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Karnataka कर्नाटक: धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्रों में शामिल Sri Siddharoodha Mahaswami Math में अरूढ़ आरती का भव्य आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर कर्नाटक सहित देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु हुबली पहुंचे और आध्यात्मिक वातावरण में आरती के साक्षी बने। आयोजन को लेकर पूरे मठ परिसर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। अरूढ़ आरती का आयोजन मठ ट्रस्ट समिति की ओर से किया गया था। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण, भजन-कीर्तन और विशेष पूजन कार्यक्रम संपन्न हुए। जैसे ही आरती प्रारंभ हुई, पूरा परिसर “जय सिद्धारूढ़ स्वामी” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने दीपों की रोशनी के बीच आरती में भाग लेकर आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव किया।
मठ प्रशासन के अनुसार अरूढ़ आरती का विशेष महत्व है, क्योंकि यह कार्यक्रम भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और आत्मिक शुद्धि का संदेश देता है। सिद्धारूढ़ महास्वामी को कर्नाटक के महान संतों में गिना जाता है और उनके अनुयायी बड़ी संख्या में इस आयोजन में शामिल होने आते हैं। कार्यक्रम के दौरान मठ परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्वयंसेवकों की तैनाती की गई, ताकि किसी को असुविधा न हो। साथ ही चिकित्सा सहायता, पेयजल और प्रसाद वितरण की भी समुचित व्यवस्था की गई थी।
अरूढ़ आरती में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि इस आयोजन में भाग लेने से उन्हें मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति हुई। कई भक्त परिवार सहित मठ पहुंचे और उन्होंने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया। कुछ श्रद्धालु दूर-दराज के राज्यों से भी पहुंचे थे, जिन्होंने मठ में विशेष पूजा-अर्चना की। मठ ट्रस्ट समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य समाज में सद्भाव, शांति और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देना है। उन्होंने श्रद्धालुओं के सहयोग और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से किए जाते रहेंगे।
अरूढ़ आरती के समापन के बाद प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। दीपों की रोशनी, भक्ति संगीत और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि श्री सिद्धारूढ़ महास्वामी मठ में होने वाले ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजने का कार्य करते हैं। हुबली में आयोजित यह अरूढ़ आरती एक बार फिर आस्था, भक्ति और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई।
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