
Karnataka कर्नाटक: सोशल मीडिया रील बनाने को लेकर एक विवाद सामने आया है, जिसमें बिग बॉस के पूर्व प्रतियोगी किशन और डांसर निवेदिता गौड़ा चर्चा में आ गए हैं। दोनों के खिलाफ वन विभाग में शिकायत दर्ज कराई गई है। मामला तब सामने आया जब मोर पंखों से बनी कथित पोशाक पहनकर बनाई गई एक रील सोशल मीडिया पर वायरल हुई।
जानकारी के अनुसार, निवेदिता गौड़ा, जो सोशल मीडिया पर अपने डांस और रील्स के लिए जानी जाती हैं, ने डांसर किशन के साथ मिलकर एक वीडियो शूट किया। इस वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर असली मोर पंखों का उपयोग करके तैयार की गई पोशाक पहनी और ‘हे नेवील नेवील’ गीत पर परफॉर्म किया। इस रील को बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया गया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने इस पर आपत्ति जताई। आरोप लगाया गया कि रील बनाने के लिए मोर पंखों का इस्तेमाल किया गया है, जो वन्यजीव संरक्षण नियमों के तहत विवादित हो सकता है। इसके बाद यह मामला तूल पकड़ने लगा और इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई।
इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कल्लाहल्ली ने वन विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वीडियो शूट के दौरान मोर के पंखों का अंधाधुंध उपयोग किया गया है, जिससे वन्यजीव संरक्षण कानूनों के उल्लंघन की आशंका बनती है। उन्होंने वन विभाग से इस पूरे मामले की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और इसके पंखों का इस तरह उपयोग करना कानून और पर्यावरणीय नियमों के खिलाफ हो सकता है। उनका यह भी कहना है कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता पाने के लिए इस तरह के प्रयोग गलत संदेश देते हैं और इससे युवाओं में गलत उदाहरण स्थापित होता है।
वहीं, इस विवाद के सामने आने के बाद अभी तक किशन और निवेदिता गौड़ा की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि सोशल मीडिया पर उनके समर्थक और आलोचक दोनों ही पक्षों में बहस करते नजर आ रहे हैं। कुछ लोग इसे सिर्फ एक रचनात्मक प्रस्तुति बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे वन्यजीव नियमों का उल्लंघन मान रहे हैं।
वन विभाग ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि की है और प्रारंभिक जांच शुरू करने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार, वीडियो की सत्यता और उपयोग किए गए पंखों की प्रकृति की जांच की जाएगी। यदि यह पाया जाता है कि किसी संरक्षित वन्यजीव से संबंधित सामग्री का गलत उपयोग हुआ है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
यह मामला अब सोशल मीडिया के साथ-साथ कानूनी जांच के दायरे में भी आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की संभावना रहती है, खासकर जब किसी राष्ट्रीय पक्षी से जुड़ी सामग्री का उपयोग सार्वजनिक प्रदर्शन में किया जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। कई पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी इस तरह की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच वन विभाग के हाथों में है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।





