कर्नाटक

Karnataka : राशन से जाति प्रमाणपत्र जोड़ने पर विवाद, केंद्रीय मंत्री ने जताई आपत्ति

Kavita2
20 Jun 2026 5:48 PM IST
Karnataka : राशन से जाति प्रमाणपत्र जोड़ने पर विवाद, केंद्रीय मंत्री ने जताई आपत्ति
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Karnataka कर्नाटक: राशन वितरण प्रणाली को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के उस कदम पर आपत्ति जताई है, जिसमें कथित तौर पर राशन लाभ के लिए जाति प्रमाणपत्र को अनिवार्य किया गया है। इस मुद्दे पर केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे गैरकानूनी और अस्वीकार्य बताया है।

प्रह्लाद जोशी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधा को किसी भी तरह जाति से नहीं जोड़ा जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को इस मामले की जानकारी जुटाने और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं में सभी नागरिकों को समान रूप से लाभ दिया जाता है, जिसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होता।

यह मामला उस समय सामने आया जब खबरें आईं कि कर्नाटक में राशन वितरण के लिए जाति प्रमाणपत्र अनिवार्य किया जा रहा है। इस पर केंद्रीय मंत्री ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का उद्देश्य देश में सभी नागरिकों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए लागू की गई योजनाओं में जाति या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत करोड़ों लाभार्थियों को मुफ्त या सब्सिडी वाला राशन उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना महामारी के समय शुरू की गई थी और बाद में इसे बढ़ाकर देशभर में लागू किया गया, ताकि कोई भी गरीब व्यक्ति भूखा न रहे।

प्रह्लाद जोशी ने कहा कि इस तरह का कोई भी नियम यदि वास्तव में लागू किया गया है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने इसे गरीबों के अधिकारों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह कदम न केवल नीतिगत रूप से गलत है, बल्कि सामाजिक समानता की भावना के भी खिलाफ है।

केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और अधिकारियों से जांच करने को कहा है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।

इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है और विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल केंद्र और राज्य के बीच इस विषय पर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है।

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