कर्नाटक

दिमागी नक्सल पार्टी नाम से Instagram अकाउंट वायरल, एक दिन में 1.6 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स

Kavita2
17 Aug 2026 11:26 AM IST
दिमागी नक्सल पार्टी नाम से Instagram अकाउंट वायरल, एक दिन में 1.6 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स
x

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल के बाद सोशल मीडिया पर इसी नाम से बना एक Instagram अकाउंट तेजी से चर्चा में आ गया है। ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम के इस अकाउंट ने बेहद कम समय में बड़ी संख्या में फॉलोअर्स जुटाए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक दिन के भीतर ही इसके फॉलोअर्स की संख्या 1.6 लाख से अधिक हो गई। हालांकि इस अकाउंट को कौन संचालित कर रहा है, इसे लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

Instagram पर उपलब्ध अकाउंट की जानकारी के मुताबिक इस पर 62 पोस्ट दिखाई दे रही हैं और यह करीब 35 अन्य अकाउंट्स को फॉलो कर रहा है। प्रोफाइल से जुड़ी जानकारी से संकेत मिलता है कि अकाउंट इसी महीने बनाया गया और इसका यूजरनेम एक बार बदला जा चुका है।

अकाउंट के एडमिन या इसे संचालित करने वाले व्यक्ति अथवा समूह की पहचान सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सोशल मीडिया पर इसके तेजी से बढ़ते फॉलोअर्स के साथ यह सवाल भी चर्चा में है कि आखिर इसे कौन चला रहा है और इसके पीछे उद्देश्य क्या है। अकाउंट के नाम ने खास तौर पर इसलिए ध्यान आकर्षित किया क्योंकि यह प्रधानमंत्री मोदी के हालिया संबोधन में इस्तेमाल किए गए शब्द से जुड़ा है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन के दौरान नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने सशस्त्र माओवादी गतिविधियों के खिलाफ मिली सफलताओं की चर्चा करते हुए वैचारिक स्तर पर मौजूद चुनौतियों की ओर इशारा किया था।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था कि सरकार जंगलों से हथियारबंद नक्सलियों को खत्म करने और देश को इस समस्या से मुक्त कराने में सफल रही है, लेकिन हथियारबंद नक्सलियों के कमजोर होने के बावजूद ‘दिमागी’ यानी बौद्धिक नक्सली आसपास मौजूद हैं। उनके इस बयान के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द राजनीतिक और सोशल मीडिया की बहस का हिस्सा बन गया।

प्रधानमंत्री के बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। समर्थकों की ओर से इसे माओवादी विचारधारा और उसके कथित बौद्धिक समर्थन के खिलाफ चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। वहीं आलोचकों ने सवाल उठाया है कि इस तरह की शब्दावली का दायरा क्या है और इसका इस्तेमाल किन लोगों के संदर्भ में किया जा रहा है।

इसी राजनीतिक बहस के बीच ‘दिमागी नक्सल पार्टी’ नाम का Instagram अकाउंट अचानक सामने आने और तेजी से लोकप्रिय होने से सोशल मीडिया पर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई। एक दिन में 1.6 लाख से अधिक फॉलोअर्स का दावा इस अकाउंट को चर्चा के केंद्र में ले आया है।

अकाउंट का इसी महीने बनाया जाना और यूजरनेम में पहले ही एक बदलाव होना भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। Instagram की प्रोफाइल संबंधी जानकारी से किसी अकाउंट के बनने का समय और पूर्व यूजरनेम बदलाव जैसी सीमित जानकारियां मिल सकती हैं, लेकिन इससे अकाउंट के वास्तविक संचालक की पहचान जरूरी नहीं कि सामने आए।

इसलिए फिलहाल यह कहना संभव नहीं है कि अकाउंट किसी व्यक्ति, राजनीतिक संगठन, व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया समूह या किसी अन्य इकाई द्वारा संचालित किया जा रहा है। जब तक संचालक की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती या स्वतंत्र रूप से उसकी पहचान की पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे किसी विशेष संगठन या विचारधारा से जोड़ना उचित नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर राजनीतिक बयानों के बाद उनसे जुड़े शब्दों, मीम्स, हैशटैग और नए अकाउंट्स का वायरल होना कोई नई बात नहीं है। राजनीतिक भाषणों में इस्तेमाल होने वाले आकर्षक या विवादास्पद शब्द अक्सर कुछ ही घंटों में डिजिटल चर्चा का हिस्सा बन जाते हैं। उपयोगकर्ता ऐसे शब्दों को व्यंग्य, समर्थन, आलोचना और राजनीतिक टिप्पणी के लिए इस्तेमाल करते हैं।

‘दिमागी नक्सल’ शब्द के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद इस शब्द पर राजनीतिक नेताओं, अभिनेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। अभिनेता प्रकाश राज ने भी इस शब्द पर आपत्ति जताते हुए सवाल किया था कि क्या सरकार से सवाल पूछने और असहमति जताने वाले लोगों के लिए ऐसी शब्दावली इस्तेमाल की जा रही है।

दूसरी तरफ प्रधानमंत्री के बयान का संदर्भ माओवादी हिंसा के खिलाफ सरकार की कार्रवाई और उसके कथित वैचारिक समर्थन से जुड़ा था। इस वजह से ‘दिमागी नक्सल’ की परिभाषा और उसके राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस और तेज हो गई है।

सोशल मीडिया पर बने नए अकाउंट की लोकप्रियता यह भी दिखाती है कि राजनीतिक विमर्श अब केवल संसद, राजनीतिक रैलियों या टेलीविजन बहसों तक सीमित नहीं है। Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक शब्दावली तेजी से मीम, वीडियो, पोस्ट और डिजिटल समुदायों का रूप ले सकती है।

हालांकि किसी नए और अज्ञात संचालक वाले सोशल मीडिया अकाउंट की सामग्री को लेकर सावधानी जरूरी है। बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होना किसी अकाउंट की आधिकारिकता या उसमें प्रकाशित सामग्री की सत्यता की गारंटी नहीं होता। अकाउंट के पीछे मौजूद व्यक्ति या समूह की पहचान स्पष्ट न होने पर वहां प्रकाशित दावों को स्वतंत्र रूप से जांचना महत्वपूर्ण हो जाता है।

‘दिमागी नक्सल पार्टी’ अकाउंट के मामले में भी फिलहाल सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल यही है कि इसे कौन संचालित कर रहा है। प्रोफाइल के नाम में ‘पार्टी’ शब्द मौजूद होने के बावजूद इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि इसका संबंध किसी पंजीकृत राजनीतिक दल से है।

फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन से निकला ‘दिमागी नक्सल’ शब्द राजनीतिक बहस से आगे बढ़कर सोशल मीडिया ट्रेंड का रूप लेता दिखाई दे रहा है। इसी नाम से बने Instagram अकाउंट का एक दिन में 1.6 लाख से अधिक फॉलोअर्स जुटाना इसकी तेजी से बढ़ी ऑनलाइन लोकप्रियता को दिखाता है। अब यह देखना होगा कि अकाउंट के संचालक की पहचान सामने आती है या नहीं और आने वाले दिनों में इसकी ऑनलाइन गतिविधियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं।

Next Story