
बेंगलुरु: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि बिजली की सबसे ज़्यादा मांग लगभग 20,000 मेगावाट तक पहुँच रही है और लोगों को अपनी बिजली की ज़रूरतें पूरी करने में मुश्किल हो रही है।
बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 200 से ज़्यादा तालुका प्रभावित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, "बहुत सारी समस्याएँ पैदा हो गई हैं; लोगों की फ़सलें बर्बाद हो गई हैं और पानी व बिजली की समस्याएँ हैं। सभी परेशान हैं। हम स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ राज्यों में बिजली 20 से 22 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदी जा रही है। बिजली उपलब्ध नहीं है।"
शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने ऊर्जा विभाग को स्थिति पर बारीकी से नज़र रखने और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने कुछ चीनी मिल मालिकों से बात की है और उनसे बिजली की स्थिति को संभालने में सरकार का सहयोग करने को कहा है। उन्होंने कहा, "मैंने कुछ किसानों और चीनी मिलों को भी बुलाया है ताकि यह देखा जा सके कि क्या किया जा सकता है और कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकें। वे बिजली बेच नहीं सकते; उन्हें इसे सरकार को देना होगा।
थर्मल पावर उत्पादन के लिए कोयले की उपलब्धता पर चिंता ज़ाहिर करते हुए शिवकुमार ने कहा कि राज्य को कोयले के स्टॉक को लेकर सतर्क रहने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, "जहाँ भी थर्मल पावर है, हमें कोयले के स्टॉक पर नज़र रखनी होगी। सिर्फ़ एक-दो दिन के कोयले के स्टॉक के साथ, हमें बहुत सतर्क रहना होगा। यह सिर्फ़ हमारे राज्य की बात नहीं है; मैं दूसरे राज्यों की स्थिति पर भी नज़र रख रहा हूँ।" ऊर्जा मंत्री के तौर पर अपने अनुभव को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह देश भर में बिजली की उपलब्धता पर लगातार नज़र रखते रहे हैं।





