
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के डोड्डाकन्नाहल्ली इलाके में एक बिना लाइसेंस संचालित वेटेरिनरी सेंटर में जानवरों के साथ कथित क्रूरता का मामला सामने आया है। जांच के दौरान जानवरों के साथ कथित अमानवीय व्यवहार और नियमों की अनदेखी से जुड़े सबूत मिलने के बाद बेंगलुरु पुलिस ने दो डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कार्रवाई के बाद पशु चिकित्सा केंद्रों में नियमों के पालन और जानवरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मामले की शुरुआत उस समय हुई जब GBA ईस्ट जोन के पशुपालन विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. रुद्रेश कुमार K.L. को जानकारी मिली कि डोड्डाकन्नाहल्ली क्षेत्र में एक वेटेरिनरी सेंटर में जानवरों को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से पकड़कर लाया जा रहा है। आरोप था कि इलाज के नाम पर जानवरों के साथ अत्यधिक क्रूरता की जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मामले की जांच शुरू की।
शाम से देर रात तक चला निरीक्षण
प्राप्त शिकायत और सूचना के आधार पर संयुक्त निरीक्षण टीमों ने गियर स्कूल रोड स्थित प्राइम केयर वेटेरिनरी हॉस्पिटल में छापेमारी की। कार्रवाई शाम करीब छह बजे शुरू हुई और रात 11 बजे तक चली। इस दौरान अधिकारियों ने अस्पताल के विभिन्न हिस्सों की जांच की और वहां मौजूद व्यवस्थाओं तथा जानवरों के इलाज से संबंधित प्रक्रियाओं का निरीक्षण किया।
जांच टीम ने सेंटर के लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेजों की भी पड़ताल की। अधिकारियों के सामने यह आरोप था कि सेंटर आवश्यक अनुमति के बिना संचालित किया जा रहा था। इसके साथ ही जानवरों को किस तरह सेंटर तक लाया जाता था और उनके उपचार के दौरान कौन सी प्रक्रियाएं अपनाई जाती थीं, इसकी भी जांच की गई।
गैर-कानूनी तरीके से जानवरों को लाने का आरोप
अधिकारियों को मिली जानकारी में आरोप लगाया गया था कि सेंटर में जानवरों को गैर-कानूनी तरीके से पकड़कर लाया जाता था। इसके बाद उनका इलाज किया जाता था। हालांकि, इलाज की प्रक्रिया के दौरान जानवरों के साथ कथित तौर पर बेहद क्रूर व्यवहार किए जाने की बात भी सामने आई।
संयुक्त निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कथित अनियमितताओं से जुड़े सबूत जुटाए। इन सबूतों और शुरुआती जांच के आधार पर पुलिस ने दो डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सेंटर का संचालन किस प्रकार किया जा रहा था और वहां जानवरों के इलाज से जुड़े नियमों का कितना पालन किया जा रहा था।
लाइसेंस और दस्तावेजों की जांच
किसी भी वेटेरिनरी सेंटर के संचालन के लिए निर्धारित नियमों और आवश्यक अनुमतियों का पालन करना जरूरी होता है। पशु चिकित्सा केंद्रों में इलाज के साथ-साथ पशुओं की सुरक्षा, स्वच्छता और मानवीय व्यवहार से जुड़े प्रावधानों का भी पालन किया जाना चाहिए।
डोड्डाकन्नाहल्ली स्थित सेंटर को लेकर सामने आई शिकायत के बाद जांच टीम ने इन पहलुओं को भी जांच के दायरे में रखा। अधिकारियों ने सेंटर के लाइसेंस, दस्तावेजों और वहां संचालित गतिविधियों की जानकारी जुटाई। बिना लाइसेंस संचालन की पुष्टि और जानवरों के साथ क्रूरता के आरोपों को लेकर आगे की जांच की जा रही है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
छापेमारी और निरीक्षण के बाद बेंगलुरु पुलिस ने दो डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अब मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों के सामने यह पता लगाना भी अहम है कि सेंटर में कितने समय से गतिविधियां संचालित हो रही थीं और वहां इलाज के लिए लाए जाने वाले जानवरों की स्थिति क्या थी।
पुलिस और पशुपालन विभाग की जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों की कोशिश यह पता लगाने की भी होगी कि कथित तौर पर जानवरों को किस माध्यम से सेंटर तक लाया जाता था और उनके इलाज के दौरान किन प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता था।
पशु क्रूरता पर सख्ती का संकेत
इस कार्रवाई को बेंगलुरु में पशु चिकित्सा सेवाओं की निगरानी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिना लाइसेंस किसी वेटेरिनरी सेंटर का संचालन और जानवरों के साथ कथित क्रूर व्यवहार गंभीर आरोप हैं। ऐसे मामलों में नियमों के उल्लंघन के साथ पशुओं की सुरक्षा भी सीधे प्रभावित होती है।
डोड्डाकन्नाहल्ली की घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि शहर में संचालित निजी वेटेरिनरी सेंटरों की नियमित जांच कितनी प्रभावी है। पशु मालिक अपने पालतू या घायल जानवरों को इलाज के लिए अस्पतालों और क्लीनिकों में ले जाते हैं। ऐसे में इन केंद्रों की वैधता और वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की निगरानी बेहद जरूरी हो जाती है।
फिलहाल पुलिस ने दोनों डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शाम छह बजे से रात 11 बजे तक चले संयुक्त निरीक्षण में अधिकारियों ने सेंटर से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की। जांच पूरी होने के बाद ही कथित क्रूरता, बिना लाइसेंस संचालन और जानवरों को गैर-कानूनी तरीके से लाए जाने के आरोपों की पूरी तस्वीर सामने आएगी। मामले ने शहर में पशु कल्याण और वेटेरिनरी केंद्रों की निगरानी को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है।





