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कर्नाटक SIR: 4.46 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट सूची जारी

Kavita2
25 Aug 2026 3:20 PM IST
कर्नाटक SIR: 4.46 करोड़ मतदाताओं की ड्राफ्ट सूची जारी
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बेंगलुरु। विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के अगले चरण में चुनाव आयोग ने सोमवार को कर्नाटक की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी। आयोग की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य की नई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 4,46,35,975 मतदाता शामिल हैं। इनमें पुरुष, महिला, नए, एनआरआई और सर्विस वोटर शामिल हैं। इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नामों की पहचान की गई है, जिन्हें अनुपस्थित, विस्थापित, मृत, फर्जी या अन्य कारणों से संदिग्ध श्रेणी में रखा गया था।

आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, कर्नाटक में पहले करीब 5.54 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। SIR के दौरान करीब 1.07 करोड़ मतदाताओं की पहचान ASDDO श्रेणी के तहत की गई। इन नामों को फिलहाल ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिया गया है। ASDDO का इस्तेमाल ऐसे मतदाताओं के लिए किया गया है, जो अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट अथवा अन्य कारणों से मतदाता सूची में बने रहने के योग्य नहीं पाए गए।

ड्राफ्ट सूची में 4.46 करोड़ मतदाता

चुनाव आयोग की ओर से जारी ड्राफ्ट सूची में कुल 4,46,35,975 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 2,21,59,240 पुरुष और 2,24,73,864 महिला मतदाता हैं। इसके अलावा 3,70,341 नए मतदाता, 951 एनआरआई मतदाता और 44,176 सर्विस वोटर भी सूची में शामिल हैं।

आंकड़ों से पता चलता है कि ड्राफ्ट सूची में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है। यह अंतर बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन राज्य की मतदाता संरचना में महिलाओं की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी को दर्शाता है।

नए मतदाताओं को भी ड्राफ्ट सूची में शामिल किया गया है। इससे उन युवाओं को मतदान का अधिकार मिलने का रास्ता साफ होगा, जो निर्धारित पात्रता पूरी करने के बाद पहली बार मतदाता सूची का हिस्सा बने हैं।

1.07 करोड़ नामों की पहचान

SIR के दौरान सबसे महत्वपूर्ण पहलू बड़ी संख्या में मतदाताओं की पहचान और सत्यापन रहा। आयोग के अनुसार, करीब 1.07 करोड़ नाम ASDDO श्रेणी में पाए गए। इन मतदाताओं को ड्राफ्ट सूची से हटा दिया गया है।

हालांकि, ड्राफ्ट सूची का मतलब अंतिम सूची नहीं है। जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं या जिनका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। इसके बाद दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित मामलों की जांच की जाएगी।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और ऐसे नामों को हटाना है, जो किसी कारण से अब पात्र मतदाता नहीं हैं।

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना

विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची की व्यापक जांच का एक तरीका है। इसके तहत मतदाताओं के नाम, पते और पात्रता से संबंधित जानकारी का सत्यापन किया जाता है।

मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों, स्थानांतरित हो चुके लोगों या एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को हटाना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं, पात्र नागरिकों का नाम सूची में शामिल करना भी उतना ही जरूरी है।

कर्नाटक में जारी ड्राफ्ट सूची इसी व्यापक सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है। अब लोगों की नजर अगले चरण पर होगी, जिसमें दावे और आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी।

नाम हटने पर दावा-आपत्ति का मौका

ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद जिन नागरिकों को लगता है कि उनका नाम गलत तरीके से हटाया गया है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा दाखिल कर सकते हैं। इसी तरह मतदाता सूची में किसी गलत नाम को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।

इस चरण में राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। वे बूथ स्तर पर मतदाता सूची की जांच कर यह देख सकते हैं कि पात्र मतदाताओं के नाम सही तरीके से शामिल हैं या नहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में नामों की पहचान होने के बाद दावा-आपत्ति प्रक्रिया पर विशेष नजर रहेगी। खासकर उन लोगों के मामलों में, जिन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित मतदाता माना गया है, वास्तविक स्थिति का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।

अंतिम सूची से पहले होगा सत्यापन

ड्राफ्ट सूची जारी होना चुनावी सूची की प्रक्रिया का अंतिम चरण नहीं है। दावे और आपत्तियां मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा उनकी जांच की जाएगी। आवश्यक होने पर दस्तावेज और अन्य प्रमाण मांगे जा सकते हैं।

इसके बाद पात्र पाए जाने वाले लोगों के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जा सकते हैं। वहीं, जो नाम नियमों के अनुसार पात्र नहीं पाए जाएंगे, उन्हें हटाए रखने का फैसला लिया जा सकता है।

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम मतदाता सूची में अधिकतम संख्या में पात्र नागरिक शामिल हों और अपात्र या गलत नामों को हटाया जा सके।

राजनीतिक और प्रशासनिक नजर

कर्नाटक में SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद अब इसका राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व भी बढ़ गया है। राज्य में मतदाता सूची से 1.07 करोड़ नामों की पहचान और हटाए जाने का आंकड़ा बड़ा है। ऐसे में राजनीतिक दलों की नजर विशेष रूप से इस बात पर होगी कि हटाए गए नामों में कितने वास्तविक मतदाता हैं और कितने नाम रिकॉर्ड के आधार पर हटाए जाने योग्य थे।

चुनाव आयोग के लिए भी अगला चरण महत्वपूर्ण होगा। दावे और आपत्तियों के निपटारे के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम वापस जुड़ते हैं और कितने नाम स्थायी रूप से बाहर रहते हैं।

फिलहाल सोमवार को जारी ड्राफ्ट सूची ने कर्नाटक की चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव दर्ज किया है। 5.54 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं की पिछली संख्या की तुलना में ड्राफ्ट सूची में 4.46 करोड़ से अधिक मतदाता रह गए हैं। अब दावा-आपत्ति और सत्यापन प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची जारी होने का इंतजार रहेगा।

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