कर्नाटक

जक्कूर फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल को DGCA की मंजूरी, तीन साल बाद फिर शुरू होगी पायलट ट्रेनिंग

Kavita2
25 July 2026 12:10 PM IST
जक्कूर फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल को DGCA की मंजूरी, तीन साल बाद फिर शुरू होगी पायलट ट्रेनिंग
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बेंगलुरु : लंबे इंतजार के बाद जक्कूर फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल (GFTS) को फिर से नई पहचान मिलने की उम्मीद जगी है। विमानन क्षेत्र के नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने संस्थान के संचालन लाइसेंस को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों से बंद पड़ी पायलट प्रशिक्षण गतिविधियां अगले महीने से दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।

DGCA ने जक्कूर फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल का ऑपरेटिंग लाइसेंस 15 जुलाई 2031 तक के लिए नवीनीकृत कर दिया है। लाइसेंस मिलने के बाद संस्थान में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को दोबारा शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। इससे उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी, जो पायलट बनने का सपना लेकर इस संस्थान से जुड़ना चाहते हैं।

तीन साल बाद लौटेगी प्रशिक्षण गतिविधियां

जक्कूर फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल में पायलट प्रशिक्षण का काम पिछले तीन वर्षों से बंद था। लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया और अन्य कारणों के चलते उड़ान प्रशिक्षण गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। अब DGCA की मंजूरी मिलने के बाद संस्थान प्रबंधन ने अगले महीने से प्रशिक्षण शुरू करने की योजना बनाई है।

एविएशन क्षेत्र में जक्कूर फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल का विशेष महत्व रहा है। यह संस्थान लंबे समय से ऐसे युवाओं को पायलट प्रशिक्षण उपलब्ध कराता रहा है, जो सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद विमानन क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।

संस्थान से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, प्रशिक्षण शुरू होने के बाद छात्रों को उड़ान अभ्यास, तकनीकी प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक सुविधाएं फिर से उपलब्ध कराई जाएंगी।

डिप्टी सीएम ने किया जक्कूर एयरपोर्ट का निरीक्षण

इस बीच, कर्नाटक के डिप्टी चीफ मिनिस्टर डॉ. जी. परमेश्वर ने जक्कूर एयरपोर्ट का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने एयरपोर्ट की मौजूदा सुविधाओं, रनवे और प्रशिक्षण गतिविधियों से जुड़े बुनियादी ढांचे की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने कहा कि जक्कूर एयरपोर्ट के रनवे को विस्तार देने के लिए अतिरिक्त जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए करीब 10 एकड़ और जमीन लेने की योजना है। रनवे के विस्तार से उड़ान प्रशिक्षण गतिविधियों को और बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि जक्कूर एयरपोर्ट केवल एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं है, बल्कि यह राज्य में विमानन शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण संस्थान है।

मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए अहम संस्थान

जक्कूर फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल को ऐसे संस्थान के रूप में देखा जाता है, जो मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के युवाओं को पायलट बनने का अवसर उपलब्ध कराता है। निजी फ्लाइंग स्कूलों में प्रशिक्षण की अधिक लागत के मुकाबले सरकारी प्रशिक्षण संस्थान कई छात्रों के लिए बेहतर विकल्प साबित होते हैं।

एविएशन उद्योग में लगातार बढ़ते अवसरों के बीच पायलटों की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में जक्कूर जैसे प्रशिक्षण केंद्रों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

संस्थान का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देकर ऐसे प्रशिक्षित पायलट तैयार करना है, जो देश और दुनिया की विमानन कंपनियों में रोजगार हासिल कर सकें।

पांच विमानों के बेड़े से होगा प्रशिक्षण

वर्तमान में जक्कूर फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल के पास कुल पांच विमान उपलब्ध हैं। इनमें से तीन विमान फिलहाल संचालन में हैं। इनमें सेसना 172P, सेसना 172S और टेक्नम P2006T शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार, बाकी दो विमान टेक्नम P2010 और सेसना 152 भी जल्द ही सेवा में शामिल किए जाएंगे। इन विमानों के दोबारा उपयोग में आने से प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

फ्लाइंग ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त विमानों की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि छात्रों को निर्धारित घंटों की उड़ान पूरी करनी होती है। ऐसे में पूरे बेड़े के सक्रिय होने से अधिक संख्या में छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।

विमानन क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा

DGCA की मंजूरी और रनवे विस्तार की योजना को देखते हुए जक्कूर फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल के भविष्य को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। संस्थान के दोबारा सक्रिय होने से न केवल पायलट प्रशिक्षण को गति मिलेगी, बल्कि राज्य में विमानन क्षेत्र के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश में हवाई यात्रा का विस्तार होने के साथ प्रशिक्षित पायलटों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकारी और कम लागत वाले प्रशिक्षण संस्थानों को मजबूत करना जरूरी है।

जक्कूर फ्लाइट ट्रेनिंग स्कूल के फिर से शुरू होने से उन युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे, जो आर्थिक कारणों से महंगे प्रशिक्षण संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते। DGCA की मंजूरी के बाद अब सभी की नजरें अगले महीने शुरू होने वाली प्रशिक्षण गतिविधियों पर टिकी हैं।

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