
Karnataka कर्नाटक: हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि भारत में टूरिस्ट वीज़ा पर आने वाले विदेशी नागरिकों को इसका उपयोग किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों या समाज की शांति भंग करने वाले कार्यों के लिए करने की अनुमति नहीं है। अदालत ने कहा कि टूरिस्ट वीज़ा केवल पर्यटन और सीमित अवधि के प्रवास के लिए होता है, न कि व्यवसाय चलाने या लंबे समय तक आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए।
यह टिप्पणी जस्टिस सचिन शंकर मगदुम ने फ्रांस के नागरिक Christophe Stephane Monchion की याचिका को खारिज करते हुए की। याचिकाकर्ता ने फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (FRRO) द्वारा जारी ‘लीव इंडिया नोटिस’ को चुनौती दी थी।
मामले के अनुसार, क्रिस्टोफ़ स्टीफ़न मोंचियन उत्तर कन्नड़ जिले के हिट्टालमक्की क्षेत्र में लंबे समय से एक रेस्टोरेंट का संचालन कर रहे थे। उनके खिलाफ यह कार्रवाई तब की गई जब प्रशासन को उनके वीज़ा नियमों के कथित उल्लंघन की जानकारी मिली।
यह नोटिस 16 मार्च की तारीख का था और इसे उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से भेजा गया था। इसके बाद उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर कहा कि उनके खिलाफ बिना किसी सुनवाई का अवसर दिए एकतरफा कार्रवाई की गई है, जो उनके अनुसार कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ है।
मोंचियन ने यह भी तर्क दिया कि उनका टूरिस्ट वीज़ा 24 नवंबर 2026 तक वैध है, इसलिए उन्हें देश छोड़ने का निर्देश देना गलत और असंवैधानिक है।
हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि वीज़ा की शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि यदि कोई विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीज़ा की सीमाओं का उल्लंघन करता है, तो प्रशासन को कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।
फैसले में यह भी कहा गया कि देश में आए विदेशी नागरिकों को भारत के कानूनों और वीज़ा नियमों का पालन करना आवश्यक है, और किसी भी तरह की गैर-कानूनी या असामाजिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
यह निर्णय विदेशी नागरिकों द्वारा वीज़ा नियमों के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता प्रदान करता है और प्रशासनिक कार्रवाई की वैधता को मजबूत करता है।





