
बेंगलुरु। कर्नाटक में प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। परियोजना को रद्द करने की मांग को लेकर सहयोगी दल जनता दल सेक्युलर (JDS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिदादी से बेंगलुरु तक विशाल मार्च शुरू किया है। तीन दिनों तक चलने वाला यह मार्च करीब 38 किलोमीटर की दूरी तय करेगा। दोनों दलों का कहना है कि वे प्रस्तावित टाउनशिप प्रोजेक्ट के खिलाफ जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
मार्च की शुरुआत बिदादी के बैरामंगला से हुई। इस दौरान JDS और BJP से जुड़े नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। दोनों दलों की ओर से इस मार्च को सरकार की प्रस्तावित योजना के खिलाफ राजनीतिक और जन आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है।
निखिल कुमारस्वामी ने लिया देवेगौड़ा का आशीर्वाद
मार्च शुरू होने से पहले JDS युवा विंग के राज्य अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने पूर्व प्रधानमंत्री और JDS के राष्ट्रीय अध्यक्ष एच.डी. देवेगौड़ा से मुलाकात की। उन्होंने देवेगौड़ा को प्रस्तावित मार्च के बारे में जानकारी दी और उनका आशीर्वाद लिया।
मुलाकात के दौरान देवेगौड़ा ने निखिल कुमारस्वामी के सिर पर हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद दिया। इस मुलाकात को मार्च से पहले संगठनात्मक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निखिल ने देवेगौड़ा को बताया कि बिदादी के बैरामंगला से शुरू होने वाला मार्च तीन दिनों तक चलेगा और करीब 38 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए बेंगलुरु पहुंचेगा। इसके जरिए प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को रद्द करने की मांग उठाई जाएगी।
सरकार की योजना का विरोध
JDS और BJP लंबे समय से बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। दोनों दलों का आरोप है कि प्रस्तावित परियोजना से स्थानीय लोगों और क्षेत्र के हित प्रभावित हो सकते हैं। इसी को लेकर दोनों पार्टियों ने संयुक्त रूप से सड़क पर उतरने का फैसला किया है।
मार्च के दौरान कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए परियोजना को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। दोनों दलों का प्रयास है कि बिदादी क्षेत्र से शुरू होने वाला यह आंदोलन बेंगलुरु तक पहुंचे और सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाया जा सके।
विपक्षी दलों का कहना है कि टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि किसी भी बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित लोगों और स्थानीय हितधारकों की बात सुनी जानी चाहिए।
तीन दिन चलेगा मार्च
बैरामंगला से शुरू हुआ यह मार्च तीन दिनों तक चलने वाला है। करीब 38 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद प्रदर्शनकारी बेंगलुरु पहुंचेंगे। मार्च के दौरान अलग-अलग स्थानों पर कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने की संभावना है।
JDS और BJP की ओर से इसे व्यापक जनसमर्थन वाला आंदोलन बनाने की कोशिश की जा रही है। दोनों सहयोगी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक साथ सड़क पर उतरने से कर्नाटक की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर हलचल बढ़ गई है।
मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। बड़ी संख्या में लोगों के सड़क पर उतरने के कारण मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की संभावना है।
देवेगौड़ा के आशीर्वाद को अहम माना जा रहा
मार्च से पहले निखिल कुमारस्वामी का एच.डी. देवेगौड़ा से मिलना JDS के भीतर इस आंदोलन के महत्व को दर्शाता है। देवेगौड़ा ने निखिल को आशीर्वाद देकर मार्च के लिए शुभकामनाएं दीं।
निखिल कुमारस्वामी JDS की युवा इकाई का नेतृत्व करते हैं और पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनका मार्च का नेतृत्व करना संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
देवेगौड़ा से मुलाकात के दौरान निखिल ने आंदोलन की रणनीति और मार्च की जानकारी साझा की। इसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बैरामंगला से मार्च की शुरुआत की।
BJP-JDS गठबंधन की एकजुटता का संदेश
बिदादी टाउनशिप के विरोध में BJP और JDS का एक साथ मार्च करना दोनों दलों के बीच राजनीतिक तालमेल का भी संकेत माना जा रहा है। दोनों पार्टियां विधानसभा सत्र के दौरान भी कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही हैं।
बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट इस समय विपक्षी गठबंधन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। संयुक्त मार्च के जरिए दोनों दल यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे सरकार की नीतियों के खिलाफ मिलकर संघर्ष करेंगे।
राजनीतिक जानकारों की नजर भी इस मार्च पर है, क्योंकि तीन दिनों तक चलने वाले इस आंदोलन से बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट का मुद्दा और अधिक चर्चा में आ सकता है।
सरकार के सामने बढ़ेगी चुनौती
मार्च के जरिए BJP और JDS ने सरकार पर परियोजना को लेकर पुनर्विचार करने का दबाव बनाने की कोशिश की है। आने वाले दिनों में आंदोलन का स्वरूप और बड़ा होता है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
दोनों दलों ने साफ किया है कि वे बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर अपनी मांग से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि परियोजना को रद्द किया जाना चाहिए और स्थानीय हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि तीन दिनों के मार्च के बाद सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल बैरामंगला से शुरू हुआ 38 किलोमीटर लंबा मार्च बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के विरोध में BJP और JDS के संयुक्त राजनीतिक अभियान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।





