
Karnataka कर्नाटक: भारत सरकार द्वारा अधिसूचित ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026’ अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहे हैं। इन नियमों के तहत अब कचरे को उसके स्रोत पर ही चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य होगा—गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा। साथ ही इनके संग्रह, भंडारण और निस्तारण की प्रक्रिया भी इसी वर्गीकरण के आधार पर तय होगी। सरकार ने इन नियमों को लागू करने के लिए 18 महीने की समय-सीमा निर्धारित की है।
बेंगलुरु में इन नियमों को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। शहरवासियों को जागरूक करने के उद्देश्य से ‘बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड’ (BSWML) ने 18 अप्रैल को एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की, जिसमें 700 से अधिक निवासी, अपार्टमेंट एसोसिएशन, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधि, मार्शल और अधिकारी शामिल हुए।
BSWML अधिकारियों के अनुसार, बेंगलुरु पहले से ही कचरा प्रबंधन प्रणाली को अपनाने में आगे रहा है, लेकिन नए नियम पूरे देश में लागू होने के कारण सभी नगर निकायों को व्यवस्था मजबूत करनी होगी। पहले शहर में त्रिस्तरीय प्रणाली लागू थी, जिसमें गीला, सूखा और सैनिटरी कचरा शामिल था। अब इसमें चौथी श्रेणी ‘विशेष देखभाल वाला कचरा’ जोड़ा गया है, जिसमें पेंट के डिब्बे, बल्ब, पारे वाले थर्मामीटर, एक्सपायरी दवाएं और अन्य खतरनाक घरेलू कचरा शामिल होगा, जिसे सीधे हाथों से नहीं संभाला जा सकेगा।
अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक श्रेणी के कचरे के लिए अलग-अलग प्रसंस्करण नियम लागू किए जाएंगे। इसके साथ ही SWM नियम 2026 में ‘विस्तारित थोक अपशिष्ट उत्पादक उत्तरदायित्व’ (EBWGR) की अवधारणा भी शामिल की गई है, जिसके तहत बड़े कचरा उत्पादकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी।
BSWML का कहना है कि आने वाले समय में शहर स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को नई प्रणाली के लिए तैयार किया जाएगा, ताकि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में किसी तरह की बाधा न आए।





