
बेंगलुरु। कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC) और नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइज (NICE) परियोजना को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। राज्यपाल ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह परियोजना को रद्द करने और NICE के पास मौजूद अप्रयुक्त सरकारी भूमि को वापस लेने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी उपलब्ध कराए।
राज्यपाल की ओर से जारी निर्देश के बाद BMIC-NICE परियोजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इस परियोजना को लेकर लंबे समय से भूमि उपयोग और अधिग्रहण से जुड़े सवाल उठते रहे हैं।
अप्रयुक्त भूमि को लेकर उठे सवाल
राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने गुरुवार को राज्य सरकार को जारी नोटिस में कहा कि NICE परियोजना के लिए मंजूर की गई सरकारी भूमि में से केवल सीमित हिस्से का ही उपयोग किया गया है।
नोटिस के अनुसार, परियोजना के लिए स्वीकृत सरकारी भूमि में से करीब 376 एकड़ भूमि का इस्तेमाल परिधीय सड़कों, लिंक रोड और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किया गया है।
वहीं, याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि करीब 6,757 एकड़ सरकारी भूमि अब भी अप्रयुक्त पड़ी हुई है।
भूमि अधिग्रहण को लेकर चिंता
राज्यपाल ने भूमि उपयोग को लेकर उठ रहे सवालों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में भूमि का उपयोग क्यों नहीं किया गया और इसे लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
राज्यपाल के निर्देश के बाद सरकार को परियोजना की वर्तमान स्थिति, भूमि उपयोग और भविष्य की योजना को लेकर जानकारी देनी होगी।
बिदादी टाउनशिप के लिए भूमि उपयोग का सुझाव
राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने यह भी सुझाव दिया है कि NICE परियोजना के तहत उपलब्ध भूमि का उपयोग प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप के विकास के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इससे निजी कृषि भूमि के अधिग्रहण और लोगों के विस्थापन को कम किया जा सकेगा।
राज्यपाल का मानना है कि यदि पहले से उपलब्ध सरकारी भूमि का सही उपयोग किया जाता है तो नई जमीन अधिग्रहण की जरूरत कम हो सकती है और किसानों व स्थानीय लोगों पर इसका प्रभाव भी घटेगा।
NICE परियोजना पर पहले भी उठे विवाद
बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर परियोजना लंबे समय से विवादों में रही है। इस परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरु और मैसूर के बीच बेहतर सड़क संपर्क और आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार करना था।
हालांकि, समय-समय पर भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
कुछ संगठनों और याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि परियोजना के लिए ली गई बड़ी मात्रा में भूमि का अपेक्षित उपयोग नहीं किया गया।
सरकार को देनी होगी स्थिति रिपोर्ट
राज्यपाल के निर्देश के बाद राज्य सरकार को NICE परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं पर रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
रिपोर्ट में यह जानकारी देनी होगी कि कितनी भूमि अधिग्रहित की गई, कितनी भूमि का उपयोग हुआ और शेष भूमि को लेकर सरकार की क्या योजना है।
इसके अलावा परियोजना को लेकर उठाए गए कानूनी और प्रशासनिक कदमों की जानकारी भी देनी होगी।
निजी संगठनों की भूमिका पर सवाल
राज्यपाल के नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि NICE या उससे जुड़े अन्य निजी व्यक्ति अथवा संगठन बिना कानूनी अधिकार के किसी भूमि का उपयोग कर रहे हैं, तो उसकी जांच आवश्यक है।
इस संबंध में राज्य सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया है।
किसानों और स्थानीय लोगों पर असर
BMIC-NICE परियोजना से जुड़े भूमि मामलों का सीधा असर किसानों और स्थानीय निवासियों पर पड़ा है। भूमि अधिग्रहण को लेकर कई बार विरोध भी सामने आया है।
राज्यपाल के बिदादी टाउनशिप के लिए NICE भूमि उपयोग के सुझाव को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है, ताकि निजी भूमि अधिग्रहण और विस्थापन की समस्या को कम किया जा सके।
आगे की कार्रवाई पर नजर
अब सभी की नजर राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर है। यदि सरकार अप्रयुक्त भूमि को लेकर कोई नया फैसला लेती है तो इसका असर परियोजना और आसपास के क्षेत्रों के विकास पर पड़ सकता है।
BMIC-NICE परियोजना को लेकर राज्यपाल के निर्देश ने एक बार फिर भूमि उपयोग, सार्वजनिक संसाधनों और विकास परियोजनाओं की जवाबदेही को लेकर बहस शुरू कर दी है।





