कर्नाटक

स्मार्ट मीटर योजना पर सरकारी बकाये का असर

Kavita2
25 July 2026 12:08 PM IST
स्मार्ट मीटर योजना पर सरकारी बकाये का असर
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कर्नाटक : राज्य में रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत स्मार्ट मीटर लगाने की योजना शुरू हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इसका पूरा लाभ अभी तक उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाया है। नए बिजली कनेक्शन लेने वाले ग्राहकों को अब भी स्मार्ट मीटर के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इसकी बड़ी वजह बिजली आपूर्ति कंपनियों (Eskom) पर सरकारी विभागों का भारी-भरकम बकाया है।

ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्मार्ट मीटर परियोजना के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाली सब्सिडी की प्रक्रिया कई शर्तों पर आधारित है। इनमें सबसे प्रमुख शर्त यह है कि राज्य के सरकारी विभागों पर बिजली वितरण कंपनियों का कोई बड़ा बकाया नहीं होना चाहिए। लेकिन वर्तमान स्थिति में राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों पर Eskom का बकाया 12,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। इस कारण स्मार्ट मीटर योजना को मिलने वाली वित्तीय सहायता प्रभावित हो रही है।

सरकारी विभागों का बकाया बना सबसे बड़ी बाधा

अधिकारी के मुताबिक, बिजली कंपनियों के लिए सरकारी विभागों से लंबित भुगतान एक गंभीर समस्या बन गया है। लंबे समय से बिजली बिलों का भुगतान नहीं होने के कारण कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर नई योजनाओं और उपभोक्ता सुविधाओं पर पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि अकेले ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग पर करीब 7,000 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। यह राशि राज्य के कुल सरकारी बकाये का लगभग 50 प्रतिशत है। इसके अलावा कई अन्य सरकारी विभागों पर भी करोड़ों रुपये की राशि लंबित है।

ऊर्जा विभाग का मानना है कि यदि सरकारी विभाग अपने लंबित बिजली बिलों का भुगतान समय पर कर दें, तो बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी और स्मार्ट मीटर परियोजना को तेजी से लागू किया जा सकेगा।

RDSS के तहत आधुनिक बिजली व्यवस्था का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार और बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के उद्देश्य से रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) शुरू की है। इस योजना के तहत देशभर में स्मार्ट मीटर लगाने, बिजली चोरी रोकने, लाइन लॉस कम करने और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

स्मार्ट मीटर पारंपरिक बिजली मीटर से अलग होते हैं। इनमें बिजली खपत की जानकारी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होती है और बिजली कंपनियों को भी उपभोक्ता उपयोग का रियल टाइम डेटा मिल सकता है। इससे बिलिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने और बिजली वितरण प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिलती है।

राज्य में भी इसी उद्देश्य से स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, वित्तीय चुनौतियों के कारण इसकी गति प्रभावित हो रही है।

नए उपभोक्ताओं पर बढ़ रहा खर्च

स्मार्ट मीटर योजना का उद्देश्य उपभोक्ताओं को आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन मौजूदा स्थिति में नए बिजली कनेक्शन लेने वाले ग्राहकों को मीटर खरीदने के लिए अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ रही है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि जब स्मार्ट मीटर सरकार की योजना के तहत लगाए जा रहे हैं, तो इसकी लागत का बोझ नए ग्राहकों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी और सुविधाओं का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।

ग्राहकों का यह भी कहना है कि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए शुरू की गई योजना में आम लोगों को राहत मिलनी चाहिए, ताकि स्मार्ट मीटर वास्तव में सुविधा का माध्यम बन सके।

बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति पर दबाव

बिजली वितरण कंपनियों की आय का मुख्य स्रोत उपभोक्ताओं से मिलने वाला भुगतान है। जब बड़े सरकारी विभागों की ओर से हजारों करोड़ रुपये का भुगतान लंबित रहता है, तो कंपनियों के लिए अपने संचालन और नई परियोजनाओं पर खर्च करना मुश्किल हो जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली क्षेत्र में सुधार के लिए केवल तकनीकी बदलाव पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि वित्तीय अनुशासन भी जरूरी है। सरकारी विभागों सहित सभी उपभोक्ताओं को समय पर बिजली बिल का भुगतान करना होगा, तभी वितरण व्यवस्था मजबूत हो सकेगी।

बकाया भुगतान से मिल सकती है योजना को गति

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि सरकारी विभागों से लंबित बकाये की वसूली होने पर स्मार्ट मीटर परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता और सब्सिडी का लाभ भी मिल सकता है।

फिलहाल राज्य में स्मार्ट मीटर योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकारी विभागों का लंबित बिजली बिल है। एक ओर सरकार डिजिटल और आधुनिक बिजली व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है, वहीं दूसरी ओर बिजली कंपनियां वित्तीय दबाव से जूझ रही हैं। आने वाले समय में बकाया भुगतान और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर ही निर्भर करेगा कि स्मार्ट मीटर का लाभ आम उपभोक्ताओं तक कितनी तेजी से पहुंच पाता है।

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