
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक में नई सरकार के गठन के बाद मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष सामने आने लगा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कैबिनेट में पोर्टफोलियो आवंटन को लेकर नाराजगी बढ़ने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार बनने के कुछ ही दिनों के भीतर कैबिनेट में पहला बड़ा राजनीतिक झटका देखने को मिला है। वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी ने विभागों के बंटवारे से असंतुष्ट होकर इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे को कैबिनेट के भीतर असंतोष का पहला बड़ा संकेत माना जा रहा है।
इसके अलावा, मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि विभागों के आवंटन में अपेक्षित संतुलन नहीं रखा गया है, जिससे कई वरिष्ठ नेताओं में असंतोष का माहौल बन गया है। इन घटनाओं से यह संकेत मिल रहा है कि नई सरकार में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है।
राज्य कांग्रेस के भीतर बढ़ते इस विवाद को लेकर पार्टी हाईकमान तक भी मामला पहुंच गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को इस स्थिति से अवगत कराया गया है। राज्य कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है।
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य नेतृत्व को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि असंतुष्ट मंत्रियों से बातचीत कर स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य किया जाए। साथ ही, यदि कोई नेता अपनी नाराजगी वापस लेने को तैयार नहीं होता है तो उसका इस्तीफा स्वीकार करने पर भी विचार किया जाए।
कर्नाटक कांग्रेस में यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब नई सरकार अपने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। लेकिन कैबिनेट में असंतोष और विभागीय खींचतान ने सरकार के सामने शुरुआती चुनौती खड़ी कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विभागों के बंटवारे को लेकर असहमति नई सरकारों में आम होती है, लेकिन अगर इसे समय रहते सुलझाया नहीं गया तो इसका असर सरकार की स्थिरता और कामकाज पर पड़ सकता है।
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व स्थिति को नियंत्रित करने और सभी नेताओं के बीच सहमति बनाने की कोशिश में जुटा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्या पार्टी इस विवाद को सुलझा पाती है या यह असंतोष और बढ़ता है।





