
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक में बिजली क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में राज्य के बिजली विभाग ने ग्रिड को बिजली बेचकर कुल ₹3,685.29 करोड़ का राजस्व अर्जित किया है। यह जानकारी कर्नाटक पावर कंपनी लिमिटेड (PCKL) के आधिकारिक डेटा में सामने आई है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 से लेकर 8 जून 2026 तक राज्य ने कुल 6,531.33 मिलियन यूनिट (MU) बिजली औसतन ₹5.64 प्रति यूनिट की दर से बेची। वहीं इसी अवधि में राज्य ने 14,082.88 MU बिजली औसतन ₹6.47 प्रति यूनिट की दर से खरीदी, जिस पर कुल ₹9,111.65 करोड़ का खर्च आया।
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य ने जहां एक ओर अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर आय अर्जित की, वहीं दूसरी ओर मांग पूरी करने के लिए अधिक कीमत पर बिजली खरीदनी भी पड़ी। इस पूरे लेनदेन में खरीद और बिक्री की कीमतों के बीच अंतर भी देखने को मिला।
PCKL के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बिजली खरीद-बिक्री की यह रणनीति मौसम और मांग के आधार पर तय की जाती है। उन्होंने बताया कि मॉनसून के दौरान, खासकर सोलर पावर उत्पादन के समय, बाजार में बिजली की कीमतें कम रहती हैं, ऐसे समय में राज्य अतिरिक्त बिजली बेच देता है।
इसके विपरीत, गर्मी के मौसम में जब बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है, तब राज्य को पीक ऑवर्स में अधिक दरों पर बिजली खरीदनी पड़ती है। इसी कारण औसत खरीद कीमत बिक्री कीमत से अधिक रही।
अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया ऊर्जा प्रबंधन और ग्रिड संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है। राज्य बिजली विभाग समय-समय पर उपलब्धता और मांग के अनुसार बिजली की खरीद-बिक्री करता है ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रणनीति से जहां एक ओर अतिरिक्त बिजली का बेहतर उपयोग होता है, वहीं दूसरी ओर बाजार आधारित उतार-चढ़ाव का असर भी राज्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
फिलहाल विभाग इस मॉडल को और अधिक कुशल बनाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा और स्टोरेज क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है, ताकि भविष्य में खरीद लागत को कम किया जा सके और अधिक लाभकारी संतुलन बनाया जा सके।





