्थिति में भी राज्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।





