
बल्लारी। तुंगभद्रा नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के धान उत्पादक किसानों के बीच लंबे समय से चली आ रही आपसी समझ एक बार फिर सामने आई है। कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच अक्सर दिखाई देने वाले विवादों से अलग, तुंगभद्रा जल बंटवारे के मुद्दे पर दोनों राज्यों के किसान एक-दूसरे की मांग का समर्थन करते नजर आ रहे हैं।
आंध्र प्रदेश के कुर्नूल जिले और रायलसीमा क्षेत्र के अन्य हिस्सों में धान की खेती करने वाले किसान बांध से अपने हिस्से का पानी नहरों के जरिए सुचारू रूप से पहुंचाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि खेती के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को जल बंटवारे को लेकर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए और आंध्र प्रदेश के हिस्से का पानी समय पर नहरों में छोड़ना चाहिए।
आंध्र के किसानों के समर्थन में बल्लारी के किसान
बल्लारी जिले के किसान नेताओं ने आंध्र प्रदेश के किसानों की मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि तुंगभद्रा नदी का पानी दोनों राज्यों के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके बंटवारे को लेकर आपसी सहयोग बनाए रखना जरूरी है।
बल्लारी जिले में नहरों के अंतिम छोर यानी टेल-एंड पर खेती करने वाले किसानों ने फिलहाल नहरों में पानी का बहाव अस्थायी रूप से रोक दिया है। किसानों का यह कदम तब तक जारी रहने की बात कही गई है, जब तक बांध के अधिकारी आंध्र प्रदेश के हिस्से का पानी छोड़ने को लेकर आवश्यक कार्रवाई नहीं करते।
किसान नेताओं का मानना है कि जल बंटवारे को लेकर किसी एक राज्य के किसानों के हित को दूसरे राज्य के किसानों के खिलाफ खड़ा करने के बजाय दोनों पक्षों के बीच समन्वय से समाधान निकालना चाहिए।
बांध में 93.72 TMCft पानी उपलब्ध
तुंगभद्रा बांध में फिलहाल 93.72 TMCft पानी जमा होने की जानकारी दी गई है। बांध की कुल जल भंडारण क्षमता 105.79 TMCft है। यानी मौजूदा जल भंडार क्षमता के मुकाबले काफी ऊंचे स्तर पर है।
ऐसे में किसानों की नजर इस बात पर है कि उपलब्ध पानी का बंटवारा किस तरह किया जाता है और सिंचाई के लिए अलग-अलग क्षेत्रों को कितना पानी उपलब्ध कराया जाता है।
धान की खेती के लिए समय पर पानी मिलना बेहद जरूरी होता है। खासकर नहरों के आखिरी छोर पर स्थित किसानों को अक्सर पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता रहती है। यदि पानी का प्रवाह पर्याप्त नहीं रहता है तो इसका सीधा असर फसल की पैदावार और किसानों की आय पर पड़ सकता है।
पानी की मांग को अंतिम रूप देने की मांग
आंध्र प्रदेश के किसान अधिकारियों से पानी की मांग को जल्द अंतिम रूप देने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक दोनों राज्यों के लिए उपलब्ध पानी और हिस्सेदारी को लेकर स्पष्टता नहीं होगी, तब तक नहरों के संचालन को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।
कुर्नूल और रायलसीमा के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए तुंगभद्रा जल पर निर्भर हैं। ऐसे में बांध से मिलने वाला पानी उनकी कृषि गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण है।
किसानों की मांग है कि अधिकारियों को जल्द निर्णय लेकर आंध्र प्रदेश के हिस्से का पानी नहरों में पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि धान की फसल को पर्याप्त सिंचाई मिल सके।
कावेरी विवाद से अलग है स्थिति
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के किसानों के बीच तुंगभद्रा जल बंटवारे का मौजूदा घटनाक्रम कावेरी जल विवाद से काफी अलग दिखाई देता है। कावेरी के मामले में कम बारिश और जल संकट के दौरान कर्नाटक तथा तमिलनाडु के किसानों के बीच तनाव और विरोध की स्थिति कई बार सामने आती रही है।
इसके विपरीत, तुंगभद्रा नदी के पानी को लेकर दोनों राज्यों के धान उत्पादक किसानों के बीच पारंपरिक रूप से बेहतर संबंध रहे हैं। किसान नेताओं का समर्थन भी इसी आपसी समझ का संकेत माना जा रहा है।
बल्लारी के किसानों का कहना है कि नदी का पानी कृषि और किसानों की आजीविका से जुड़ा विषय है। इसलिए जल बंटवारे के मुद्दे को राजनीतिक विवाद का रूप देने के बजाय किसानों की जरूरतों और उपलब्ध जल संसाधनों को ध्यान में रखकर समाधान निकाला जाना चाहिए।
टेल-एंड किसानों की अपनी परेशानी
बल्लारी जिले में नहरों के अंतिम छोर पर खेती करने वाले किसानों की अपनी अलग समस्या है। नहर के शुरुआती हिस्सों में पानी पहुंचने के बाद टेल-एंड तक पर्याप्त पानी पहुंचाना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है।
किसानों का कहना है कि यदि नहरों में पानी का प्रवाह लगातार और पर्याप्त मात्रा में बना रहे तो अंतिम छोर के किसानों को भी सिंचाई का लाभ मिल सकता है। इसी वजह से उन्होंने फिलहाल पानी का प्रवाह रोकने का कदम उठाया है और अधिकारियों से जल वितरण व्यवस्था को स्पष्ट करने की मांग की है।
किसान नेताओं के मुताबिक, यह कदम किसी दूसरे राज्य के किसानों के खिलाफ नहीं है, बल्कि जल बंटवारे को लेकर उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
दोनों राज्यों के किसानों के हित जुड़े
तुंगभद्रा नदी का पानी कर्नाटक और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों के कृषि क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है। नदी और उससे जुड़ी नहर प्रणाली पर निर्भर किसानों की आजीविका सिंचाई व्यवस्था से सीधे जुड़ी हुई है।
ऐसे में बांध में उपलब्ध 93.72 TMCft पानी को लेकर दोनों राज्यों के किसानों की नजर अधिकारियों के फैसले पर है। किसानों को उम्मीद है कि जल बंटवारे को लेकर जल्द स्पष्टता आएगी और नहरों के माध्यम से पानी का वितरण सुचारू किया जाएगा।
समाधान पर टिकी नजर
फिलहाल बल्लारी के किसान नेताओं द्वारा आंध्र प्रदेश के किसानों को समर्थन दिए जाने से तुंगभद्रा जल बंटवारे का मुद्दा चर्चा में आ गया है। किसान चाहते हैं कि अधिकारियों की ओर से जल्द निर्णय लिया जाए और आंध्र प्रदेश के हिस्से का पानी उपलब्ध कराया जाए।
आने वाले दिनों में बांध अधिकारियों के फैसले और नहरों में पानी छोड़ने की प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी। दोनों राज्यों के किसानों के बीच सहयोग की यह स्थिति बताती है कि नदी जल बंटवारे के जटिल मुद्दों को आपसी संवाद और समन्वय के जरिए भी सुलझाने की कोशिश की जा सकती है।
फिलहाल तुंगभद्रा बांध में पर्याप्त जल भंडार मौजूद है और किसानों की मांग है कि उपलब्ध पानी का न्यायसंगत और समयबद्ध तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाए, ताकि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश दोनों के धान उत्पादक किसानों को सिंचाई के लिए आवश्यक पानी मिल सके।





