
बेंगलुरु : कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि उनका उद्देश्य मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वोयर परियोजना को लेकर तमिलनाडु के साथ जारी विवाद का समाधान निकालना है। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के साथ होने वाली बातचीत में वह सभी संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगे और दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक रास्ता तलाशने का प्रयास करेंगे।
चित्रदुर्ग में आयोजित बैंगलोर रीजनल डिवीजन लेवल डेवलपमेंट रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने मेकेदातु परियोजना को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस परियोजना का लाभ केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तमिलनाडु को भी इसका बड़ा फायदा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वोयर परियोजना से तमिलनाडु को करीब 80 प्रतिशत तक लाभ मिलेगा, जबकि कर्नाटक को लगभग 20 प्रतिशत लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद हैं, लेकिन बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जा सकता है।
शिवकुमार ने कहा कि मेकेदातु परियोजना का उद्देश्य मुख्य रूप से जल प्रबंधन, पेयजल उपलब्धता और सूखे की स्थिति से निपटने में मदद करना है। उन्होंने कहा कि बैठक में तमिलनाडु के साथ सूखे की स्थिति, पेयजल की जरूरत और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए बातचीत के जरिए आगे बढ़ना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि जिस तरह अन्य अंतरराज्यीय जल विवादों में समाधान की दिशा में काम किया गया है, उसी तरह मेकेदातु मुद्दे पर भी सकारात्मक परिणाम निकाला जा सकता है।
तुंगभद्रा जल विवाद का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल को होस्पेट में एक मंच पर लाकर तीनों राज्यों के किसानों के हित में समाधान निकालने का प्रयास किया था।
उन्होंने कहा कि जल से जुड़े विवादों का समाधान आपसी संवाद और सहयोग से ही संभव है। किसानों के हित सर्वोपरि हैं और सरकारों को मिलकर ऐसे फैसले लेने चाहिए, जिससे सभी पक्षों को फायदा मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि मेकेदातु परियोजना को लेकर भी इसी तरह बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि टकराव के बजाय सहयोग की भावना से आगे बढ़ने की जरूरत है।
बैठक के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में क्लाउड सीडिंग की मांग पर भी चर्चा हुई। कई क्षेत्रों से बारिश की कमी को देखते हुए कृत्रिम बारिश कराने की मांग उठ रही है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार इस संबंध में उचित निर्णय लेगी।
उन्होंने कहा कि किसी भी कदम को उठाने से पहले वैज्ञानिक आधार और विशेषज्ञों की राय जरूरी है। सरकार स्थिति का आकलन करने के बाद ही क्लाउड सीडिंग को लेकर फैसला करेगी।
कर्नाटक में इस समय बारिश की कमी और जल संकट को लेकर सरकार लगातार समीक्षा कर रही है। कई क्षेत्रों में किसानों को कम बारिश के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और अंतरराज्यीय सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मेकेदातु परियोजना लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद का विषय रही है। कर्नाटक इसे पेयजल आपूर्ति और जल भंडारण के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताता रहा है, जबकि तमिलनाडु ने कावेरी नदी के पानी के प्रवाह और अपने अधिकारों को लेकर आपत्ति जताई है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि बातचीत के माध्यम से सभी चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
आने वाली 3 अगस्त की बैठक को मेकेदातु विवाद के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री बातचीत के दौरान किस तरह की सहमति बनाने में सफल होते हैं।
कर्नाटक सरकार का कहना है कि यदि दोनों राज्यों के बीच सहयोग बढ़ता है तो इससे किसानों, आम लोगों और जल प्रबंधन व्यवस्था को लंबे समय में फायदा मिल सकता है।





