कर्नाटक

मैसूर दशहरा विवाद पर कांग्रेस को JDS ने घेरा, दलित मंत्रियों के अपमान का लगाया आरोप

Kavita2
22 Oct 2026 4:58 PM IST
मैसूर दशहरा विवाद पर कांग्रेस को JDS ने घेरा, दलित मंत्रियों के अपमान का लगाया आरोप
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बेंगलुरु। कर्नाटक में विश्व प्रसिद्ध मैसूर दशहरा उत्सव के दौरान मंत्रियों को कार्यक्रम स्थल पर रोके जाने की घटना ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) ने गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस सरकार पर दलित मंत्रियों का अपमान करने का गंभीर आरोप लगाया। जेडीएस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि कांग्रेस दलित समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती है और सत्ता में आने के बाद उन्हें उचित सम्मान नहीं देती। पार्टी ने मैसूर दशहरा की जंबू सवारी के दौरान कुछ मंत्रियों को मंच की ओर जाने से रोकने की घटना को निंदनीय बताया। साथ ही मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से सवाल किया कि जब मंत्रियों के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है, तो आम नागरिकों की स्थिति क्या होगी। हालांकि, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने घटना की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

दलित मंत्रियों के अपमान को लेकर भड़की जेडीएस

कर्नाटक की विपक्षी पार्टी जेडीएस ने मैसूर दशहरा समारोह में हुई घटना को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है।

पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर कहा कि दलित मंत्रियों के साथ किया गया व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

जेडीएस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति में दलित समुदाय का इस्तेमाल केवल चुनावी समर्थन हासिल करने के लिए किया जाता है।

पार्टी ने कहा कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस दलित नेताओं को पर्याप्त सम्मान नहीं देती।

हालांकि, यह जेडीएस का राजनीतिक आरोप है। घटना के पीछे जातिगत भेदभाव की मंशा होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से पूछे तीखे सवाल

जेडीएस ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

पार्टी ने पूछा कि मुख्यमंत्री अपने साथ कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे मंत्रिमंडल के सहयोगियों को पीछे छोड़कर आगे क्यों बढ़ गए।

जेडीएस का कहना है कि यदि राज्य सरकार के मंत्रियों को ही कार्यक्रम स्थल पर इस प्रकार की स्थिति का सामना करना पड़े, तो आम नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

पार्टी ने कांग्रेस के सामाजिक न्याय और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता के दावों पर भी सवाल खड़े किए।

जेडीएस ने इसे डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और सामाजिक समानता के मुद्दे से जोड़ते हुए कांग्रेस सरकार की आलोचना की।

मैसूर दशहरा के दौरान क्या हुआ था?

विवाद बुधवार, 21 अक्टूबर को मैसूर महल परिसर में आयोजित दशहरा जंबू सवारी समारोह के दौरान सामने आया।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार विजयादशमी के पारंपरिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए निर्धारित मंच की ओर बढ़ रहे थे।

उनके साथ राज्य सरकार के कुछ मंत्री भी मौजूद थे।

इसी दौरान एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने मंत्रियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस अधिकारी ने प्रवेश की अनुमति और सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला दिया।

इससे मौके पर कुछ देर के लिए असहज स्थिति बन गई।

पुलिस अधिकारी से हुई मंत्रियों की बहस

कार्यक्रम के दौरान कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदगी ने उन्हें रोके जाने पर आपत्ति जताई।

रिपोर्टों के अनुसार, तंगदगी ने पुलिस अधिकारी को बताया कि वह राज्य सरकार में संस्कृति मंत्री हैं।

इसके बावजूद कुछ मंत्रियों को आगे बढ़ने से रोका गया।

घटना के दौरान संबंधित पुलिस अधिकारी और मंत्रियों के बीच बहस हुई।

बाद में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के हस्तक्षेप के बाद मंत्रियों को कार्यक्रम स्थल की ओर जाने दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया।

किन मंत्रियों को रोका गया था?

घटना से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, कन्नड़ एवं संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदगी, केएस बसवंतप्पा और पीएम नरेंद्र स्वामी को कार्यक्रम स्थल की ओर जाने से रोका गया था।

कुछ प्रकाशित रिपोर्टों में एचसी बालकृष्ण का नाम भी शामिल बताया गया है।

विभिन्न समाचार रिपोर्टों में रोके गए मंत्रियों की संख्या और उनके नामों को लेकर कुछ अंतर है।

हालांकि, यह स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री के साथ कार्यक्रम की ओर जा रहे मंत्रियों और पुलिस अधिकारी के बीच प्रवेश को लेकर विवाद हुआ था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

मैसूर दशहरा समारोह में हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।

वीडियो में कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश को लेकर पुलिस अधिकारी और मंत्रियों के बीच बातचीत तथा बहस दिखाई देती है।

कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार के मंत्री आधिकारिक समारोह में शामिल होने जा रहे थे, तो उन्हें क्यों रोका गया।

वहीं, घटना के पीछे सुरक्षा प्रोटोकॉल या अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी होने की संभावना पर भी चर्चा हुई।

हालांकि, इस विवाद के वास्तविक कारणों का निर्धारण आधिकारिक जांच के बाद ही किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने दिए जांच के निर्देश

मामले पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने स्वीकार किया कि दशहरा समारोह के दौरान कुछ अधिकारियों ने मंत्रियों को रोका था।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें स्वयं हस्तक्षेप करके मंत्रियों को कार्यक्रम में शामिल होने देना पड़ा।

शिवकुमार ने राज्य की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि घटना से संबंधित वीडियो फुटेज की जांच की जाएगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दशहरा समारोह का आयोजन व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ और विभिन्न विभागों ने इसमें योगदान दिया।

सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी उठे सवाल

इस घटना ने बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मैसूर दशहरा जैसे प्रमुख आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं।

ऐसे कार्यक्रमों में प्रवेश व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन महत्वपूर्ण होता है।

हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों और कार्यक्रम में शामिल मंत्रियों के बीच स्पष्ट समन्वय नहीं होने से विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।

अब जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित अधिकारियों को मंत्रियों के प्रवेश के बारे में क्या निर्देश दिए गए थे और उन्हें रोकने का कारण क्या था।

कांग्रेस के सामाजिक न्याय के दावों पर हमला

जेडीएस ने इस घटना को कांग्रेस की सामाजिक न्याय संबंधी राजनीति से जोड़ दिया है।

पार्टी ने कहा कि कांग्रेस सार्वजनिक मंचों से दलितों के अधिकार और संविधान की रक्षा की बात करती है, लेकिन उसके शासन में दलित मंत्रियों को ही अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

जेडीएस ने आरोप लगाया कि यह घटना कांग्रेस के कथित दोहरे रवैये को सामने लाती है।

हालांकि, कांग्रेस या राज्य सरकार की ओर से घटना को जातिगत भेदभाव से जोड़ने की पुष्टि नहीं की गई है।

मुख्यमंत्री ने फिलहाल इसे अधिकारियों की कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा मामला मानते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।

कर्नाटक की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी

कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के बीच राजनीतिक टकराव पहले से जारी है।

जेडीएस के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस सरकार की आलोचना करते रहे हैं।

मैसूर दशहरा की घटना ने विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का नया अवसर दिया है।

जेडीएस ने इस मामले को दलित सम्मान और सामाजिक न्याय से जोड़कर सरकार से जवाब मांगा है।

वहीं, मुख्यमंत्री की ओर से जांच कराने की घोषणा के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

मैसूर दशहरा जंबू सवारी समारोह के दौरान मंत्रियों को रोके जाने की घटना अब केवल प्रशासनिक विवाद नहीं रह गई है।

जेडीएस के आरोपों के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने वीडियो फुटेज की जांच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

अब जांच से स्पष्ट होगा कि मंत्रियों को सुरक्षा कारणों से रोका गया था या अधिकारियों के बीच समन्वय में कमी के कारण विवाद पैदा हुआ।

फिलहाल जेडीएस ने कांग्रेस सरकार पर दलित मंत्रियों के अपमान का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से जवाब मांगा है, जबकि राज्य सरकार ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।

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