कर्नाटक

IIT ग्रेजुएट स्नेहा प्रिया ने ज्यादा सैलरी ऑफर ठुकराया, बेंगलुरु को चुना अपना घर जैसा शहर

Kavita2
3 July 2026 12:07 PM IST
IIT ग्रेजुएट स्नेहा प्रिया ने ज्यादा सैलरी ऑफर ठुकराया, बेंगलुरु को चुना अपना घर जैसा शहर
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Karnataka कर्नाटक: 25 साल की उम्र में जहां ज्यादातर युवा आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर में अधिक सैलरी वाली नौकरी की ओर भागते हैं, वहीं IIT ग्रेजुएट और डेटा साइंटिस्ट स्नेहा प्रिया ने एक अलग फैसला लिया है। उन्होंने ज्यादा सैलरी वाली नौकरी का ऑफर ठुकराकर बेंगलुरु में रहने का विकल्प चुना है।

स्नेहा प्रिया ने बताया कि उन्होंने गुड़गांव जैसे बड़े कॉर्पोरेट हब की बजाय बेंगलुरु को इसलिए चुना क्योंकि यह शहर उन्हें सुरक्षित और अपने घर जैसा महसूस कराता है। उन्होंने कहा, “बेंगलुरु मुझे सुरक्षित महसूस कराता है। यह मेरे घर जैसा लगता है। आप कितने भी पैसे दें, आप वह एहसास नहीं खरीद सकते।”

स्नेहा प्रिया ने 2023 में IIT राउरकेला से कंप्यूटर साइंस में B.Tech की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अपनी पहली नौकरी के लिए बेंगलुरु का रुख किया। शुरुआती दिनों में ही उन्हें इस शहर से गहरा जुड़ाव महसूस होने लगा और वह यहां के माहौल को पसंद करने लगीं।

उन्होंने बताया कि बेंगलुरु में लोगों का व्यवहार और शहर का वातावरण उन्हें बहुत अच्छा लगा। उनके अनुसार यहां समय बिताने और व्यक्तिगत विकास के कई अवसर मौजूद हैं। यही कारण रहा कि उन्होंने इस शहर में लंबे समय तक रहने का निर्णय लिया।

हालांकि, स्नेहा प्रिया ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी पहली नौकरी का अनुभव उतना अच्छा नहीं रहा। कॉलेज जीवन के चार साल उन्होंने काफी खुशी से बिताए थे, लेकिन कॉर्पोरेट दुनिया में प्रवेश के बाद स्थिति बदल गई। काम के माहौल ने उन्हें मानसिक तनाव की ओर धकेल दिया।

उन्होंने कहा कि पहली नौकरी में कार्यस्थल का वातावरण संतोषजनक नहीं था, जिससे उन्हें काफी मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि केवल अधिक वेतन ही नौकरी की संतुष्टि का मापदंड नहीं हो सकता।

स्नेहा का यह फैसला आज के युवाओं के बीच एक अलग दृष्टिकोण को दर्शाता है, जहां करियर चुनते समय केवल सैलरी नहीं, बल्कि मानसिक शांति, कार्यस्थल का माहौल और जीवन की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामले यह दिखाते हैं कि नई पीढ़ी अब वर्क-लाइफ बैलेंस और मानसिक स्वास्थ्य को अधिक प्राथमिकता देने लगी है। खासकर आईटी सेक्टर में काम करने वाले युवाओं के बीच यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।

कुल मिलाकर, स्नेहा प्रिया का यह निर्णय इस बात की मिसाल है कि करियर के फैसले केवल आर्थिक लाभ पर आधारित नहीं होते, बल्कि व्यक्तिगत संतुष्टि और जीवनशैली भी उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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