
Karnataka कर्नाटक : राज्य में इंजीनियरिंग शिक्षा को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में राज्य की करीब 1.6 लाख इंजीनियरिंग सीटों में से लगभग 25 प्रतिशत सीटें निजी और डीम्ड यूनिवर्सिटी में उपलब्ध हैं। इनमें कंप्यूटर साइंस (CS) और इससे जुड़े पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या लगातार बढ़ाने की मांग की जा रही थी, लेकिन सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है।
उच्च शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की कई निजी यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस और इससे संबंधित विषयों में 4,000 से अधिक सीटें उपलब्ध हैं। इन संस्थानों ने वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक सत्र के लिए भी कंप्यूटर साइंस और उससे जुड़े विभागों में सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था।
हालांकि, सरकार ने विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए सीट बढ़ाने की इन मांगों को खारिज कर दिया। सरकार का कहना है कि कंप्यूटर साइंस से जुड़े पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या बढ़ाने के बजाय गुणवत्ता और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति अपनाने की जरूरत है।
एस. सदगोपन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर फैसला
सरकार ने यह निर्णय एस. सदगोपन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लिया है। समिति ने कंप्यूटर साइंस और इससे जुड़े विषयों में बढ़ती सीटों को लेकर चिंता जताई थी।
समिति ने सुझाव दिया था कि कंप्यूटर साइंस और संबंधित पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में इन विषयों की सीटों में करीब 17 प्रतिशत तक कमी करने की सिफारिश की गई थी।
इसके अलावा समिति ने पांच प्रमुख कंप्यूटर साइंस और उससे जुड़े पाठ्यक्रमों की कुल प्रवेश क्षमता को लगभग 900 सीटों तक सीमित रखने का सुझाव दिया था।
CS पाठ्यक्रमों की बढ़ती मांग
पिछले कुछ वर्षों में कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रमों की मांग तेजी से बढ़ी है। छात्रों की बढ़ती रुचि को देखते हुए बड़ी संख्या में निजी संस्थान इन पाठ्यक्रमों में सीटें बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्राइवेट यूनिवर्सिटी का तर्क है कि आईटी सेक्टर और नई तकनीकों में बढ़ते रोजगार अवसरों को देखते हुए अधिक छात्रों को इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश का मौका मिलना चाहिए।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सीटों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता, लैब सुविधाएं, प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े अवसर भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
सरकार का फोकस गुणवत्ता पर
उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। यदि किसी विषय में सीटों की संख्या जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है तो इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और छात्रों को रोजगार के अवसरों में भी कठिनाई आ सकती है।
सरकार ने विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए सीट विस्तार की मांगों को सीमित करने का फैसला किया है। अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में भी पाठ्यक्रमों की मांग, उद्योग की जरूरत और रोजगार बाजार को ध्यान में रखकर ही फैसले लिए जाएंगे।
निजी संस्थानों को झटका
सरकार के इस फैसले से उन निजी और डीम्ड यूनिवर्सिटी को झटका लगा है, जो कंप्यूटर साइंस और संबंधित क्षेत्रों में अधिक सीटों की उम्मीद कर रही थीं।
इन संस्थानों का मानना था कि तकनीकी क्षेत्र में लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए सीटों का विस्तार जरूरी है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र कंप्यूटर साइंस और उससे जुड़े विषयों में करियर बनाना चाहते हैं।
हालांकि, सरकार का तर्क है कि प्रवेश क्षमता बढ़ाने से पहले संस्थानों की क्षमता और शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन जरूरी है।
इंजीनियरिंग शिक्षा में बदलाव की तैयारी
विशेषज्ञों का कहना है कि इंजीनियरिंग शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक शाखाओं के साथ-साथ नई तकनीक आधारित पाठ्यक्रमों की मांग बढ़ रही है।
ऐसे में सरकार और शिक्षा संस्थानों के सामने चुनौती है कि वे छात्रों की मांग और उद्योग की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखें।
कंप्यूटर साइंस से जुड़े पाठ्यक्रमों में सीटों को नियंत्रित करने का फैसला इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
आने वाले समय में होगी समीक्षा
अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में तकनीकी शिक्षा क्षेत्र की स्थिति और रोजगार बाजार की जरूरतों को देखते हुए सीटों की संख्या की समीक्षा की जा सकती है।
फिलहाल सरकार ने निजी और डीम्ड यूनिवर्सिटी की सीट बढ़ाने की मांग को मंजूरी नहीं दी है। अब संस्थानों को मौजूदा सीटों के भीतर ही बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
इस फैसले के बाद राज्य में इंजीनियरिंग शिक्षा के विस्तार और गुणवत्ता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। जहां कुछ लोग इसे गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं निजी संस्थान इसे छात्रों के बढ़ते रुझान के अनुरूप नहीं मान रहे हैं।





