
Karnataka कर्नाटक: बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर किसानों के कड़े विरोध के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए मुआवज़े पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। किसानों के लगातार विरोध और असहमति को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिना उनकी सहमति के कोई भी भूमि अधिग्रहण या टाउनशिप परियोजना आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
इस मामले पर उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने मीडिया से बातचीत करते हुए सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि किसानों की सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण करना या टाउनशिप प्रोजेक्ट को लागू करना संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी तरह का विवाद या भ्रम पैदा करना नहीं है, बल्कि सभी पक्षों को साथ लेकर विकास कार्य को आगे बढ़ाना है।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसान भूमि अधिग्रहण के लिए तय किए गए मुआवज़े से असंतुष्ट हैं, तो सरकार उसकी समीक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि किसानों की राय और सहमति को प्राथमिकता दी जाएगी और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाएगा।
डॉ. जी. परमेश्वर ने कहा कि सरकार का लक्ष्य टाउनशिप प्रोजेक्ट को इस तरह से विकसित करना है जिससे किसी भी प्रकार का विवाद या टकराव न हो। उन्होंने कहा, “किसानों को इकट्ठा करके टाउनशिप बनाने का कोई मतलब नहीं है। हम पहले किसानों से बातचीत करेंगे और उनकी सहमति के बाद ही प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो सरकार मुआवज़े की राशि बढ़ाने पर भी सकारात्मक विचार कर सकती है। उनके अनुसार, विकास परियोजनाओं का आधार जनता का विश्वास और सहमति होना चाहिए, इसलिए किसी भी निर्णय को जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा।
सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि पूरे प्रोजेक्ट की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की आशंका न रहे। प्रशासन का मानना है कि संवाद और सहमति के माध्यम से ही बड़े विकास प्रोजेक्ट सफल हो सकते हैं।
किसानों का कहना है कि प्रस्तावित मुआवज़ा उनकी जमीन और आजीविका के मुकाबले पर्याप्त नहीं है, इसलिए वे इसका विरोध कर रहे हैं। इसी कारण क्षेत्र में लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। किसानों की मांग है कि मुआवज़ा बढ़ाया जाए और उनकी सहमति के बिना कोई भी अधिग्रहण न किया जाए।
सरकार के इस नए रुख को किसानों के विरोध के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत का रास्ता खुलेगा और किसी समाधान तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।
प्रशासनिक स्तर पर भी यह स्पष्ट किया गया है कि परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले सभी हितधारकों से चर्चा की जाएगी और उनकी चिंताओं को दूर किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि विकास और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
फिलहाल बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है, लेकिन सरकार के ताजा बयान से यह संकेत मिला है कि आगे की प्रक्रिया सहमति और बातचीत के आधार पर ही तय की जाएगी।





