
Karnataka कर्नाटक: कम बारिश को लेकर राज्य सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) को निर्देश दिया है कि वे उन तालुकों का सर्वे एक सप्ताह के भीतर पूरा करें, जहां सामान्य बारिश की तुलना में 60 प्रतिशत से भी कम वर्षा हुई है और पिछले तीन सप्ताह से लगातार बारिश नहीं हुई है।
राज्य सरकार का यह कदम संभावित सूखे की स्थिति का आकलन करने और प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जमीनी स्तर पर जाकर हालात का निरीक्षण करें और नियमों के अनुसार सूखा प्रभावित इलाकों की सूची तैयार करें।
कर्नाटक स्टेट नेचुरल डिजास्टर मॉनिटरिंग सेंटर (KSNDMC) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कुल 239 तालुकों में से 121 तालुक बारिश की कमी वाली श्रेणी में हैं। वहीं, इनमें से 11 तालुकों में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है।
मुख्य सचिव शालिनी रजनीश ने जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे केवल आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें। उन्होंने कहा कि फील्ड निरीक्षण के बाद ही राजस्व विभाग को सूखा प्रभावित क्षेत्रों की सूची भेजी जाए, ताकि सरकार आगे की कार्रवाई कर सके।
60 प्रतिशत से कम बारिश वाले क्षेत्रों की पहचान
मुख्य सचिव की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाए जहां सामान्य वर्षा के मुकाबले 60 प्रतिशत से कम बारिश हुई है और लगातार तीन सप्ताह तक बारिश नहीं हुई।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे खेतों, जल स्रोतों और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का भी जायजा लें, ताकि सूखे के वास्तविक प्रभाव का पता लगाया जा सके।
यह प्रक्रिया मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद शुरू की गई है। सरकार का उद्देश्य समय रहते प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर राहत और आवश्यक कदम उठाना है।
सूखा घोषित करने के लिए तय हैं मानक
KSNDMC के पूर्व निदेशक श्रीनिवास रेड्डी ने बताया कि किसी भी क्षेत्र को सूखा प्रभावित घोषित करने के लिए चार प्रमुख मानदंडों को देखा जाता है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई क्षेत्र इनमें से तीन मानदंडों को पूरा करता है तो उसे सूखा प्रभावित या सूखा संभावित क्षेत्र माना जा सकता है। वहीं, अगर कोई क्षेत्र दो मानदंडों को पूरा करता है तो उसे मध्यम सूखे की श्रेणी में रखा जा सकता है।
इन मानदंडों में बारिश की स्थिति, फसल की स्थिति, मिट्टी में नमी, जल स्रोतों की उपलब्धता और अन्य संबंधित परिस्थितियों का मूल्यांकन शामिल होता है।
किसानों पर बढ़ सकता है असर
कम बारिश का सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। राज्य के कई हिस्सों में किसान बारिश पर निर्भर रहते हैं और समय पर वर्षा नहीं होने से बुवाई और फसलों की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे किसानों की स्थिति, फसल नुकसान और पानी की उपलब्धता से जुड़ी जानकारी भी जुटाएं। इसके आधार पर सरकार राहत योजनाओं और आवश्यक सहायता को लेकर फैसला ले सकती है।
प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश
राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे लगातार मौसम और बारिश की स्थिति पर नजर बनाए रखें। अधिकारियों को कहा गया है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी रखें।
KSNDMC लगातार बारिश से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण कर रहा है और जिलों को स्थिति के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहा है।
सरकार का कहना है कि सर्वे पूरा होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी कि किन इलाकों को आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित करने की जरूरत है।
जल संकट और ग्रामीण क्षेत्रों पर नजर
बारिश की कमी के कारण कुछ इलाकों में जल संकट की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में प्रशासन को पेयजल व्यवस्था और पशुओं के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, बांध और अन्य जल स्रोतों की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा।
फिलहाल राज्य सरकार ने सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करने को कहा है। एक सप्ताह के भीतर होने वाले सर्वे के बाद सूखे की स्थिति को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
कर्नाटक में कम बारिश वाले इलाकों की बढ़ती संख्या ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अब जिला स्तर की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि किन क्षेत्रों में राहत और विशेष सहायता की जरूरत है।





