
बेंगलुरु: एक अहम कदम उठाते हुए, कर्नाटक कैबिनेट ने गुरुवार को 'कर्नाटक विवाह में पसंद की स्वतंत्रता और सम्मान तथा परंपरा के नाम पर अपराधों की रोकथाम और निषेध (एवा नम्मावा एवा नम्मावा) विधेयक 2026' को मंज़ूरी दे दी। इसे विधानमंडल के चल रहे संयुक्त सत्र में पेश किया जाएगा।
इसका मकसद विवाह में पसंद की स्वतंत्रता देना और जाति-आधारित अपराधों को रोकना तथा उन पर पाबंदी लगाना है; मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकना, अंतर-जातीय विवाहों को सम्मान दिलाना, व्यक्तिगत पसंद में ज़बरदस्ती किए जाने वाले जाति-आधारित भेदभाव को रोकना; और अंतर-जातीय विवाह संपन्न कराने के लिए 'एवा नम्मावा एवा नम्मावा' मंच का गठन करना है।
मसौदा विधेयक के अनुसार, कर्नाटक में जाति-आधारित भेदभाव एक गंभीर सामाजिक समस्या के रूप में बना हुआ है, और अंतर-जातीय विवाह चुनने वाले लोगों के खिलाफ "सम्मान" के नाम पर हिंसा, धमकियों, सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार, हत्या, उत्पीड़न और मानसिक शोषण की घटनाएं सामने आ रही हैं।





