
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के हावेरी ज़िले में हनागल स्थित कुमारेश्वर हाई स्कूल के शिक्षक सी.एस. वस्त्राद के रिटायरमेंट समारोह में एक अनोखा और दिल छू लेने वाला नज़ारा देखने को मिला। मुश्किल समय में पढ़ाई में मार्गदर्शन और सहायता देने वाले अपने शिक्षक के प्रति आभार जताने के लिए स्कूल के एक पूर्व छात्र ने उन्हें नई कार भेंट की, जिससे समारोह में मौजूद सभी लोगों के दिल जीत लिए।
कुमारेश्वर विद्यावर्धक ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस विदाई समारोह में स्कूल के एक हज़ार से ज़्यादा पूर्व छात्र और शिक्षक शामिल हुए। समारोह में विशेष रूप से 2007 SSLC बैच के छात्र नवीन हुलिहल्ली ने अपने शिक्षक सी.एस. वस्त्राद को नई कार तोहफ़े में दी। इस अनोखी भेंट ने समारोह में उपस्थित सभी लोगों को चौंका दिया और भावुक कर दिया।
नवीन हुलिहल्ली ने बताया कि उनके शिक्षक ने कठिन समय में उनकी पढ़ाई और जीवन के निर्णयों में हमेशा मार्गदर्शन किया। "शिक्षक के योगदान को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल है। उन्होंने हमें न केवल पढ़ाई में बल्कि जीवन में भी सही दिशा दिखाई। यह छोटी भेंट उनकी मेहनत और समर्पण के प्रति मेरा धन्यवाद है," नवीन ने कहा।
कार्यक्रम के दौरान अन्य पूर्व छात्रों ने भी अपने-अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सी.एस. वस्त्राद न केवल शिक्षक थे, बल्कि उनके जीवन में मार्गदर्शक और प्रेरक भी रहे। उनके समर्पण और छात्र-हितैषी दृष्टिकोण ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।
शिक्षक सी.एस. वस्त्राद ने कहा कि यह भेंट उनके लिए बहुत भावुक और विशेष अनुभव है। "मैंने हमेशा छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम किया। यह सम्मान और प्रेम मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है," उन्होंने कहा।
समारोह में स्कूल के वर्तमान शिक्षक और प्रशासनिक सदस्य भी शामिल हुए। उन्होंने भी नवीन के इस कदम की सराहना की और कहा कि ऐसे उदाहरण दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्य न केवल शिक्षक और छात्र के संबंध को मजबूत बनाते हैं, बल्कि शिक्षा और परिश्रम की असली भावना को भी दर्शाते हैं।
विदाई समारोह का आयोजन बड़े हर्षोल्लास और सम्मान के साथ किया गया। शिक्षक को पुष्पगुच्छ, स्मृति चिन्ह और अन्य उपहारों के साथ विदाई दी गई। छात्रों और पूर्व छात्रों ने कार्यक्रम में अपने शिक्षक के लिए गीत और भाषण प्रस्तुत किए।
कुमारेश्वर हाई स्कूल के रिटायर शिक्षक सी.एस. वस्त्राद के प्रति इस तरह का आभार जताना यह दिखाता है कि शिक्षक और छात्र के बीच का संबंध केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह जीवन भर की प्रेरणा और सम्मान की भावना पैदा करता है।





