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कर्नाटक का डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा दांव, 2031 तक 1 GW क्षमता हासिल करने का लक्ष्य

Kavita2
19 Sept 2026 11:23 AM IST
कर्नाटक का डेटा सेंटर सेक्टर में बड़ा दांव, 2031 तक 1 GW क्षमता हासिल करने का लक्ष्य
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने राज्य को अगली पीढ़ी के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर निवेश के प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से ‘कर्नाटक सस्टेनेबल डेटा सेंटर पॉलिसी 2026-31’ को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को राज्य मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद अगले पांच वर्षों के लिए तैयार इस नीति के तहत 2031 तक एक गीगावाट यानी 1 GW की संचयी डेटा सेंटर IT लोड क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

नई नीति के तहत कर्नाटक सरकार का लक्ष्य 2031 तक भारत की AI-ready डेटा सेंटर क्षमता में राज्य की हिस्सेदारी 10 से 12 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इसके लिए सरकार ने 1,300.45 करोड़ रुपये का बजटीय ढांचा तैयार किया है। इस राशि का इस्तेमाल निवेश प्रोत्साहन, ग्रीन एनर्जी, डिजिटल कनेक्टिविटी, कौशल विकास, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और डेटा सेंटर इकोसिस्टम को मजबूत करने से जुड़ी विभिन्न पहलों में किया जाएगा।

राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खड़गे ने नई नीति को डेटा सेंटर क्षेत्र में विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। सरकार का फोकस केवल डेटा सेंटर की संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि ऐसे केंद्र विकसित करने पर है जो बिजली और पानी जैसे संसाधनों का अधिक कुशलता से इस्तेमाल कर सकें।

नई नीति में रिन्यूएबल एनर्जी के उपयोग को विशेष प्राथमिकता दी गई है। डेटा सेंटर बड़ी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उनकी ऊर्जा जरूरत और बढ़ रही है। ऐसे में सरकार डेटा सेंटर ऑपरेटरों को स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है।

इसके साथ ही एडवांस्ड कूलिंग टेक्नोलॉजी पर भी जोर दिया गया है। डेटा सेंटर में बड़ी संख्या में सर्वर लगातार काम करते हैं, जिससे काफी गर्मी पैदा होती है। सर्वर और दूसरे उपकरणों को निर्धारित तापमान पर रखने के लिए कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है। पारंपरिक कूलिंग व्यवस्था में बिजली और पानी की खपत अधिक हो सकती है। नई नीति में आधुनिक और अधिक कुशल कूलिंग तकनीकों को बढ़ावा देने की योजना है।

पानी का कुशल प्रबंधन भी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। कर्नाटक के कई इलाकों में पानी की उपलब्धता संवेदनशील मुद्दा है। इसे देखते हुए सरकार डेटा सेंटर परियोजनाओं में जल उपयोग की निगरानी और दक्षता को प्राथमिकता देगी। नीति में Power Usage Effectiveness और Water Usage Effectiveness जैसे मानकों की निगरानी पर जोर दिया गया है।

डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थान तय करने से पहले संसाधनों की उपलब्धता का आकलन करने की योजना भी है। बिजली, पानी, भूमि और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे कारकों को ध्यान में रखकर स्थान चुने जाएंगे। इसका उद्देश्य ऐसी जगहों पर बड़े डेटा सेंटर विकसित करने से बचना है जहां संसाधनों पर पहले से अधिक दबाव हो।

नीति में डेटा सेंटर पार्क के साथ एज डेटा सेंटर, केबल लैंडिंग स्टेशन और इससे जुड़े अन्य डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को सुविधाजनक बनाने का प्रावधान है। एज डेटा सेंटर छोटे और स्थानीय स्तर के डेटा प्रोसेसिंग केंद्र होते हैं, जो उपयोगकर्ताओं के करीब डेटा प्रोसेस कर सेवाओं की गति बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।

कर्नाटक सरकार डेटा सेंटर निवेश को केवल बेंगलुरु तक सीमित नहीं रखना चाहती। नई नीति में ‘बियॉन्ड बेंगलुरु’ रणनीति के तहत राज्य के दूसरे हिस्सों में भी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया गया है। इससे बड़े निवेश का दबाव अकेले बेंगलुरु पर कम करने और अन्य क्षेत्रों में रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।

सरकार डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए ऐसे स्थानों की पहचान करना चाहती है जहां पर्याप्त बिजली, पानी, जमीन और हाई-स्पीड नेटवर्क उपलब्ध हो। इससे राज्य के टियर-2 शहरों और अन्य संभावित क्षेत्रों को भी डेटा सेंटर निवेश से जोड़ने का रास्ता खुल सकता है।

नई नीति में रिसर्च एंड डेवलपमेंट और कौशल विकास को भी शामिल किया गया है। डेटा सेंटर उद्योग में नेटवर्क इंजीनियर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, क्लाउड प्रोफेशनल और कूलिंग सिस्टम विशेषज्ञ जैसे प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। सरकार इस मांग को देखते हुए स्थानीय स्तर पर कौशल विकास को प्रोत्साहित करेगी।

भारत में डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार देश की स्थापित डेटा सेंटर बिजली क्षमता वर्ष 2020 के लगभग 375 MW से बढ़कर अगस्त 2026 तक करीब 1,575 MW हो गई है। AI और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में इसकी मांग और तेजी से बढ़ने की संभावना है।

बेंगलुरु पहले से देश के प्रमुख टेक्नोलॉजी केंद्रों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में IT कंपनियां, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, स्टार्टअप, क्लाउड कंपनियां और रिसर्च संस्थान मौजूद हैं। इसी मौजूदा टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को आधार बनाकर सरकार अब डेटा सेंटर क्षेत्र में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

AI के बढ़ते इस्तेमाल ने डेटा सेंटर की जरूरत को और महत्वपूर्ण बना दिया है। जनरेटिव AI और दूसरे आधुनिक मॉडल को संचालित करने के लिए बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता, GPU, हाई-स्पीड नेटवर्क और लगातार बिजली की आवश्यकता होती है। ऐसे में डेटा सेंटर अब केवल IT उद्योग से जुड़ी सुविधा नहीं बल्कि महत्वपूर्ण डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में उभर रहे हैं।

नई नीति में निवेशकों के लिए प्रोत्साहनों को पर्यावरणीय प्रदर्शन से जोड़ने पर भी जोर है। यानी डेटा सेंटर कितनी कुशलता से बिजली और पानी का इस्तेमाल करते हैं, जैसे मानकों का महत्व बढ़ेगा। इससे सरकार निवेश आकर्षित करने के साथ संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभाव को नियंत्रित करने का प्रयास करेगी।

केंद्र सरकार भी डेटा सेंटर के ऊर्जा और जल उपयोग को लेकर दक्षता बढ़ाने पर जोर दे रही है। ऊर्जा दक्षता, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक कूलिंग सिस्टम के इस्तेमाल को डेटा सेंटर उद्योग के सतत विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कर्नाटक की नई नीति इसी दिशा में राज्य स्तर पर एक व्यापक ढांचा तैयार करती है। इसमें डेटा सेंटर पार्क और डिजिटल कनेक्टिविटी से लेकर स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग, R&D, कौशल विकास और पर्यावरणीय स्थिरता तक पूरे इकोसिस्टम को शामिल करने की कोशिश की गई है।

फिलहाल सरकार ने 2031 तक 1 GW संचयी IT लोड और देश की AI-ready डेटा सेंटर क्षमता में 10 से 12 प्रतिशत हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा है। इन लक्ष्यों को हासिल करने की वास्तविक रफ्तार आने वाले वर्षों में मिलने वाले निजी निवेश, बिजली और पानी की उपलब्धता, डिजिटल कनेक्टिविटी तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।

‘सस्टेनेबल डेटा सेंटर पॉलिसी 2026-31’ के जरिए कर्नाटक ने स्पष्ट किया है कि वह AI और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है। साथ ही सरकार की कोशिश है कि डेटा सेंटर विस्तार के साथ ऊर्जा और पानी की बढ़ती मांग को नियंत्रित रखते हुए एक टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया जाए।

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