कर्नाटक

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी का सरकार पर communalism को रोकने की चुनौती

SHIDDHANT
2 Feb 2026 10:39 PM IST
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी का सरकार पर communalism को रोकने की चुनौती
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Bengaluru बैंगलुरु: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सोमवार को कहा कि वर्तमान सरकार की नींव कमजोर है और वह इस कमजोर आधार पर खड़ी है, जो समाज में communalism यानी सांप्रदायिकता पर आधारित है। मौलाना मदनी ने अपने बयान में चेतावनी दी कि सरकार को देश को इस सांप्रदायिकता की समस्या से बचाने की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस चुनौती का सामना करने में विफल रहती है, तो इसके गंभीर परिणाम भविष्य में सामने आ सकते हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र और सामाजिक समरसता की रक्षा करना हर सरकार का कर्तव्य होता है। मौलाना ने कहा, "देश के नागरिकों की शांति और एकता को बनाए रखना आज की राजनीति की प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि सांप्रदायिक झुकाव बढ़ता है, तो इससे केवल समाज में तनाव ही नहीं बढ़ेगा बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।"
मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि शिक्षा, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से ही देश में साम्प्रदायिक भावनाओं को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे किसी भी परिस्थिति में सांप्रदायिक विवादों को भड़काने वाली गतिविधियों में शामिल न हों।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में कई ऐसे संकेत हैं जो समाज में विभाजन और असुरक्षा की भावना पैदा कर रहे हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है।
मौलाना मदनी के अनुसार, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और संविधान की मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित करना ही किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों और धर्मों के लोगों के बीच भरोसा और सह-अस्तित्व बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि सांप्रदायिकता के खिलाफ संघर्ष केवल राजनीतिक या धार्मिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय कर्तव्य है। उन्होंने सभी नागरिकों से भी अपील की कि वे इस दिशा में जागरूक रहें और समाज में सौहार्द और सहिष्णुता बनाए रखने में योगदान दें।
मौलाना मदनी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में विभिन्न क्षेत्रों में सांप्रदायिक विवाद और सामाजिक तनाव की घटनाएं बढ़ रही हैं। उन्होंने सरकार को यह याद दिलाया कि लोकतंत्र में स्थिरता और विकास तभी संभव है जब समाज के सभी वर्गों के बीच सामंजस्य और भरोसा कायम रहे।
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