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कर्नाटक में निकाय चुनावों पर बड़ा मंथन, SIR की नई मतदाता सूची पर फैसला टला

Kavita2
6 Nov 2026 11:01 AM IST
कर्नाटक में निकाय चुनावों पर बड़ा मंथन, SIR की नई मतदाता सूची पर फैसला टला
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बेंगलुरु। कर्नाटक में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मतदाता सूची के इस्तेमाल को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर विचार हुआ कि ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अंतर्गत आने वाले नगर निगमों तथा जिला और तालुक पंचायतों के चुनाव पुरानी मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं या विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद तैयार संशोधित सूची का उपयोग किया जाए। हालांकि, मंत्रिमंडल इस मुद्दे पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका। सरकार ने अन्य राज्यों की स्थिति का अध्ययन करने के बाद फैसला लेने का निर्णय किया है।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री ईश्वर बी. खंड्रे ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर मंत्रियों ने अपने विचार रखे हैं। उन्होंने बताया कि चुनावों में कौन-सी मतदाता सूची अपनाई जाए, इस पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।

खंड्रे ने स्पष्ट किया कि स्थानीय निकाय चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय मतपत्रों से कराने का निर्णय पहले ही लिया जा चुका है। सरकार इस फैसले पर दोबारा विचार नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि मतपेटियों की खरीद के लिए धनराशि आवंटित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है।

इस तरह मंत्रिमंडल की बैठक में दो अलग-अलग विषय सामने आए। पहला, मतदान के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रणाली और दूसरा, चुनाव में भाग लेने वाले मतदाताओं की सूची। मतदान प्रणाली के संबंध में सरकार की स्थिति स्पष्ट है, जबकि मतदाता सूची को लेकर विचार-विमर्श जारी है।

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित मतदाता सूची उपलब्ध हो चुकी है। कुछ मंत्रियों का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनावों में इसी नई सूची का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है।

दूसरी ओर, सरकार के सामने यह सवाल भी है कि संशोधित सूची को अपनाने से चुनावी तैयारियों और समयसीमा पर क्या प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय निकाय चुनावों के लिए मतदाता सूची को संबंधित वार्डों और निर्वाचन क्षेत्रों के अनुरूप तैयार करना आवश्यक होता है। इसलिए केवल नई सूची उपलब्ध होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका स्थानीय निर्वाचन क्षेत्रों के साथ सही मिलान भी जरूरी है।

मंत्रिमंडल में यह राय सामने आई कि अन्य राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद स्थानीय निकाय चुनावों के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, इसका अध्ययन किया जाना चाहिए। इसके आधार पर कर्नाटक सरकार अपनी आगामी रणनीति तय करेगी।

दरअसल, SIR को लेकर देश के कई राज्यों में राजनीतिक बहस चल रही है। मतदाता सूची से नाम हटने, नए नाम जोड़ने और दस्तावेजों के सत्यापन जैसे मुद्दों पर विभिन्न राजनीतिक दल सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए संशोधित सूची अपनाने का फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कर्नाटक में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने की जानकारी सामने आई थी। संशोधित सूची में मतदाताओं के विवरण और निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित जानकारी अद्यतन की गई है। हालांकि, मंत्रिमंडल के सामने यह भी प्रश्न है कि इस सूची का स्थानीय निकाय चुनावों में उपयोग करने के लिए और कौन-कौन सी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

ग्रेटर बेंगलुरु के नगर निगम चुनावों को लेकर यह मुद्दा विशेष महत्व रखता है। बेंगलुरु में स्थानीय निकाय चुनाव लंबे समय से लंबित हैं। शहर के प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद पांच नगर निगमों के लिए चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है।

इससे पहले कर्नाटक सरकार और संबंधित संस्थाओं ने चुनावों की समयसीमा बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सरकार ने तर्क दिया था कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण जारी रहने के दौरान चुनाव कराने से प्रशासनिक कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2026 में बेंगलुरु के नगर निगम चुनावों के लिए समयसीमा बढ़ाते हुए दिसंबर तक चुनाव कराने का निर्देश दिया था। अदालत ने इस बात का संज्ञान लिया था कि संशोधित मतदाता सूची नवंबर से पहले उपलब्ध होने की उम्मीद थी।

अब संशोधित सूची सामने आने के बाद सरकार के सामने उसके इस्तेमाल का सवाल खड़ा हो गया है। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों में पहले ही काफी समय लग चुका है।

जिला और तालुक पंचायत चुनावों की स्थिति भी ऐसी ही है। ग्रामीण स्थानीय निकायों के चुनाव लंबे समय से लंबित होने के कारण प्रशासनिक व्यवस्था और निर्वाचित प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे उठते रहे हैं। सरकार अब इन चुनावों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने पर जोर दे रही है।

ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री ईश्वर खंड्रे ने इससे पहले संकेत दिया था कि जिला और तालुक पंचायत चुनावों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। उन्होंने जनवरी 2027 तक चुनाव कराए जाने की संभावना भी जताई थी। हालांकि, चुनाव की आधिकारिक तारीख राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से ही घोषित की जाएगी।

स्थानीय निकाय चुनावों में मतदाता सूची की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। किसी व्यक्ति का नाम संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होना मतदान करने के लिए आवश्यक है। इसलिए सूची में किसी प्रकार की त्रुटि या नाम छूटने की स्थिति मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।

विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नाम दर्ज करना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान आपत्तियों, सत्यापन और नामों को हटाए जाने को लेकर विवाद भी उत्पन्न हो सकते हैं। यही वजह है कि सरकार संशोधित सूची के इस्तेमाल पर सावधानीपूर्वक निर्णय लेना चाहती है।

राज्य सरकार का अंतिम निर्णय राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियों के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। स्थानीय निकाय चुनाव कराने की संवैधानिक जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की है। सरकार की ओर से मतदाता सूची से संबंधित जो भी निर्णय या सिफारिश की जाएगी, उसे संबंधित कानूनी और निर्वाचन प्रक्रियाओं के अनुसार आगे बढ़ाना होगा।

बैलेट पेपर से मतदान कराने के निर्णय के कारण चुनावी व्यवस्थाओं में भी विशेष तैयारी की आवश्यकता होगी। मतपत्रों की छपाई, मतपेटियों की उपलब्धता, मतदान कर्मचारियों का प्रशिक्षण और मतगणना की व्यवस्था जैसे कार्य चुनाव संचालन का हिस्सा होंगे।

ईश्वर खंड्रे ने स्पष्ट किया कि बैलेट पेपर से चुनाव कराने के फैसले में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है। इसलिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण लंबित प्रश्न मतदाता सूची के चयन का है।

राजनीतिक दृष्टि से भी कर्नाटक के आगामी स्थानीय निकाय चुनाव महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन चुनावों के परिणाम शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के जनाधार का संकेत देंगे। विशेष रूप से बेंगलुरु के नगर निगम चुनावों पर सभी प्रमुख दलों की नजर बनी हुई है।

फिलहाल मंत्रिमंडल ने पुरानी और संशोधित मतदाता सूची के बीच किसी एक विकल्प को अंतिम मंजूरी नहीं दी है। अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के बाद इस मुद्दे पर आगे निर्णय लिया जाएगा।

कुल मिलाकर, कर्नाटक में स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से कराने का फैसला बरकरार है, लेकिन मतदान के लिए कौन-सी मतदाता सूची इस्तेमाल होगी, इस पर सरकार का निर्णय आना बाकी है। अब सभी की नजर अगली सरकारी घोषणा और राज्य निर्वाचन आयोग की चुनाव संबंधी तैयारियों पर रहेगी।

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