कर्नाटक

Karnataka : विभागीय विवाद सुलझा, मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा ने संभाला शहरी विकास विभाग

Kavita2
16 Jun 2026 3:53 PM IST
Karnataka : विभागीय विवाद सुलझा, मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा ने संभाला शहरी विकास विभाग
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Karnataka कर्नाटक: विभागों के बंटवारे और सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर पिछले 13 दिनों से चल रही नाराजगी के बाद आखिरकार स्थिति सामान्य हो गई है। मंगलवार को मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा ने बेंगलुरु शहरी विकास विभाग का कार्यभार संभाल लिया। इससे पहले विभागीय जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर उनके असंतोष की चर्चा लगातार राजनीतिक हलकों में बनी हुई थी।

सूत्रों के अनुसार, विभागों के आवंटन में अपेक्षित अधिकार और भूमिका न मिलने के कारण मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा असंतुष्ट थे। इसी वजह से उन्होंने कुछ समय तक विभागीय कार्यभार को लेकर दूरी बनाए रखी थी। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व की ओर से हस्तक्षेप के बाद स्थिति को सुलझा लिया गया।

बताया जा रहा है कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव और कर्नाटक कांग्रेस प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस पूरे मामले में मध्यस्थता की भूमिका निभाई। उन्होंने मंत्री से बातचीत कर उनकी चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया, जिसके बाद गतिरोध समाप्त हुआ और मंत्री ने दोबारा जिम्मेदारी संभाल ली।

कार्यभार संभालने के बाद मंत्री कृष्णा बायरेगौड़ा ने बेंगलुरु ग्रेटर अथॉरिटी (GBA) मुख्यालय में पहली महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक शहरी विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों और परियोजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी।

इस बैठक में GBA के मुख्य आयुक्त महेश्वर राव, बेंगलुरु के पांचों नगर निगमों के आयुक्त और मुख्य इंजीनियर उपस्थित रहे। बैठक में शहर के बुनियादी ढांचे, विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक समन्वय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

अधिकारियों के अनुसार, मंत्री ने बैठक में शहरी विकास परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और प्रशासनिक स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि बेंगलुरु में चल रहे विकास कार्यों में तेजी लाई जाए और जनता से जुड़े मुद्दों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम कर्नाटक कांग्रेस सरकार के भीतर चल रही आंतरिक असहमति और उसके समाधान की प्रक्रिया को दर्शाता है। हालांकि पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हो गया है, लेकिन विभागीय संतुलन को लेकर उठे सवाल अभी भी चर्चा में हैं।

फिलहाल मंत्री के कार्यभार संभालने और पहली बैठक के साथ ही शहरी विकास विभाग में कामकाज को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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