
कर्नाटक : आम लोगों की जेब पर असर डालने वाले दो अहम प्रस्तावों पर जल्द फैसला हो सकता है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में होने वाली राज्य कैबिनेट की बैठक में दूध की कीमत और बस किराए में बढ़ोतरी के प्रस्तावों पर विचार किए जाने की संभावना है। दोनों प्रस्ताव लंबे समय से चर्चा में हैं और अब इन्हें कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है।
राज्य कैबिनेट की यह बैठक पहले पिछले गुरुवार को होने वाली थी, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया था। उस दिन मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके कई कैबिनेट सहयोगियों ने बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘फॉर्म-7’ आवेदनों के कथित गलत इस्तेमाल के आरोपों को लेकर किया गया था।
कैबिनेट बैठक के स्थगित होने के कारण कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी थी। अब माना जा रहा है कि अगली बैठक में सरकार दूध की कीमत बढ़ाने की मांग और सार्वजनिक परिवहन के बस किराए में संभावित संशोधन जैसे मुद्दों पर विचार कर सकती है।
दूध की कीमत में बढ़ोतरी की मांग कर्नाटक मिल्क फेडरेशन यानी KMF के तहत आने वाले 16 सहकारी दुग्ध संघों की ओर से की गई है। इन संघों ने राज्य सरकार के सामने प्रति लीटर 12 रुपये तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय में पशु चारे और दूध की खरीद से जुड़ी लागत काफी बढ़ गई है, जिसके कारण डेयरी किसानों और सहकारी संघों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
दुग्ध संघों का तर्क है कि वर्तमान कीमतों पर उत्पादन और खरीद लागत को संभालना कठिन होता जा रहा है। पशुओं के चारे, परिवहन, रखरखाव और दूसरे खर्चों में बढ़ोतरी के कारण किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा दूध संग्रह, प्रसंस्करण और वितरण से जुड़े खर्च भी पहले की तुलना में अधिक हो गए हैं।
KMF से जुड़े संघों के अध्यक्ष ने राज्य सरकार से दूध की दर में प्रस्तावित बढ़ोतरी को मंजूरी देने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि इस फैसले से डेयरी किसानों को राहत मिलेगी और सहकारी दुग्ध संघों पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ को भी कम किया जा सकेगा।
हालांकि प्रति लीटर 12 रुपये की संभावित बढ़ोतरी आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। यदि सरकार पूरे प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो घरों के मासिक बजट पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। दूध रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं में शामिल है और इसकी कीमत बढ़ने से इससे बनने वाले अन्य उत्पादों की लागत पर भी असर पड़ सकता है।
दूसरी तरफ, बस किराए में बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी कैबिनेट के एजेंडे का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल राज्य में लाखों लोग रोजाना करते हैं। ऐसे में बस किराए में किसी भी तरह की वृद्धि का असर सीधे आम यात्रियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और ग्रामीण इलाकों से शहरों तक आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ेगा।
हालांकि बस किराए में कितनी बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है, इसे लेकर फिलहाल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। कैबिनेट बैठक में परिवहन विभाग की वित्तीय स्थिति, संचालन लागत और यात्रियों पर पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए इस प्रस्ताव पर चर्चा की जा सकती है।
सरकार के सामने इस समय एक तरफ दूध उत्पादकों और परिवहन व्यवस्था की बढ़ती लागत का सवाल है, तो दूसरी तरफ आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न डालने की चुनौती भी है। यही कारण है कि दोनों प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लेने से पहले कैबिनेट में विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
दूध की कीमत बढ़ाने की मांग खास तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी हुई है। कर्नाटक में बड़ी संख्या में किसान दूध उत्पादन और डेयरी कारोबार से जुड़े हैं। सहकारी दुग्ध संघों का कहना है कि यदि उत्पादन लागत के अनुरूप कीमतों में संशोधन नहीं किया गया तो किसानों की आय और संघों की वित्तीय स्थिति दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
वहीं, उपभोक्ताओं के नजरिए से देखा जाए तो दूध की कीमत में एक साथ बड़ी बढ़ोतरी महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है। ऐसे में सरकार पूरे 12 रुपये प्रति लीटर की मांग को स्वीकार करती है या किसी सीमित बढ़ोतरी का रास्ता अपनाती है, इस पर भी नजर रहेगी।
बस किराए का मुद्दा भी राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। सार्वजनिक परिवहन की दरों में बदलाव का असर सीधे लाखों यात्रियों पर पड़ता है। सरकार को परिवहन निगमों की आर्थिक जरूरतों और यात्रियों की वहन क्षमता के बीच संतुलन बनाना होगा।
अब सभी की नजर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक पर है। बैठक के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि दूध की कीमत और बस किराए में बढ़ोतरी के प्रस्तावों पर सरकार क्या फैसला लेती है। फिलहाल दोनों मुद्दों को लेकर राज्य में चर्चा तेज है और सरकार के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।





