
बेंगलुरु। कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (FSDA) ने आइसक्रीम बनाने वाली इकाइयों के खिलाफ विशेष निरीक्षण अभियान चलाया। गुरुवार शाम राज्यभर में 45 आइसक्रीम निर्माण इकाइयों की जांच की गई। इस दौरान उत्पादों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन की स्थिति का पता लगाने के लिए कुल 70 सैंपल एकत्र किए गए। विभाग ने इन नमूनों को जांच के लिए सरकारी खाद्य प्रयोगशाला भेज दिया है। निरीक्षण के दौरान बेंगलुरु, रायचूर और मैसूर की कुछ निर्माण इकाइयों में नियमों का उल्लंघन भी पाया गया।
इस अभियान का उद्देश्य आइसक्रीम निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता जांचना और यह सुनिश्चित करना था कि उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं या नहीं। जांच के दौरान तैयार आइसक्रीम के साथ-साथ उसमें इस्तेमाल होने वाली विभिन्न कच्ची सामग्रियों के नमूने भी लिए गए। अब सरकारी प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट के आधार पर उत्पादों की गुणवत्ता और नियमों के अनुपालन से संबंधित स्थिति स्पष्ट होगी।
45 निर्माण इकाइयों में की गई जांच
FSDA के खाद्य सुरक्षा प्रभाग ने गुरुवार शाम राज्यभर में आइसक्रीम बनाने वाली 45 इकाइयों का विशेष निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने निर्माण प्रक्रिया और इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता पर ध्यान दिया। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन की भी जांच की गई।
आइसक्रीम जैसे खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है। इसलिए विभाग ने निर्माण इकाइयों से नमूने एकत्र कर उनकी प्रयोगशाला में जांच कराने की प्रक्रिया शुरू की है।
निरीक्षण के दौरान कुछ इकाइयों में नियमों का उल्लंघन मिलने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, विभाग की ओर से उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन इकाइयों में किस प्रकार की अनियमितताएं पाई गईं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।
आइसक्रीम से लेकर कच्ची सामग्री तक के नमूने लिए
निरीक्षण के दौरान कुल 70 नमूने एकत्र किए गए। इनमें तैयार आइसक्रीम के अलावा दूध, मिल्क पाउडर, फ्लेवरिंग, चीनी, खाद्य योजक और आइसक्रीम बनाने में इस्तेमाल होने वाली अन्य कच्ची सामग्री शामिल है।
विभाग ने इन सभी नमूनों को जांच के लिए सरकारी खाद्य प्रयोगशाला भेजा है। प्रयोगशाला में जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि संबंधित उत्पाद और कच्ची सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरती हैं या नहीं।
तैयार उत्पादों के साथ कच्ची सामग्री की जांच करना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उत्पादन प्रक्रिया से भी प्रभावित होती है। ऐसे में नमूनों की जांच से निर्माण इकाइयों में खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन का आकलन करने में मदद मिलेगी।
बेंगलुरु, रायचूर और मैसूर की कुछ इकाइयों में उल्लंघन
FSDA के निरीक्षण अभियान के दौरान बेंगलुरु, रायचूर और मैसूर की कुछ आइसक्रीम निर्माण इकाइयों में नियमों का उल्लंघन पाया गया। विभाग ने इन इकाइयों में अनियमितताएं मिलने की पुष्टि की है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में उल्लंघन की प्रकृति, संबंधित इकाइयों की संख्या और उनके नामों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन इकाइयों में उत्पादन प्रक्रिया, साफ-सफाई, सामग्री के भंडारण या किसी अन्य खाद्य सुरक्षा संबंधी पहलू में गड़बड़ी मिली थी।
ऐसे मामलों में निरीक्षण के निष्कर्षों और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, 70 नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उत्पादों की गुणवत्ता से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आएगी।
प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
सरकारी खाद्य प्रयोगशाला में भेजे गए नमूनों की जांच इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन नमूनों के नतीजों से यह पता लगाया जा सकेगा कि आइसक्रीम और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं या नहीं।
यदि जांच में किसी उत्पाद या सामग्री में मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, वर्तमान में किसी नमूने के असुरक्षित या मानकों से बाहर पाए जाने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, क्योंकि प्रयोगशाला की रिपोर्ट अभी उपलब्ध नहीं है।
निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने और नमूनों को जांच के लिए भेजे जाने के बाद अब विभाग की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर
कर्नाटक में FSDA का यह विशेष निरीक्षण अभियान आइसक्रीम निर्माण इकाइयों की गुणवत्ता और नियमों के अनुपालन की जांच के लिए चलाया गया। राज्यभर की 45 इकाइयों से 70 नमूने एकत्र किए गए हैं। इनमें तैयार उत्पादों के साथ उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली कच्ची सामग्री भी शामिल है।
बेंगलुरु, रायचूर और मैसूर की कुछ इकाइयों में नियमों का उल्लंघन पाया गया है, जबकि नमूनों की जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है। रिपोर्ट के आधार पर उत्पादों की गुणवत्ता और संबंधित इकाइयों के खिलाफ आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल, खाद्य सुरक्षा विभाग ने नमूनों को सरकारी प्रयोगशाला भेजकर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि किन उत्पादों या निर्माण प्रक्रियाओं में सुधार की जरूरत है और किन मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।





