कर्नाटक

Karnataka : वैश्विक संघर्षों से भारत के मसाला निर्यात को बड़ा झटका, 33% की गिरावट दर्ज

Kavita2
8 Jun 2026 9:24 AM IST
Karnataka : वैश्विक संघर्षों से भारत के मसाला निर्यात को बड़ा झटका, 33% की गिरावट दर्ज
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Karnataka कर्नाटक: लंबे समय से चल रहे पश्चिम एशिया विवाद और रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब भारत के मसाला निर्यात पर साफ दिखाई देने लगा है। स्पाइसेस बोर्ड के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में देश के मसाला निर्यात में 33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स में आई बाधाओं और आपूर्ति श्रृंखला के प्रभावित होने के कारण हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख समुद्री मार्गों में रुकावट के चलते भारत यूरोप, पश्चिम एशिया और नौ कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (CIS) देशों को बड़ी मात्रा में मसालों का निर्यात नहीं कर सका। इन मसालों में काली मिर्च, जीरा, हल्दी, लाल मिर्च और इलायची जैसे प्रमुख उत्पाद शामिल हैं। कुल मिलाकर लगभग 77,117 टन मसालों की आपूर्ति बाधित हुई, जिसका सीधा असर निर्यात आय पर पड़ा।

इस स्थिति के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में भारत को करीब 854.37 करोड़ रुपये के विदेशी मुद्रा नुकसान का अनुमान लगाया गया है। यह नुकसान उन क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय है, जो लंबे समय से कृषि-आधारित निर्यात पर निर्भर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों का सीधा प्रभाव अब कृषि निर्यात पर भी देखने को मिल रहा है।

स्पाइसेस बोर्ड के अनुसार, वैश्विक बाजार में अस्थिरता और परिवहन लागत में बढ़ोतरी ने भी स्थिति को और कठिन बना दिया है। शिपिंग कंपनियों ने कई रूट बदल दिए हैं, जिससे डिलीवरी समय बढ़ गया और लागत में भी वृद्धि हुई। इसका असर भारतीय मसाला व्यापारियों और निर्यातकों दोनों पर पड़ा है।

कर्नाटक, जो भारत के प्रमुख मसाला उत्पादक राज्यों में से एक है, इस गिरावट से खास तौर पर प्रभावित हुआ है। राज्य देश का छठा सबसे बड़ा मसाला उत्पादक है और यहां से काली मिर्च, छोटी इलायची, ब्यादगी मिर्च, हल्दी और अदरक का बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है। निर्यात में आई गिरावट से स्थानीय किसानों और व्यापारियों की आय पर भी असर पड़ा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक संघर्ष लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में मसाला उद्योग को और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भारत का मसाला निर्यात वैश्विक बाजार में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है, ऐसे में सप्लाई चेन की स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है।

सरकारी और व्यापारिक संस्थाएं अब वैकल्पिक बाजारों और नए शिपिंग रूट्स की तलाश पर ध्यान दे रही हैं, ताकि नुकसान को कम किया जा सके। साथ ही डिजिटल लॉजिस्टिक्स और समुद्री मार्गों के विविधीकरण पर भी विचार किया जा रहा है।

फिलहाल स्थिति यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनावों का सीधा असर भारत के कृषि और निर्यात सेक्टर पर पड़ रहा है, जिसमें मसाला उद्योग सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक बनकर उभरा है।

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