कर्नाटक
भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन हो रही तैयार, बेंगलुरु में निर्माण तेज
Ratna Netam
1 Nov 2026 8:13 PM IST

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बेंगलुरु। भारत की हाईस्पीड रेल परियोजना को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के लिए देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन बेंगलुरु स्थित भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) की निर्माण सुविधा में आकार ले रही है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत में हाईस्पीड रेल तकनीक के विकास, आधुनिक ट्रेन निर्माण और रेलवे क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।स्वदेशी बुलेट ट्रेन के निर्माण को भारतीय रेलवे की तकनीकी क्षमताओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश में ही आधुनिक ट्रेनसेट विकसित करने से विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने और स्थानीय उद्योगों को नए अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर भारत की प्रमुख रेल अवसंरचना परियोजनाओं में शामिल है। इस कॉरिडोर पर तेज रफ्तार, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेल सेवाएं विकसित की जा रही हैं।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया निर्माण कार्य का निरीक्षण
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को बेंगलुरु स्थित BEML के आदित्य मैन्युफैक्चरिंग परिसर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत की पहली स्वदेशी हाईस्पीड ट्रेन B28 के निर्माण कार्य की समीक्षा की। रेल मंत्री ने ट्रेन के विभिन्न हिस्सों के निर्माण, तकनीकी परीक्षण और यात्री सुविधाओं की तैयारियों का निरीक्षण किया।उन्होंने कोच के अंडरफ्रेम, साइडवॉल, छत और अंतिम असेंबली से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी ली। इसके साथ ही निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विशेष उपकरणों और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यवस्था की समीक्षा की।
280 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी अधिकतम परीक्षण गति
स्वदेशी बुलेट ट्रेन को B28 नाम दिया गया है। इसकी अधिकतम परीक्षण गति 280 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है, जबकि परिचालन गति लगभग 249 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।ट्रेन को भारतीय परिस्थितियों और यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है। इसमें आधुनिक तकनीक, सुरक्षा उपकरण और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने वाली प्रणालियां लगाई जाएंगी।B28 ट्रेन की कुल लंबाई लगभग 202 मीटर होगी। इसमें आठ कोच शामिल होंगे, जिनमें चार मोटर कार और चार ट्रेलर कार होंगी। आवश्यकता पड़ने पर आठ-आठ कोच वाले दो ट्रेनसेट जोड़कर 16 कोच की ट्रेन भी तैयार की जा सकेगी।
एक बार में 557 यात्री कर सकेंगे सफर
स्वदेशी बुलेट ट्रेन में लगभग 557 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। आठ कोच में से सात स्टैंडर्ड क्लास और एक एग्जीक्यूटिव क्लास का होगा।स्टैंडर्ड क्लास में 3×2 सीटिंग व्यवस्था रहेगी, जबकि एग्जीक्यूटिव क्लास में 2×2 सीटिंग व्यवस्था उपलब्ध होगी।ट्रेन में आरामदायक सीटें, बड़ी खिड़कियां, एलईडी लाइट, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, सामान रखने के लिए रैक और आधुनिक शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।यात्रियों को सफर के दौरान सूचना उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल डिस्प्ले, स्वचालित घोषणाएं और वाई-फाई आधारित इंफोटेनमेंट सिस्टम भी लगाया जाएगा।
दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष सुविधाएं
B28 ट्रेन के निर्माण में दिव्यांग यात्रियों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है। इसमें व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए विशेष स्थान, अनुकूल दरवाजे और शौचालय उपलब्ध होंगे।ट्रेन के फर्श को प्लेटफॉर्म की ऊंचाई के अनुरूप तैयार किया जाएगा, जिससे यात्रियों को चढ़ने और उतरने में सुविधा हो सके।दरवाजों में विशेष फुटस्टेप लगाए जाएंगे, जो प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच के अंतर को कम करने में मदद करेंगे। दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए ब्रेल लिपि में सूचना संकेत भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्क्वीज टेस्ट से परखी गई कोच की मजबूती
रेल मंत्री के निरीक्षण के दौरान ट्रेन के कोच की संरचनात्मक मजबूती जांचने के लिए स्क्वीज टेस्ट का प्रदर्शन किया गया।इस परीक्षण में कोच की बॉडी पर नियंत्रित दबाव और खिंचाव डालकर उसकी मजबूती, कठोरता और आकार में स्थिरता की जांच की जाती है।हाईस्पीड ट्रेन के लिए यह परीक्षण महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेज रफ्तार पर परिचालन के दौरान संरचनात्मक सुरक्षा के कड़े मानकों को पूरा करना आवश्यक होता है।हालांकि, यह परीक्षण ट्रेन को निर्धारित अधिकतम गति पर चलाकर किया जाने वाला ट्रायल नहीं है। वास्तविक ट्रैक परीक्षण और अन्य सुरक्षा स्वीकृतियां अलग प्रक्रियाओं के तहत पूरी की जाएंगी।
ऊर्जा बचाने वाली आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
B28 ट्रेन में 25 किलोवोल्ट एसी ट्रैक्शन प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक भी होगी, जो ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न ऊर्जा के एक हिस्से को दोबारा उपयोगी विद्युत ऊर्जा में बदलने में मदद करती है।ट्रेन की बाहरी बनावट को वायुगतिकीय तकनीक के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य तेज गति के दौरान हवा का प्रतिरोध कम करना, सुरंगों में दबाव के प्रभाव को नियंत्रित करना और यात्रियों को आरामदायक सफर उपलब्ध कराना है।
866.87 करोड़ रुपये का मिला है अनुबंध
BEML और मेधा सर्वो ड्राइव्स के संयुक्त समूह को चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री से दो स्वदेशी हाईस्पीड ट्रेनसेट के डिजाइन, निर्माण और कमीशनिंग का अनुबंध मिला है।इस अनुबंध का कुल मूल्य लगभग 866.87 करोड़ रुपये है। इसमें ट्रेन के डिजाइन, विकास, निर्माण उपकरण और परीक्षण सुविधाओं से संबंधित लागत शामिल है।कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2027 की शुरुआत में पहला प्रोटोटाइप ट्रेनसेट तैयार करना है। इसके बाद निर्धारित मानकों के अनुसार तकनीकी जांच और ट्रैक परीक्षण किए जाएंगे।
508 किलोमीटर लंबा है मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर
मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग 508 किलोमीटर है। इस मार्ग पर 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं।परियोजना के पहले चरण में गुजरात के सूरत और वापी के बीच लगभग 97 किलोमीटर लंबे हिस्से पर बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे की योजना के अनुसार, इस प्राथमिक खंड पर अगस्त 2027 तक परिचालन शुरू करने का लक्ष्य है।हालांकि, वास्तविक परिचालन शुरू होने की तारीख निर्माण कार्य, परीक्षण और आवश्यक सुरक्षा मंजूरियों पर निर्भर करेगी।
मेक इन इंडिया को मिलेगी नई मजबूती
भारत में स्वदेशी बुलेट ट्रेन का निर्माण रेलवे क्षेत्र में मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।इस परियोजना से देश में हाईस्पीड ट्रेन निर्माण से जुड़ी तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करने, स्थानीय उद्योगों को अवसर देने और भविष्य की रेल परियोजनाओं के लिए स्वदेशी क्षमता तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।बेंगलुरु में B28 ट्रेन का निर्माण आगे बढ़ने के साथ भारत आधुनिक हाईस्पीड रेल तकनीक विकसित करने की दिशा में एक और कदम बढ़ा रहा है। आने वाले समय में इसके प्रोटोटाइप, ट्रायल रन और सुरक्षा परीक्षणों पर विशेष नजर रहेगी।
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