
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले में राज्य सरकार की प्रस्तावित ‘डीप टेक पार्क’ परियोजना को लेकर किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। आम के बागों, ‘बैंगलोर ब्लू’ अंगूर की खेती और शहतूत के विस्तृत बागानों से समृद्ध इस क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की योजना से स्थानीय कृषि समुदाय चिंतित है।
जंगमकोटे होबली, सिदलघट्टा तालुक के 13 गांवों के किसानों का कहना है कि कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड (केआईएडीबी) की इस परियोजना के तहत उनकी उपजाऊ जमीन को अधिग्रहित किया जा रहा है। किसानों को आशंका है कि सरकार द्वारा दिए जा रहे अल्पकालिक मुआवजे के बदले उनकी वर्षों से विकसित की गई आत्मनिर्भर और लाभकारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि प्रस्तावित अधिसूचित क्षेत्र पूरी तरह से उपजाऊ भूमि है और यहां कोई भी बंजर या खाली जमीन उपलब्ध नहीं है। इस क्षेत्र के हर हिस्से पर सक्रिय खेती होती है। यहां बड़े पैमाने पर शहतूत की खेती की जाती है, जो रेशम उत्पादन का महत्वपूर्ण आधार है। इसके साथ ही आम, अमरूद, अंगूर, काजू, अदरक, सब्जियां और यहां तक कि सेब जैसी फसलें भी उगाई जाती हैं।
किसानों का कहना है कि यह क्षेत्र न केवल कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य स्रोत भी है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण की योजना से उनकी आर्थिक स्थिरता और पारंपरिक कृषि व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
कृषि समुदाय का यह भी मानना है कि डीप टेक पार्क जैसी परियोजनाएं विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन इसके लिए उपजाऊ कृषि भूमि का उपयोग उचित नहीं है। उनका तर्क है कि इस तरह की परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक और अनुपयोगी भूमि का चयन किया जाना चाहिए, ताकि किसानों की आजीविका सुरक्षित रह सके।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह क्षेत्र केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इसकी हरियाली तथा कृषि विविधता इसे विशेष बनाती है। किसानों का कहना है कि यह भूमि पूरी तरह से खेती पर आधारित अर्थव्यवस्था को समर्थन देती है और इसे औद्योगिक उपयोग में बदलना ग्रामीण संरचना को नुकसान पहुंचा सकता है।
इस मुद्दे पर किसानों ने सरकार से पुनर्विचार करने की मांग की है और कहा है कि बिना व्यापक संवाद और उचित मूल्यांकन के भूमि अधिग्रहण आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी आजीविका और क्षेत्रीय कृषि महत्व को ध्यान में रखते हुए कोई वैकल्पिक समाधान निकाले।
कुल मिलाकर, चिक्काबल्लापुर में प्रस्तावित डीप टेक पार्क परियोजना को लेकर किसानों का विरोध बढ़ता जा रहा है और यह मुद्दा अब विकास बनाम कृषि संरक्षण की बहस का रूप लेता दिख रहा है।





