
बेंगलुरु। कर्नाटक में गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर किसान संगठनों के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों के बीच हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने धारवाड़ के उपायुक्त और हुबली-धारवाड़ शहर के पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे हुबली के केश्वपुर स्थित मयूरी एस्टेट के निवासियों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाएं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसान संगठनों के प्रस्तावित धरने, रैलियों और जुलूसों के कारण आवासीय क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। न्यायमूर्ति अनु शिवरामन और न्यायमूर्ति के.एस. भरत कुमार की खंडपीठ ने आठ लोगों की ओर से दायर जनहित याचिका का निपटारा करते हुए प्रशासन को शिकायत पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन
कर्नाटक में गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग को लेकर किसान संगठन आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए गन्ने का उचित मूल्य मिलना जरूरी है।
इसी मांग को लेकर किसान संगठनों की ओर से धरना, रैली, जुलूस और अन्य विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है।
हुबली-धारवाड़ क्षेत्र में प्रस्तावित प्रदर्शनों को देखते हुए मयूरी एस्टेट के निवासियों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आवासीय इलाकों में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा भीड़ बढ़ने की स्थिति में संपत्ति और व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भी आशंका बनी रहती है।
इन्हीं चिंताओं के आधार पर मामला कर्नाटक उच्च न्यायालय पहुंचा।
आठ लोगों ने हाईकोर्ट में दाखिल की जनहित याचिका
मयूरी एस्टेट के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संगमनाथ हंजी सहित आठ लोगों ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की कि गन्ने के दाम बढ़ाने के लिए किसान संगठनों द्वारा किए जाने वाले प्रदर्शन केवल प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थानों पर आयोजित किए जाएं।
याचिका में कहा गया कि धरना, रैली, जुलूस, घेराव और रास्ता रोकने जैसी गतिविधियों को आवासीय क्षेत्र से दूर रखा जाना चाहिए।
याचिकाकर्ताओं ने विशेष रूप से हुबली के केश्वपुर स्थित मयूरी एस्टेट के भीतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित नहीं होने देने की मांग की।
उनका कहना था कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान स्थानीय निवासियों के अधिकार और सुरक्षा प्रभावित नहीं होने चाहिए।
न्यायमूर्ति अनु शिवरामन की खंडपीठ ने दिया आदेश
इस जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति अनु शिवरामन और न्यायमूर्ति के.एस. भरत कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई की।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रशासन को दिए गए अभ्यावेदन पर विचार करने का निर्देश दिया।
खंडपीठ ने धारवाड़ के उपायुक्त और हुबली-धारवाड़ शहर के पुलिस आयुक्त को उचित कदम उठाने के लिए कहा, ताकि किसानों के संभावित प्रदर्शनों से मयूरी एस्टेट के निवासियों के जीवन और संपत्ति को खतरा न हो।
अदालत ने इस निर्देश के साथ जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।
हाईकोर्ट का आदेश प्रशासन को प्रदर्शन के अधिकार और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपता है।
पहले के हाईकोर्ट आदेश का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ताओं ने अपनी मांग के समर्थन में कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक अगस्त 2022 के आदेश का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के विरोध-प्रदर्शन निर्धारित स्थानों पर ही आयोजित किए जाने चाहिए।
याचिका के अनुसार, यदि आवासीय क्षेत्र के भीतर बड़े प्रदर्शन होते हैं, तो वहां रहने वाले लोगों को आने-जाने में परेशानी हो सकती है।
इसी आधार पर अदालत से अनुरोध किया गया कि प्रशासन को पूर्व निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा जाए।
हालांकि, वर्तमान आदेश में अदालत ने सभी किसान प्रदर्शनों पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के बजाय संबंधित अधिकारियों को सुरक्षा संबंधी शिकायत पर विचार कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उठाया मुद्दा
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.पी. हेगड़े ने अदालत में पक्ष रखा।
उन्होंने दलील दी कि आवासीय क्षेत्र में विरोध-प्रदर्शनों के कारण स्थानीय निवासियों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
अधिवक्ता ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) और अनुच्छेद 21 का हवाला दिया।
अनुच्छेद 19(1)(डी) भारतीय नागरिकों को देश के भीतर स्वतंत्र रूप से आवागमन का अधिकार देता है। वहीं अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से संबंधित है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि नागरिकों को सुरक्षित वातावरण में रहने और स्वतंत्र रूप से आने-जाने का अधिकार है।
उन्होंने अदालत से इन अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया।
सरकार ने अदालत में दिया सुरक्षा का भरोसा
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रशासन लोगों की जान-माल की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मुद्दे पर ध्यान दे रहा है।
सरकार की ओर से कहा गया कि किसान संगठनों के विरोध-प्रदर्शनों को व्यवस्थित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों को किसी प्रकार का खतरा न हो।
अदालत ने सरकारी पक्ष की दलीलों और याचिकाकर्ताओं की चिंताओं पर विचार करने के बाद संबंधित अधिकारियों को उचित कदम उठाने का निर्देश दिया।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार भी महत्वपूर्ण
भारतीय संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है।
किसान संगठनों को भी अपनी मांगें रखने और कानून के दायरे में शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है।
हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस अधिकार पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसान संगठनों को अपनी बात रखने का अवसर मिले और आम लोगों की सुरक्षा तथा आवागमन भी प्रभावित न हो।
विशेष रूप से घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों में विरोध कार्यक्रम आयोजित करते समय भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही पर ध्यान देना आवश्यक है।
किसानों की मांग और निवासियों की सुरक्षा के बीच संतुलन
गन्ने की कीमत बढ़ाने की मांग किसानों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
किसान संगठनों का मानना है कि उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित होना चाहिए। दूसरी ओर मयूरी एस्टेट के निवासियों की चिंता अपने आवासीय क्षेत्र की सुरक्षा और सामान्य जनजीवन से जुड़ी है।
कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का उद्देश्य इन दोनों पक्षों के अधिकारों के बीच संतुलन सुनिश्चित करना है।
अदालत ने प्रशासन से कहा है कि वह याचिकाकर्ताओं की शिकायत की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करे।
अब धारवाड़ जिला प्रशासन और हुबली-धारवाड़ पुलिस आयुक्तालय को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शनों के दौरान मयूरी एस्टेट के लोगों की सुरक्षा के लिए उचित प्रबंध हों।





