
Karnataka कर्नाटक: कर्नाटक के कुछ हिस्सों में खाद की कमी की खबरों के बीच केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को स्थिति पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में कुछ बाधाएं जरूर आई हैं, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार ने राज्य में खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है।
मंत्री ने बताया कि विशेष रूप से यूरिया की आपूर्ति को लेकर कोई गंभीर संकट नहीं है। उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि 10 जून तक कर्नाटक की आनुपातिक आवश्यकता लगभग 3.13 लाख मीट्रिक टन (MT) थी, जबकि इसके मुकाबले 5.59 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी है। यह आंकड़ा आवश्यकता से काफी अधिक है, जिससे आपूर्ति स्थिति को संतुलित बताया गया है।
प्रह्लाद जोशी के अनुसार, राज्य में अब तक 2.47 लाख मीट्रिक टन यूरिया की बिक्री हो चुकी है, इसके बावजूद राज्य में 3.12 लाख मीट्रिक टन का क्लोजिंग स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा 17,190 मीट्रिक टन खाद अभी रास्ते में है, जो जल्द ही राज्य में पहुंचने वाली है। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कर्नाटक में खाद की कोई वास्तविक कमी नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देती है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उन्हें समय पर आवश्यक खाद उपलब्ध हो। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, विशेषकर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव जरूर पड़ा है, लेकिन भारत ने अपनी घरेलू व्यवस्था को मजबूत रखते हुए स्थिति को नियंत्रित किया है।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों से खाद की कमी की शिकायतें सामने आई हैं, जिसे लेकर सरकार ने निगरानी बढ़ा दी है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वितरण व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाए ताकि किसी भी किसान को परेशानी का सामना न करना पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि सीजन के दौरान खाद की मांग बढ़ना सामान्य बात है, लेकिन आपूर्ति और वितरण प्रणाली में किसी भी तरह की असमानता से अस्थायी कमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। सरकार का दावा है कि इस बार पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और आने वाले समय में भी स्थिति नियंत्रण में रहेगी।
कुल मिलाकर केंद्र सरकार ने कर्नाटक में खाद की कमी की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि राज्य में पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है और सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।





