कर्नाटक
वेटनरी ऑफिसर भर्ती विवाद SIT जांच के आदेश को चुनौती देगी सरकार
Ratna Netam
23 Sept 2026 8:41 PM IST

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बेंगलुरु। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में 400 वेटनरी ऑफिसर की भर्ती में कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचने की ओर है। कर्नाटक सरकार ने भर्ती मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने की तैयारी की है। राज्य सरकार की आपत्ति मुख्य रूप से अदालत द्वारा जांच के लिए SIT गठित करने और उसके अधिकारियों को नामित करने से जुड़ी है।कर्नाटक हाई कोर्ट ने 21 सितंबर को KPSC की वेटनरी ऑफिसर भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए पांच सदस्यीय SIT गठित करने का आदेश दिया था। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने जांच CBI को सौंपने की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन मौजूदा CID जांच को जारी रखने के बजाय नई SIT से जांच कराने का आदेश दिया।
हाई कोर्ट की ओर से गठित SIT का नेतृत्व वरिष्ठ IPS अधिकारी और जेल एवं सुधार सेवाओं के DGP आलोक कुमार को सौंपा गया है। टीम में IPS अधिकारी दिव्या वी. गोपीनाथ, अनुप ए. शेट्टी, कुशल चौकसे और क्षमा मिश्रा को भी शामिल किया गया है। अदालत ने SIT को 100 दिनों के भीतर जांच पूरी करने और हर 30 दिन में प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।अब राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन यानी SLP दाखिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी कहा है कि सरकार इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। उन्होंने SIT जांच के विचार का विरोध नहीं किया, लेकिन अदालत की ओर से सीधे अधिकारियों के नाम तय किए जाने को लेकर सवाल उठाया है।
राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी सवाल किया है कि जब CID पहले से मामले की जांच कर रही थी तो अलग SIT की आवश्यकता क्यों पड़ी। सरकार की ओर से इसी पहलू को सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाए जाने की संभावना है।यह पूरा मामला KPSC द्वारा पशुपालन एवं मत्स्य विभाग में 400 वेटनरी ऑफिसर पदों की भर्ती से जुड़ा है। आयोग ने 29 जुलाई 2024 को इन पदों के लिए भर्ती अधिसूचना जारी की थी। परीक्षा 8 और 9 जनवरी 2026 को आयोजित की गई और अंतिम चयन सूची 17 जुलाई को प्रकाशित हुई। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आने लगे।
आरोपों में प्रश्नपत्र लीक, OMR शीट में कथित हेरफेर, अभ्यर्थियों से नौकरी के बदले बड़ी रकम मांगने और आयोग से जुड़े लोगों के रिश्तेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने जैसी बातें शामिल हैं। ये आरोप जांच के अधीन हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं आया है।एक शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ उम्मीदवारों से वेटनरी ऑफिसर का पद दिलाने के बदले 80 लाख रुपये तक मांगे गए। पुलिस ने शुरुआती चरण में बिचौलियों की कथित भूमिका की भी जांच की। विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने जुलाई में संबंधित मामलों की जांच CID को सौंप दी थी।
जांच के दौरान मामले का दायरा और बढ़ा। CID ने अदालत में दावा किया कि कुछ अभ्यर्थियों से कथित तौर पर बड़ी रकम जुटाई गई थी और पैसे के लेन-देन से जुड़े बैंक रिकॉर्ड तथा अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी ने तत्कालीन KPSC परीक्षा नियंत्रक IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार और कथित बिचौलिए बसवराज कन्नाले की भूमिका की भी जांच की। बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच करते हुए दोनों को गिरफ्तार किया। ये आरोप भी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।कर्नाटक हाई कोर्ट के सामने इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इनमें भाजपा विधायक बसनगौड़ा आर. पाटिल यतनाल, ऑल कर्नाटक स्टेट स्टूडेंट्स एसोसिएशन और कुछ सफल तथा असफल अभ्यर्थियों की याचिकाएं शामिल थीं। याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
हाई कोर्ट ने CBI जांच की मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने इसके बजाय पांच सदस्यीय SIT बनाकर नए सिरे से जांच कराने का रास्ता चुना। अदालत ने CID और मामले की जांच कर रही अन्य पुलिस इकाइयों को अब तक एकत्र किए गए रिकॉर्ड, सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य SIT को सौंपने का भी निर्देश दिया।इसके अलावा SIT को प्रवर्तन निदेशालय के साथ समन्वय करने और ED की जांच में सामने आई प्रासंगिक जानकारी हासिल करने को कहा गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच केवल पहले से दर्ज मामलों में नामजद व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अगर जांच में अन्य लोगों की भूमिका से जुड़े साक्ष्य मिलते हैं तो SIT उस दिशा में भी जांच कर सकती है।
हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और हेरफेर के आरोपों को गंभीर माना। अदालत ने कहा कि सरकारी नौकरियों की भर्ती में योग्यता और समान अवसर की व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियां संवैधानिक व्यवस्था और अभ्यर्थियों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय हैं।दूसरी ओर राज्य सरकार का तर्क है कि मामले की जांच CID पहले से कर रही थी। सरकार ने हाई कोर्ट द्वारा जांच अधिकारियों को सीधे नामित करने के पहलू पर भी आपत्ति जताई है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा है कि इस संबंध में कानूनी सलाह ली जा रही है।
अब प्रस्तावित SLP के बाद सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवालों में हाई कोर्ट के SIT गठन संबंधी निर्देश और जांच एजेंसी के अधिकारियों की नियुक्ति से जुड़े पहलू आ सकते हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने और उस पर सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हाई कोर्ट के आदेश में किसी तरह का हस्तक्षेप किया जाता है या नहीं।फिलहाल हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी है और SIT को जांच पूरी करने के लिए 100 दिनों का समय दिया गया है। राज्य सरकार की चुनौती के कारण KPSC वेटनरी ऑफिसर भर्ती विवाद अब जांच के साथ-साथ कानूनी लड़ाई के अगले चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है।
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