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Karnataka कर्नाटक: बेंगलुरु में कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) से जुड़ी माइनॉरिटी सेल कमेटी को भंग कर दिया गया है। यह फैसला डी.के. शिवकुमार ने लिया, जो वर्तमान में KPCC के अध्यक्ष और कर्नाटक के डिप्टी चीफ मिनिस्टर भी हैं। रविवार को जारी आदेश के मुताबिक, माइनॉरिटी सेल कमेटी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस फैसले के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं किया गया है। प्रेस नोट में केवल यह बताया गया कि मौजूदा कमेटी को समाप्त करते हुए जल्द ही एक नई कमेटी का गठन किया जाएगा। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में इस कदम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी की माइनॉरिटी सेल पार्टी के भीतर एक महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है, जो अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े मुद्दों और उनकी भागीदारी को बढ़ाने का काम करती है। ऐसे में इस कमेटी को भंग करने का फैसला संगठनात्मक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम के बीच KPCC अध्यक्ष ने यह भी जानकारी दी कि माइनॉरिटी सेल के चेयरमैन अब्दुल जब्बार का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। अब्दुल जब्बार, जो कर्नाटक विधान परिषद (MLC) के सदस्य भी हैं, ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
सूत्रों के अनुसार, अब्दुल जब्बार के इस्तीफे के बाद संगठन में बदलाव की संभावना पहले ही जताई जा रही थी। इसके तुरंत बाद माइनॉरिटी सेल कमेटी को भंग करने का फैसला सामने आया, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी संगठन में व्यापक स्तर पर पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
डी.के. शिवकुमार ने प्रेस नोट में कहा कि नई कमेटी का गठन जल्द किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि नई कमेटी में किन लोगों को शामिल किया जाएगा या इसके गठन की समय-सीमा क्या होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम संगठन को मजबूत करने और आगामी रणनीतियों के अनुरूप ढालने के उद्देश्य से उठाया गया हो सकता है। हालांकि, आधिकारिक रूप से इस पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।
बेंगलुरु में पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे संगठनात्मक सुधार के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे अचानक लिया गया निर्णय मान रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी ढांचे में समय-समय पर बदलाव किए जाते हैं, ताकि संगठन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। माइनॉरिटी सेल जैसे विंग्स का पुनर्गठन भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के इस फैसले के बाद अब सबकी नजर नई कमेटी के गठन पर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई टीम में किन चेहरों को जगह मिलती है और संगठन को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है।
कुल मिलाकर, माइनॉरिटी सेल कमेटी को भंग करने और नई कमेटी के गठन की घोषणा ने कर्नाटक की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में इस फैसले के प्रभाव और इसके पीछे के कारणों को लेकर और स्पष्टता सामने आने की संभावना है।
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