कर्नाटक

Karnataka : एडमिशन ओवरसीइंग कमेटी प्रमुख की नियुक्ति के बाद भी अटका काम

Kavita2
9 May 2026 2:57 PM IST
Karnataka : एडमिशन ओवरसीइंग कमेटी प्रमुख की नियुक्ति के बाद भी अटका काम
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Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक में प्रोफेशनल कोर्सों के एडमिशन और संबंधित शिकायतों के निपटारे को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक देरी सामने आई है। राज्य सरकार ने हाल ही में रिटायर्ड हाई कोर्ट जज जस्टिस रामचंद्र डी हुद्दार को एडमिशन ओवरसीइंग कमेटी का चेयरपर्सन नियुक्त किया है, लेकिन अभी तक उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया है। यह पद पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से खाली पड़ा था।

सरकार द्वारा 28 अप्रैल को इस नियुक्ति को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बावजूद अब तक कमेटी की कार्यप्रणाली पूरी तरह से सक्रिय नहीं हो पाई है। पिछली चेयरपर्सन का कार्यकाल अक्टूबर 2024 में समाप्त हो गया था, जिसके बाद से कई अहम शिकायतें लंबित पड़ी हुई हैं।

कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी (KEA) के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस दौरान प्राइवेट शिक्षण संस्थानों, विशेषकर मेडिकल, इंजीनियरिंग और नर्सिंग कॉलेजों के खिलाफ बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें छात्रों ने मुख्य रूप से अत्यधिक फीस वसूली और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं।

एक KEA अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में केवल उन छात्रों को ही शिकायत की रसीद दी जा सकी, जिन्होंने व्यक्तिगत रूप से शिकायत दर्ज कराई थी, जबकि ईमेल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों को संबंधित विभागों को भेज दिया गया था। इससे कई मामलों की स्थिति अस्पष्ट बनी रही।

2025 में शिकायतों की संख्या बढ़ने पर उच्च शिक्षा विभाग ने हस्तक्षेप करते हुए फीस संबंधी मामलों की जांच का जिम्मा फीस रेगुलेटरी कमेटी को सौंप दिया। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एडमिशन ओवरसीइंग कमेटी के मामलों को देखने का अधिकार फीस रेगुलेटरी कमेटी के पास नहीं था।

इसके बावजूद छात्रों के हितों को देखते हुए यह जिम्मेदारी अस्थायी रूप से फीस रेगुलेटरी कमेटी को देनी पड़ी। एक अधिकारी ने बताया कि “अन्य कोई विकल्प उपलब्ध नहीं होने के कारण छात्रों की शिकायतों को आगे बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया।”

विशेषज्ञों का मानना है कि एडमिशन प्रक्रिया और फीस से जुड़ी शिकायतों में देरी से छात्रों पर नकारात्मक असर पड़ता है और निजी संस्थानों पर निगरानी कमजोर हो जाती है। लंबे समय से खाली पड़े पद और धीमी प्रशासनिक प्रक्रिया ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है।

फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि जस्टिस रामचंद्र डी हुद्दार कब आधिकारिक रूप से पदभार ग्रहण करते हैं और कमेटी कब से पूरी तरह सक्रिय होकर लंबित मामलों का निपटारा शुरू करती है।

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