
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के होबली क्षेत्र की हेट्टाक्की ग्राम पंचायत के ओबलाहल्ली गांव में दलित परिवारों की गंभीर आवास और जमीन से जुड़ी समस्या सामने आई है। यहां रहने वाले कई परिवार दशकों से सरकारी कॉलोनी में रह रहे हैं, लेकिन उनके पास आज तक अपने घरों का वैध टाइटल डीड नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इसी जमीन पर रह रहे हैं, लेकिन दस्तावेजों की कमी के कारण उन्हें लगातार प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई घर जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं और उनमें से पानी टपकता है। एक ही मकान में तीन से चार परिवार रहने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, तब राज्य सरकार ने अनुसूचित जाति के परिवारों के लिए आवास मंजूर किए थे। लेकिन उस समय जमीन का स्पष्ट आवंटन नहीं किया गया था। इसके बाद गांव के शानुभोग अनंतरमैया ने लगभग 24 गुंटा जमीन दान दी थी, लेकिन इसके बावजूद सरकार द्वारा न तो सर्वे किया गया और न ही आधिकारिक आवंटन या टाइटल डीड जारी किए गए।
ग्रामीणों का कहना है कि वे हर साल हाउस टैक्स और वॉटर टैक्स भी जमा करते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें अपने घरों पर कानूनी अधिकार नहीं मिल रहा है। ई-प्रॉपर्टी और अन्य सरकारी रिकॉर्ड में टाइटल डीड न होने के कारण उनकी समस्या और बढ़ गई है।
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि कई बार पंचायत विकास अधिकारी (PDO) को बुलाकर सर्वे कराया गया, जिसमें केवल अस्थायी रिकॉर्ड तैयार किया गया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारी केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामले को टाल देते हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह भी है कि गांव में कब्रिस्तान के लिए भी कोई जमीन आधिकारिक रूप से आवंटित नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी की मृत्यु हो जाती है, तो दफनाने के लिए भी उचित स्थान नहीं है, जो उनकी कठिनाइयों को और बढ़ाता है।
लोगों ने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने से भी डरते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी जमीन के दावे को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे “अनाथ जैसी स्थिति” में जीवन जीने को मजबूर हैं, जहां उनके पास न तो कानूनी दस्तावेज हैं और न ही सुरक्षित आवास।
स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने पर तहसीलदार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। कॉल और संदेशों का भी जवाब नहीं दिया गया, जिससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उन्हें उनके घरों का कानूनी अधिकार मिल सके और इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान हो सके।





