कर्नाटक

गृहलक्ष्मी योजना में 177 करोड़ की गड़बड़ी

Kavita2
2 Sept 2026 10:42 AM IST
गृहलक्ष्मी योजना में 177 करोड़ की गड़बड़ी
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बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने गृहलक्ष्मी योजना में गड़बड़ियों और वित्तीय लीकेज को रोकने के लिए बड़े स्तर पर लाभार्थियों के दोबारा सत्यापन की तैयारी की है। राज्यभर में अधिकारियों की टीमें घर-घर जाकर योजना के लाभार्थियों की जांच करेंगी। यह कदम उस जानकारी के सामने आने के बाद उठाया जा रहा है कि करीब 177 करोड़ रुपये ऐसे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा किए गए जिनकी मौत हो चुकी थी।

राज्य सरकार ने अब योजना के पात्र लाभार्थियों का रिकॉर्ड दुरुस्त करने और अपात्र नामों को हटाने के लिए व्यापक सत्यापन अभियान चलाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ चर्चा के बाद सरकार ने 31 अगस्त को गृहलक्ष्मी योजना के लाभार्थियों के पुनः सत्यापन को लेकर आदेश जारी किया।

घर-घर जाकर होगी लाभार्थियों की जांच

नई व्यवस्था के तहत सरकारी अधिकारी लाभार्थियों के घर जाकर उनकी पात्रता और मौजूदा स्थिति की जांच करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचे जो निर्धारित मानकों के तहत इसके पात्र हैं।

सत्यापन के दौरान लाभार्थियों से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सकता है। जिन मामलों में लाभार्थी की मृत्यु हो चुकी है या अन्य कारणों से पात्रता समाप्त हो गई है, उन्हें योजना की सक्रिय सूची से हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इस अभियान के जरिए सरकार लाभार्थियों का डेटाबेस अपडेट करना चाहती है ताकि भविष्य में सरकारी राशि गलत खातों में जमा होने की स्थिति को रोका जा सके।

मृत लाभार्थियों के खातों में पहुंचे 177 करोड़

गृहलक्ष्मी योजना के सत्यापन का फैसला उस समय महत्वपूर्ण हो गया जब यह सामने आया कि करीब 177 करोड़ रुपये ऐसे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा किए गए हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी थी।

इतनी बड़ी राशि के मृत लाभार्थियों के खातों में पहुंचने से योजना की निगरानी और लाभार्थियों के डेटाबेस को नियमित रूप से अपडेट करने की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

सरकार अब इस तरह के मामलों की पहचान कर वित्तीय लीकेज रोकने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। दोबारा सत्यापन के माध्यम से मृत, अपात्र या अन्य कारणों से योजना की शर्तें पूरी नहीं करने वाले लाभार्थियों को सूची से बाहर किया जा सकेगा।

छह सदस्यीय समितियां करेंगी सहयोग

राज्य गारंटी योजना कार्यान्वयन प्राधिकरण के अध्यक्ष एच.एम. रेवन्ना ने बताया कि लाभार्थियों के सत्यापन में सरकारी अधिकारियों की मदद के लिए ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर छह सदस्यीय समितियां बनाई जाएंगी।

ये समितियां स्थानीय स्तर पर लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर और शहरी क्षेत्रों में वार्ड स्तर पर समितियां काम करेंगी।

स्थानीय समितियों को शामिल करने से सत्यापन प्रक्रिया अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर रहने वाले लोगों की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाना अपेक्षाकृत आसान होता है।

31 अगस्त को जारी हुआ आदेश

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ इस मुद्दे पर चर्चा के बाद राज्य सरकार ने 31 अगस्त को गृहलक्ष्मी योजना के लाभार्थियों के पुनः सत्यापन से संबंधित आदेश जारी किया।

आदेश के बाद संबंधित विभागों को सत्यापन अभियान की तैयारी करने को कहा गया है। अब जिला, स्थानीय निकाय और पंचायत स्तर पर अधिकारियों को लाभार्थियों की सूची की जांच करनी होगी।

सरकार का लक्ष्य है कि योजना में मौजूद गलत प्रविष्टियों को हटाकर वास्तविक पात्र लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित की जाए।

गृहज्योति योजना की भी समीक्षा

गृहलक्ष्मी के साथ राज्य सरकार ने गृहज्योति योजना के लाभार्थियों की पात्रता की भी समीक्षा शुरू कर दी है। इसका उद्देश्य ऐसे लाभार्थियों की पहचान करना है जो योजना की शर्तों को पूरा नहीं करते लेकिन फिर भी लाभ ले रहे हैं।

गृहज्योति योजना के तहत पात्र परिवारों को बिजली से संबंधित राहत दी जाती है। ऐसे में अपात्र लाभार्थियों को योजना से हटाने पर सरकार का जोर है।

समीक्षा के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि योजना का लाभ वास्तव में पात्र परिवारों तक ही पहुंच रहा है या नहीं। रिकॉर्ड में किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर उसे सुधारने की कार्रवाई की जा सकती है।

गारंटी योजनाओं की निगरानी बढ़ाएगी सरकार

कर्नाटक सरकार की गारंटी योजनाएं राज्य की प्रमुख कल्याणकारी पहलों में शामिल हैं। इन योजनाओं पर बड़ी मात्रा में सरकारी धन खर्च होता है। ऐसे में लाभार्थियों की सही पहचान और धन के उचित वितरण को सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

सरकार का मानना है कि समय-समय पर सत्यापन और समीक्षा से योजनाओं में होने वाले लीकेज को कम किया जा सकता है। इससे सरकारी धन का बेहतर इस्तेमाल होने के साथ वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक लाभ पहुंचाना संभव होगा।

गृहलक्ष्मी योजना में मृत लाभार्थियों के खातों में 177 करोड़ रुपये पहुंचने का मामला सामने आने के बाद निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत और बढ़ गई है।

डेटा अपडेट करने पर रहेगा जोर

सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में लाभार्थियों के डेटा को नियमित रूप से अपडेट करना बड़ी चुनौती है। किसी लाभार्थी की मृत्यु, परिवार की आर्थिक स्थिति में बदलाव या पात्रता से जुड़ी अन्य परिस्थितियों में परिवर्तन होने के बाद भी यदि रिकॉर्ड अपडेट नहीं होता तो सरकारी राशि का भुगतान जारी रह सकता है।

घर-घर सत्यापन से सरकार को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। इसके आधार पर लाभार्थियों की सूची को संशोधित किया जाएगा।

स्थानीय समितियों की मदद से सरकार ऐसे मामलों को भी जल्दी पहचान सकेगी जहां सरकारी डेटाबेस और जमीनी स्थिति में अंतर है।

वास्तविक लाभार्थियों पर असर नहीं पड़ने पर जोर

सत्यापन अभियान का उद्देश्य पात्र लोगों का लाभ रोकना नहीं बल्कि अपात्र और गलत प्रविष्टियों को हटाना है। इसलिए प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा कि दस्तावेजों या तकनीकी कारणों से किसी वास्तविक पात्र लाभार्थी को योजना से बाहर न कर दिया जाए।

यदि सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड में अंतर मिलता है तो लाभार्थियों को अपनी पात्रता साबित करने का अवसर दिए जाने जैसी व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे गलत तरीके से नाम हटने की शिकायतों को कम किया जा सकेगा।

वित्तीय लीकेज रोकना बड़ी चुनौती

177 करोड़ रुपये मृत लाभार्थियों के खातों में जमा होने की जानकारी ने योजना में वित्तीय लीकेज का गंभीर मुद्दा सामने रखा है। अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि ऐसे भुगतानों को भविष्य में होने से कैसे रोका जाए।

इसके लिए विभिन्न सरकारी डेटाबेस के बीच बेहतर समन्वय और लाभार्थियों की स्थिति का नियमित अपडेट जरूरी होगा। मृत्यु पंजीकरण जैसे रिकॉर्ड को कल्याणकारी योजनाओं के डेटाबेस से समय पर जोड़ने से ऐसे मामलों की पहचान जल्दी की जा सकती है।

राज्यभर में चलेगा अभियान

गृहलक्ष्मी योजना का पुनः सत्यापन किसी एक जिले तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे कर्नाटक में किया जाएगा। ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर की समितियों के सहयोग से अधिकारी लाभार्थियों के घरों तक पहुंचेंगे।

इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद सरकार के पास लाभार्थियों का अधिक अपडेटेड रिकॉर्ड उपलब्ध होने की उम्मीद है। इसके आधार पर अपात्र नाम हटाए जा सकेंगे और योजनाओं पर होने वाले अनावश्यक खर्च को नियंत्रित किया जा सकेगा।

गृहलक्ष्मी के साथ गृहज्योति योजना की समीक्षा भी बताती है कि सरकार अपनी प्रमुख गारंटी योजनाओं में पात्रता और वित्तीय अनुशासन को लेकर निगरानी बढ़ा रही है। अब इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घर-घर सत्यापन कितनी पारदर्शिता और सटीकता के साथ किया जाता है।

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