
बेंगलुरु। भारत की पहली स्वदेशी हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। देश में तैयार की जा रही 'भारत 28' (B28) बुलेट ट्रेन का निर्माण बेंगलुरु स्थित भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) के आदित्य मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को निर्माण इकाई का दौरा कर ट्रेन की प्रगति का जायजा लिया और महत्वपूर्ण स्क्वीज टेस्ट का निरीक्षण किया। यह ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए तैयार की जा रही है। इस परियोजना के जरिए भारत हाई-स्पीड रेल तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, B28 ट्रेन का डिजाइन स्वदेशी रूप से विकसित किया जा रहा है। इसके निर्माण में अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहली ट्रेन के प्रोटोटाइप को तैयार करने की दिशा में कई तकनीकी परीक्षण किए जा रहे हैं।
क्या होता है बुलेट ट्रेन का स्क्वीज टेस्ट?
स्क्वीज टेस्ट किसी भी हाई-स्पीड ट्रेन के निर्माण में महत्वपूर्ण सुरक्षा और गुणवत्ता परीक्षण होता है। इसमें ट्रेन के कोच के बाहरी ढांचे यानी कार बॉडी पर नियंत्रित दबाव और खिंचाव लगाया जाता है। इसका उद्देश्य यह जांचना होता है कि अत्यधिक दबाव की स्थिति में कोच की संरचना कितनी मजबूत रहती है और उसमें कोई विकृति या दरार तो नहीं आती।
तेज गति से चलने वाली ट्रेन के आसपास हवा के दबाव में काफी बदलाव होता है। ट्रेन की गति बढ़ने पर उसके बाहरी ढांचे पर अलग-अलग प्रकार के दबाव पड़ते हैं। ऐसे में कोच की मजबूती और उसकी संरचनात्मक स्थिरता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होता है।
स्क्वीज टेस्ट से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि कोच निर्धारित दबाव सहन कर सकता है या नहीं। यह परीक्षण यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन की लंबी अवधि की विश्वसनीयता के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
टेस्ट अभी अंतिम चरण में, अगले सप्ताह पूरा होने की उम्मीद
रेलवे मंत्री ने बेंगलुरु में निर्माण इकाई के निरीक्षण के दौरान कोच की संरचना और स्क्वीज टेस्ट की प्रक्रिया का जायजा लिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पहला कोच इस परीक्षण के अंतिम चरण में है और इसे अगले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
परीक्षण पूरा होने के बाद ट्रेन में प्रोपल्शन सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को स्थापित किया जाएगा। इसके बाद ट्रेन को अलग-अलग मौसम और पर्यावरणीय परिस्थितियों में परखा जाएगा। इसमें 50 डिग्री सेल्सियस तक के उच्च तापमान, बेहद कम तापमान, धूल और तेज बारिश जैसी परिस्थितियों में परीक्षण शामिल होंगे।
280 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड
भारत की स्वदेशी B28 बुलेट ट्रेन को 280 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। इसकी प्रस्तावित परिचालन गति लगभग 250 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। परीक्षण के दौरान इसकी गति 275 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले जाने की योजना है।
इस ट्रेन में शुरुआत में आठ कोच होंगे। जरूरत पड़ने पर इसमें अतिरिक्त आठ कोच और जोड़े जा सकेंगे। आठ कोच वाले एक ट्रेनसेट में लगभग 557 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी।
ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक सीटें, एयर कंडीशनिंग, बेहतर सस्पेंशन और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाए जा रहे हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने निरीक्षण के दौरान सीटों, HVAC सिस्टम, कपलर और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों की भी जानकारी ली।
BEML और Medha Servo Drives मिलकर कर रहे निर्माण
B28 बुलेट ट्रेन के निर्माण की जिम्मेदारी BEML और Medha Servo Drives के कंसोर्टियम को दी गई है। इस परियोजना के लिए इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), चेन्नई ने 866.87 करोड़ रुपये का अनुबंध दिया है।
इस समझौते के तहत दो स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेट तैयार किए जा रहे हैं। दोनों ट्रेनसेट में आठ-आठ कोच होंगे। इसका उद्देश्य जापानी शिंकानसेन तकनीक पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय भारत में अपनी हाई-स्पीड ट्रेन निर्माण क्षमता विकसित करना है।
BEML के बेंगलुरु स्थित आदित्य रेल कॉम्प्लेक्स में कोच की बॉडी, छत, साइड वॉल और अंडरफ्रेम जैसे हिस्सों का निर्माण किया जा रहा है। सटीक माप और मजबूत संरचना सुनिश्चित करने के लिए विशेष जिग्स और फिक्स्चर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर दौड़ेगी B28
भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन को मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए तैयार किया जा रहा है। यह कॉरिडोर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है और इसमें 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
रेलवे की योजना के अनुसार, शुरुआती परीक्षणों के बाद ट्रेन को सूरत-वापी के लगभग 97 से 100 किलोमीटर लंबे हिस्से पर चलाया जा सकता है। इसके लिए 2027 में परीक्षण परिचालन शुरू करने और अगस्त 2027 में इस हिस्से पर सेवा शुरू करने का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि, वास्तविक शुरुआत परीक्षण और सुरक्षा संबंधी मंजूरियों पर निर्भर करेगी।
बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के शुरू होने से मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय कम करने में मदद मिलेगी। इस परियोजना को देश की परिवहन व्यवस्था में आधुनिक हाई-स्पीड रेल तकनीक की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
जापान की शिंकानसेन से कम हो सकती है लागत
भारत की स्वदेशी B28 बुलेट ट्रेन को लेकर एक महत्वपूर्ण दावा इसकी निर्माण लागत से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत में विकसित की जा रही यह ट्रेन जापान की शिंकानसेन ट्रेनों की तुलना में कम लागत में तैयार हो सकती है।
दरअसल, जापान से हाई-स्पीड ट्रेनसेट आयात करने के मुकाबले भारत में डिजाइन और निर्माण क्षमता विकसित करने से दीर्घकाल में लागत और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, B28 और जापानी शिंकानसेन की पूरी लागत की आधिकारिक तुलनात्मक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसलिए वास्तविक लागत में कितनी बचत होगी, इसका आकलन विस्तृत परियोजना आंकड़ों के बाद ही किया जा सकेगा।
आगे B35 ट्रेनसेट विकसित करने की भी योजना
भारतीय रेलवे की योजना भविष्य में इससे भी अधिक गति वाली स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेन विकसित करने की है। B28 के बाद B35 ट्रेनसेट पर काम करने की योजना बताई गई है, जिसकी डिजाइन गति 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक रखने का लक्ष्य है। इसे वर्ष 2030 तक विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना बताई गई है।
भविष्य में दिल्ली-वाराणसी और हैदराबाद-चेन्नई जैसे संभावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए भी ऐसी तकनीक उपयोगी हो सकती है।
भारत के रेल नेटवर्क के लिए क्यों महत्वपूर्ण है B28?
भारत में अब तक हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए विदेशी तकनीक और विशेषज्ञता पर काफी निर्भरता रही है। लेकिन B28 के निर्माण से देश में हाई-स्पीड ट्रेन के डिजाइन, उत्पादन, परीक्षण और रखरखाव की क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है।
इससे घरेलू उद्योगों को भी फायदा होगा। ट्रेन के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और अन्य तकनीकी हिस्सों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सकता है।
फिलहाल बेंगलुरु के BEML कारखाने में B28 का निर्माण और परीक्षण कार्य आगे बढ़ रहा है। स्क्वीज टेस्ट अपने अंतिम चरण में है। इसके बाद प्रोपल्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मौसम संबंधी परीक्षण किए जाएंगे। अगर सभी परीक्षण और सुरक्षा मंजूरियां निर्धारित योजना के अनुसार पूरी होती हैं, तो भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन 2027 में ट्रायल रन की दिशा में आगे बढ़ सकती है।





