
Karnataka कर्नाटक: उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि भारत की आध्यात्मिक विरासत और प्राचीन सभ्यता का ज्ञान आज दुनिया को एक अधिक दयालु और जागरूक समाज की ओर प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन न केवल देश के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मानवता के लिए मार्गदर्शन का कार्य कर रहा है।
C.P. Radhakrishnan ने यह बात आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की 45वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कही। इस मौके पर उन्होंने Sri Sri Ravi Shankar के सामाजिक और आध्यात्मिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे दुनिया भर में शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज की दुनिया संघर्ष और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में जीवन को एक कला के रूप में अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम” का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की यह सोच आज के समय में और अधिक प्रासंगिक हो गई है।
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा हमेशा से ही मानवता, शांति और सह-अस्तित्व का संदेश देती आई है, और यही संदेश आज वैश्विक समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के कार्यों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह संगठन ध्यान (मेडिटेशन), शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। इनके प्रयासों ने समाज के विभिन्न वर्गों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का काम किया है।
उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मानसिक शांति और संतुलित जीवन शैली को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां आज के तनावपूर्ण जीवन में बेहद जरूरी हो गई हैं। ऐसे में योग, ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यास समाज को मानसिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत की सोच हमेशा से “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की रही है, जिसका उद्देश्य सभी के कल्याण की भावना को बढ़ावा देना है। यही विचार आज वैश्विक स्तर पर मानवता को जोड़ने का काम कर रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भी इस विचार को सकारात्मक बताया और कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराएं आधुनिक दुनिया की चुनौतियों का समाधान देने में सक्षम हैं।





