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कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में SIR ड्यूटी का असर, शिक्षक चुनावी काम में व्यस्त

Kavita2
20 Aug 2026 3:50 PM IST
कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में SIR ड्यूटी का असर, शिक्षक चुनावी काम में व्यस्त
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बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु समेत राज्य के कई हिस्सों में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ने की शिकायत सामने आई है। शिक्षकों का एक वर्ग स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की जिम्मेदारियों में अब भी लगा हुआ है। बताया जा रहा है कि 17 अगस्त की तय समय-सीमा बीतने के बाद भी कई शिक्षक चुनाव संबंधी कार्यों में व्यस्त हैं।

स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता कम होने से नियमित कक्षाएं प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। कई स्कूलों में शिक्षकों को अपने निर्धारित विषय के बजाय दूसरे विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं। कुछ जगहों पर प्रधानाध्यापकों को भी कक्षाएं संभालनी पड़ रही हैं।

दो महीने से शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी

शिक्षकों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले करीब दो महीनों से SIR संबंधी कार्यों का असर स्कूलों के नियमित शैक्षणिक कामकाज पर पड़ा है। BLO की जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षकों को मतदाता सूची से जुड़े कामों के लिए स्कूल से बाहर जाना पड़ता है। इसका सीधा असर उनकी कक्षाओं पर पड़ रहा है।

कई स्कूलों में स्थिति ऐसी बन रही है कि किसी विषय के नियमित शिक्षक के उपलब्ध नहीं होने पर दूसरे शिक्षक को वह कक्षा लेनी पड़ती है। इससे शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ रहा है और विद्यार्थियों को भी नियमित शिक्षण व्यवस्था का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

शिक्षकों का कहना है कि उन्हें अपने निर्धारित विषयों के अलावा दूसरे विषय पढ़ाने पड़ रहे हैं। इससे पढ़ाई की निरंतरता प्रभावित होती है और पाठ्यक्रम पूरा करने को लेकर भी चिंता बढ़ती है।

हेडमास्टर को भी संभालनी पड़ रही कक्षाएं

शिक्षकों की कमी का असर स्कूल प्रशासन पर भी दिखाई दे रहा है। कुछ स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण प्रधानाध्यापकों को स्वयं कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं।

प्रधानाध्यापक सामान्य तौर पर स्कूल के प्रशासनिक कामकाज, शिक्षकों की निगरानी और विद्यार्थियों से संबंधित अन्य जिम्मेदारियां संभालते हैं। ऐसे में उन्हें नियमित कक्षाएं लेने के लिए भी समय निकालना पड़ रहा है।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि शिक्षक लंबे समय तक गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों में व्यस्त रहते हैं तो इसका असर विशेष रूप से उन विद्यार्थियों पर पड़ सकता है, जिन्हें नियमित और अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता की आवश्यकता होती है।

पहले से मौजूद छात्र-शिक्षक अनुपात की समस्या

कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यदि उपलब्ध शिक्षकों में से एक वर्ग को लंबे समय तक चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों में लगाया जाता है तो स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक उपलब्धता और कम हो जाती है।

शिक्षकों के SIR कार्य में व्यस्त रहने से कई स्कूलों में मौजूदा स्टाफ को अतिरिक्त कक्षाएं संभालनी पड़ रही हैं। इससे एक शिक्षक पर विद्यार्थियों की संख्या बढ़ सकती है और व्यक्तिगत ध्यान देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

शिक्षकों का कहना है कि चुनाव संबंधी कार्य महत्वपूर्ण है, लेकिन लंबे समय तक शिक्षकों को स्कूल से बाहर रखने से शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

मार्च में शुरू हुई थी BLO की ड्यूटी

SIR प्रक्रिया के तहत BLO की जिम्मेदारी में सरकारी स्कूलों के कुछ शिक्षक और आंगनवाड़ी शिक्षक भी शामिल किए गए थे। यह प्रक्रिया मार्च में शुरू हुई थी। प्रारंभिक योजना के अनुसार BLO का काम करीब एक महीने में पूरा किया जाना था।

हालांकि प्रक्रिया की समय-सीमा को दो बार बढ़ाया गया। इसके चलते BLO के रूप में नियुक्त शिक्षकों की ड्यूटी भी आगे बढ़ती चली गई। उन्हें 17 अगस्त तक विस्तारित अवधि में काम करना पड़ा।

शिक्षकों से जुड़े लोगों का कहना है कि शुरुआत में यह कार्य सीमित अवधि के लिए माना जा रहा था, लेकिन समय-सीमा बढ़ने के कारण इसका असर स्कूलों के नियमित शैक्षणिक काम पर ज्यादा लंबे समय तक पड़ा।

22 अक्टूबर तक चलेगा अंतिम चरण

SIR प्रक्रिया में क्लेम और ऑब्जेक्शन का अंतिम चरण 22 अक्टूबर तक चलने की जानकारी दी गई है। इसका मतलब यह है कि BLO की भूमिका पूरी तरह समाप्त होने में अभी समय लग सकता है।

हालांकि, चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने यह स्पष्ट किया है कि सभी BLO शिक्षक नहीं हैं। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी BLO के कारण स्कूलों में शिक्षकों की कमी है।

अधिकारी के इस स्पष्टीकरण के बावजूद शिक्षकों का कहना है कि जिन स्कूल शिक्षकों को BLO की जिम्मेदारी दी गई है, उनके नियमित शैक्षणिक कार्य पर इसका प्रभाव पड़ रहा है।

पढ़ाई और चुनावी जिम्मेदारी के बीच संतुलन की जरूरत

चुनावी प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और BLO मतदाता सूची से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। वहीं सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना भी है।

ऐसे में शिक्षकों को लंबे समय तक गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने को लेकर संतुलन की जरूरत महसूस की जा रही है। शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि जहां संभव हो, चुनावी कार्यों के लिए वैकल्पिक मानव संसाधन की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि स्कूलों में पढ़ाई बाधित न हो।

सरकार और विभाग के सामने चुनौती

SIR प्रक्रिया के अंतिम चरण तक BLO की सक्रिय भूमिका जारी रहने की संभावना के बीच शिक्षा विभाग के सामने स्कूलों की नियमित पढ़ाई को सुचारु रखने की चुनौती है। विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनावी जिम्मेदारियों और शैक्षणिक गतिविधियों के बीच ऐसा संतुलन बनाया जाए, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

फिलहाल बेंगलुरु समेत राज्य के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षक कम पड़ने और अतिरिक्त कक्षाओं का बोझ बढ़ने की शिकायत सामने आ रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SIR की प्रक्रिया पूरी होने तक स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित की जाती है और विद्यार्थियों की पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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