
Karnataka कर्नाटक: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्री रामलिंगा रेड्डी के कैबिनेट पोर्टफोलियो विवाद के कारण इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने उन्हें मनाने की कोशिश की, जो फिलहाल सफल मानी जा रही है। इस्तीफा देने के बाद अब खबरें आ रही हैं कि रामलिंगा रेड्डी अपना इस्तीफा वापस ले सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, रामलिंगा रेड्डी और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की आमने-सामने बातचीत जयनगर के एक प्राइवेट होटल में हुई। यह बैठक लगभग ढाई घंटे तक चली, जिसमें दोनों पक्षों ने विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य विषय कैबिनेट में पोर्टफोलियो का वितरण, मंत्री पद और पार्टी के भीतर उत्पन्न नाराजगी को लेकर था।
सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने रामलिंगा रेड्डी से चर्चा करते हुए उनके चिंताओं को समझने की कोशिश की। मुख्यमंत्री ने उन्हें पार्टी और सरकार के कामकाज में संतुलन बनाए रखने और संगठनात्मक मजबूती के महत्व पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि यदि नाराजगी और असहमति सार्वजनिक रूप में सामने आई, तो इससे सरकार और पार्टी दोनों की छवि पर असर पड़ सकता है।
बैठक के दौरान रामलिंगा रेड्डी ने अपने विचार साझा किए और मुख्य रूप से कैबिनेट में उनके पद और जिम्मेदारियों को लेकर असंतोष जताया। उन्होंने अपनी नाराजगी का कारण यह बताया कि उन्हें अपेक्षित पोर्टफोलियो नहीं दिया गया, और पार्टी के अंदर उनकी स्थिति पर सवाल उठाए गए। इसके बाद, दोनों नेताओं ने समाधान खोजने और स्थिति को संभालने के तरीकों पर बातचीत की।
मीटिंग के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए रामलिंगा रेड्डी ने इस्तीफा वापस लेने के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उन्होंने रहस्यमयी अंदाज में कहा, "बस एक कम्युनिकेशन गैप है।" इस बयान से यह संकेत मिलता है कि विवाद अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बात चीत सकारात्मक रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की सक्रियता और समझदारी से इस विवाद को बढ़ने से रोका गया। रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा वापस लेने या न लेने का फैसला पार्टी के भीतर संतुलन और आगामी चुनावों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होगा।
कर्नाटक में कैबिनेट पोर्टफोलियो को लेकर नेताओं के बीच मतभेद कोई नई बात नहीं है। हालांकि, वरिष्ठ नेताओं को मनाने में मुख्यमंत्री का रोल इस बार निर्णायक रहा। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत और समझौता आगामी समय में अन्य विवादों को रोकने के लिए भी मिसाल साबित हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कर्नाटक कांग्रेस में संतुलन बनाए रखने और नेताओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने में मुख्यमंत्री के कूटनीतिक कौशल को उजागर किया है। अब यह देखना होगा कि रामलिंगा रेड्डी कब और किस रूप में अपना निर्णय सार्वजनिक करेंगे और क्या वे इस्तीफा वापस लेकर पार्टी और सरकार के कामकाज में पूरी तरह से लौटेंगे।





