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Karnataka : पुरुषों की सुरक्षा के लिए अलग आयोग की मांग, एच. विश्वनाथ ने उठाई नई बहस

Kavita2
5 July 2026 1:08 PM IST
Karnataka : पुरुषों की सुरक्षा के लिए अलग आयोग की मांग, एच. विश्वनाथ ने उठाई नई बहस
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Karnataka कर्नाटक: पुरुषों की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। हाल के दिनों में पुरुषों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं को देखते हुए लेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य एच. विश्वनाथ ने पुरुषों की सुरक्षा के लिए अलग से आयोग बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि जैसे महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा मौजूद है, वैसे ही पुरुषों के लिए भी विशेष व्यवस्था होनी चाहिए।

इस मुद्दे पर उन्होंने शनिवार को मैसूर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में केवल महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है, जबकि पुरुष भी कई मामलों में परेशानियों और हिंसा का सामना कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस स्थिति को देखते हुए एक संगठित प्रणाली की आवश्यकता है जो पुरुषों की शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों को देख सके।

एच. विश्वनाथ ने कहा, “जब लड़कियां मुसीबत में होती हैं, तो पुलिस तुरंत कार्रवाई करती है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून मौजूद है और गिरफ्तारियां भी जल्दी होती हैं। लेकिन हाल के दिनों में पुरुष भी कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे हैं, और उनकी शिकायतों पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में पुलिस पुरुषों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेती है। इसी वजह से पुरुषों की समस्याओं को उठाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक अलग ढांचा बनाना जरूरी हो गया है।

अपने बयान में उन्होंने बताया कि इस उद्देश्य के लिए एक “पुरुष सुरक्षा फोरम” पहले ही बनाया जा चुका है। इस संगठन का लक्ष्य पुरुषों के खिलाफ होने वाली हिंसा को रोकना और उनकी शिकायतों को उचित मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि इस फोरम में केवल पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी शामिल हैं, ताकि मुद्दे को संतुलित तरीके से देखा जा सके।

उन्होंने आगे कहा कि यह फोरम पुरुषों के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए काम करेगा और जरूरत पड़ने पर कानूनी स्तर पर भी हस्तक्षेप करेगा। उनके अनुसार, यह एक ऐसा कदम है जिससे समाज में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और सभी वर्गों की समस्याओं को समान रूप से देखा जाएगा।

इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोगों का मानना है कि समाज में बदलते हालात को देखते हुए हर वर्ग की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है, जबकि कुछ लोग इसे मौजूदा सुरक्षा ढांचे से अलग दृष्टिकोण मान रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू हिंसा और सामाजिक तनाव से जुड़े मामलों में पुरुष और महिलाएं दोनों प्रभावित होते हैं, लेकिन शिकायत दर्ज कराने और कानूनी सहायता पाने के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे में किसी भी नए आयोग या फोरम के गठन पर व्यापक चर्चा की जरूरत होती है।

मैसूर में दिए गए इस बयान के बाद यह मुद्दा राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस पर अपनी राय देना शुरू कर दिया है। कुछ संगठनों का कहना है कि मौजूदा कानूनों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है, जबकि कुछ लोग नए आयोग के गठन का समर्थन कर रहे हैं।

एच. विश्वनाथ ने अंत में कहा कि उनका उद्देश्य किसी एक वर्ग को अलग करना नहीं है, बल्कि समाज में सभी के लिए न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि पुरुषों की समस्याओं को भी उतनी ही गंभीरता से लेना चाहिए जितनी अन्य वर्गों की ली जाती है।

इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मौजूदा कानूनी और सामाजिक ढांचा सभी वर्गों की सुरक्षा जरूरतों को समान रूप से पूरा कर पा रहा है या नहीं।

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