कर्नाटक

कमर्शियल LPG महंगी होने पर होटल एसोसिएशन की GST घटाने की मांग

Kavita2
2 May 2026 2:49 PM IST
कमर्शियल LPG महंगी होने पर होटल एसोसिएशन की GST घटाने की मांग
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Karnataka कर्नाटक: कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बाद कर्नाटक स्टेट होटल्स एसोसिएशन ने सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है। एसोसिएशन ने अपील की है कि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर पर लागू 18 प्रतिशत GST को घटाकर 5 प्रतिशत किया जाए, ताकि होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर बढ़ते आर्थिक दबाव को कम किया जा सके।

यह मांग उस समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक ईंधन बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण शुक्रवार को कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे होटल उद्योग की लागत में अचानक बड़ा इजाफा हो गया है।

होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष जी.के. शेट्टी ने एक बयान में कहा कि पिछले 60 दिनों में तेल विपणन कंपनियों द्वारा कमर्शियल LPG की कीमतों में कुल 1,308 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है, जो हाल के वर्षों की सबसे बड़ी वृद्धि मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर होटल और भोजनालयों की संचालन लागत को प्रभावित कर रही है।

उन्होंने बताया कि मार्च में जहां 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर लगभग 1,800 से 2,000 रुपये के बीच उपलब्ध था, वहीं अब इसकी कीमत 3,100 रुपये से अधिक पहुंच गई है। इस तरह केवल दो महीनों में कीमतों में 50 से 70 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो उद्योग के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।

शेट्टी ने कहा कि लगातार बढ़ती कीमतों के कारण होटल व्यवसायियों के सामने संचालन बनाए रखना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो होटल मालिकों को मजबूरन बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना पड़ेगा, जिससे बाहर खाना और अधिक महंगा हो जाएगा और मांग पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर चल रही अस्थिरता और ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर स्थानीय होटल उद्योग पर पड़ रहा है। ऐसे में GST दर में कटौती जैसे कदम उद्योग को राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

होटल संगठनों ने सरकार से अपील की है कि वह इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल नीतिगत निर्णय ले, ताकि छोटे और मध्यम होटल व्यवसायों को राहत मिल सके और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न बढ़े।

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