कर्नाटक

हिजाब विवाद : नहीं मिली प्रैक्टिकल परीक्षा देने की अनुमति, हिजाब पहन कर कॉलेज आई तीन छात्राओं को गेट पर ही रोक दिया

Rani Sahu
1 March 2022 8:59 PM IST
हिजाब विवाद : नहीं मिली प्रैक्टिकल परीक्षा देने की अनुमति, हिजाब पहन कर कॉलेज आई तीन छात्राओं को गेट पर ही रोक दिया
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हिजाब पहन कर कॉलेज आई तीन छात्राओं को गेट पर ही रोक दिया

बेंगलूरु. उडुपी के सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज प्रशासन ने हिजाब पहन कर कॉलेज आई तीन छात्राओं को कथित तौर पर गेट पर ही रोक दिया। छात्राएं प्रैक्टिकल (प्रायोगिक) परीक्षा देने पहुंची थीं।

हिजाब विवाद की याचिकाकर्ताओं में से एक एएच अल्मास ने ट्वीट कर कहा कि हमने अपनी रिकॉर्ड बुक पूरी कर ली थी और प्रायोगिक परीक्षा में शामिल होने की बड़ी उम्मीद में गए थे। यह बहुत निराशाजनक था जब हमारे प्रिंसिपल ने हमें यह कहते हुए धमकी दी, 'आपके पास जाने के लिए 5 मिनट हैं, अगर आप नहीं गए, तो मैं पुलिस में शिकायत दर्ज कराऊंगा।'
उल्लेखनीय है कि हिजाब के साथ कक्षाओं में शामिल होने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वाली सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी की छह छात्राओं ने प्री-यूनिवर्सिटी बोर्ड से 28 फरवरी से शुरू होने वाली अपनी प्रायोगिक परीक्षाओं को स्थगित करने की अपील की थी।
छात्राओं ने कहा था कि वे पिछले दो महीनों से कक्षाओं में शामिल नहीं हो सकीं क्योंकि हिजाब पहनने के कारण उन्हें कक्षाओं में प्रवेश से वंचित कर दिया गया था। ऐसे में परीक्षा में शामिल होने के लिए उन्हें अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। इन छात्राओं का कहना है कि उच्च न्यायालय के अंतिम फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। जब तक अदालत फैसला नहीं सुनाती, तब तक बिना हिजाब पहने प्रायोगिक परीक्षा में बैठने का कोई सवाल ही नहीं है।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह उच्च न्यायालय ने लगातार 11 दिन की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
शिक्षा शुल्क का उपयोग ढांचागत विकास के लिए: अश्वथ
बेंगलूरु. राज्य की सरकारी शिक्षण संस्थाओं में संग्रहित शिक्षा शुल्क का उपयोग उसी संस्था के बुनियादी ढांचागत विकास के लिए किया जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ सीएन अश्वथ नारायण ने यह बात कही।
यहां सोमवार को उन्होंने कहा कि राज्य के स्नातक तथा तकनीकी शिक्षा संस्थानों में 7 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। इन विद्यार्थियों से संग्रहित शिक्षा शुल्क राशि को उसी संस्था की प्रबंधन समिति के बैंक खातों में जमा करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
इस व्यवस्था के कारण अब इन शिक्षा संस्थाओं को बुनियादी सुविधाओं के उन्नयन के लिए सरकार के अनुदान की प्रतिक्षा नहीं करनी होगी। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधनों की मांग पूरी करने के लिए तकनीकी शिक्षा में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बिजली पर संचालित वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण तकनीकी शिक्षा में ऐसे वाहनों के रखरखाव तथा मरम्मत को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। राज्य सरकार की नीति के कारण राज्य में अब प्रतिवर्ष 1 हजार कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कारण अब राज्य में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हाल में यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को लेकर राज्य सरकार विचार-विमर्श कर रही है। ऐसे विद्यार्थियों को हरसंभव सहायता दी जाएगी।
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