
Karnataka कर्नाटक: बेंगलुरु में मेट्रो ट्रेन के अंदर महिलाओं के कथित अश्लील वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करने के मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने आरोपी की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक केस को रद्द करने की मांग की थी।
यह मामला 2025 में सामने आया था, जब बनशंकरी पुलिस ने दिगंत बी.के. के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप है कि वह नम्मा मेट्रो ट्रेनों में महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उन्हें इंस्टाग्राम पर “बेंगलुरु मेट्रो चिक्स” नाम के अकाउंट से पोस्ट कर रहा था। शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और मामला दर्ज किया गया।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से केस को रद्द करने की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने की। अदालत ने याचिका पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां समाज में महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा पर सीधा हमला हैं।
अदालत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा, “आप महिलाओं को कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं करने देते, आप कैसे इंसान हैं?” जज ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक परिवहन जैसे मेट्रो में इस तरह की हरकत करता है और उसे सोशल मीडिया पर साझा करता है, तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या आरोपी महिलाओं के आगे-पीछे से अश्लील वीडियो बनाकर उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहा था। अदालत ने कहा कि ऐसी हरकतें न केवल व्यक्तिगत गोपनीयता का उल्लंघन हैं, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
आरोपी के वकील एस.आर. श्रीप्रसाद ने दलील दी कि मेट्रो में पहले से ही CCTV कैमरे लगे हुए हैं और पुलिस ने बिना किसी पीड़ित महिला की शिकायत के खुद ही मामला दर्ज किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें कोई प्रत्यक्ष शिकायतकर्ता नहीं है, इसलिए इसे आपराधिक मामला नहीं माना जाना चाहिए।
हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि तकनीकी तर्क देकर इस तरह के गंभीर आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की निजता और सम्मान का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
अदालत के इस फैसले के बाद आरोपी के खिलाफ चल रहे मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पुलिस जांच जारी है और सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
यह मामला सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।





