
कलबुर्गी। कर्नाटक में महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से राज्य सरकार एक अलग और व्यापक महिला स्वास्थ्य नीति तैयार करने की योजना बना रही है। बुधवार को कलबुर्गी में यू. टी. खादर ने इस पहल की जानकारी देते हुए कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी मौजूदा योजनाओं को एक साथ जोड़कर ऐसी नीति तैयार की जाएगी, जिससे महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जा सके। उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समाज तथा व्यवस्था में दिखाई देने वाली उदासीनता पर भी चिंता व्यक्त की।
खादर ने कहा कि महिलाओं की भलाई सुनिश्चित करने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं को एकीकृत किया जाएगा। इसके साथ ही एक समर्पित तकनीकी व्यवस्था विकसित करने की बात भी सामने आई है। हालांकि, तकनीकी व्यवस्था के स्वरूप, नीति लागू करने की समयसीमा और बजट के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अलग नीति बनाने की तैयारी
कर्नाटक में प्रस्तावित महिला स्वास्थ्य नीति का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतों को व्यापक दृष्टिकोण से देखना है।
महिलाओं को जीवन के अलग-अलग चरणों में विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। किशोरावस्था से लेकर मातृत्व और बढ़ती उम्र तक स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतें बदलती रहती हैं।
ऐसे में महिलाओं के लिए अलग नीति तैयार करने की पहल इन आवश्यकताओं को एक समग्र ढांचे में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।
खादर के अनुसार, सरकार महिलाओं की भलाई सुनिश्चित करने वाली योजनाओं को एक साथ जोड़ना चाहती है, ताकि स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
हालांकि, प्रस्तावित नीति में किन विशेष सेवाओं और कार्यक्रमों को शामिल किया जाएगा, इसका पूरा विवरण अभी सामने नहीं आया है।
मौजूदा योजनाओं को एक साथ जोड़ने पर जोर
महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर विभिन्न योजनाएं संचालित होती हैं। इनमें मातृ स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच जैसी सेवाएं शामिल हैं।
कई बार अलग-अलग विभागों और योजनाओं के तहत उपलब्ध सेवाओं की जानकारी लाभार्थियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाती।
ऐसी स्थिति में योजनाओं के बीच समन्वय बेहतर होने से महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।
खादर ने इसी दिशा में विभिन्न योजनाओं को एकीकृत करने की बात कही है।
यदि प्रस्तावित नीति में स्वास्थ्य विभाग के साथ महिला एवं बाल विकास, शिक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों का समन्वय किया जाता है, तो इससे महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतों को व्यापक स्तर पर संबोधित करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, विभागीय समन्वय का अंतिम स्वरूप सरकार की आधिकारिक नीति जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
महिला स्वास्थ्य के लिए तकनीकी निगरानी व्यवस्था
खादर ने महिला स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों की निगरानी के लिए समर्पित तकनीकी व्यवस्था विकसित करने की बात कही है। इससे पहले सरकार महिला स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के लिए अलग उपनिदेशक नियुक्त करने का प्रस्ताव भी सामने रख चुकी है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य योजनाओं के क्रियान्वयन, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और महिलाओं तक सुविधाएं पहुंचने की प्रक्रिया पर निगरानी रखना होगा।
यदि अलग निगरानी तंत्र स्थापित होता है, तो विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर बनाने और स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।
रजोनिवृत्ति से जुड़ी समस्याओं पर विशेष ध्यान
कर्नाटक सरकार इससे पहले 'ऋतुतारे' नामक पहल की घोषणा कर चुकी है। इसका उद्देश्य रजोनिवृत्ति और उससे पहले के चरण से गुजर रही महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
प्रस्तावित पहल में आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर सर्वेक्षण, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श की व्यवस्था शामिल करने की योजना है।
सरकार ने इस पहल के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों की समिति बनाने की भी जानकारी दी थी।
दिसंबर तक 750 नई एंबुलेंस लाने की योजना
कलबुर्गी में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए खादर ने कई अन्य योजनाओं की भी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार दिसंबर तक 750 आधुनिक एंबुलेंस उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है। इनका उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना है।
सरकार की योजना है कि मरीजों तक एंबुलेंस समय पर पहुंचे। निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं होने पर संबंधित सेवा प्रदाता के खिलाफ कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान भी प्रस्तावित है।
तालुक अस्पतालों में पांच बेड वाले ICU
स्वास्थ्य मंत्री ने ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधाएं बढ़ाने पर भी जोर दिया।
सरकार प्रत्येक तालुक स्तर पर पांच बिस्तरों वाले गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है।
इस पहल से गंभीर मरीजों को प्राथमिक स्तर पर बेहतर चिकित्सा सहायता मिलने और जिला अस्पतालों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और नर्सों की कमी दूर करने के लिए लगभग एक हजार स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
खादर ने बीमारियों के इलाज के साथ उनकी रोकथाम को भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने और लोगों को संतुलित आहार तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता जताई।
महिलाओं के लिए अलग स्वास्थ्य नीति के संदर्भ में यह पहल महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि समय पर स्वास्थ्य जांच और जागरूकता से अनेक समस्याओं की जल्द पहचान संभव होती है।
नीति लागू होने के बाद स्पष्ट होंगे लाभ
कर्नाटक सरकार की प्रस्तावित महिला स्वास्थ्य नीति को महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए अलग प्रशासनिक और चिकित्सकीय ढांचा तैयार करने की दिशा में एक कदम माना जा सकता है।
हालांकि, नीति के अंतिम प्रावधान, बजट, पात्रता और लागू होने की तारीख अभी स्पष्ट नहीं हैं।
सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि नई नीति का लाभ शहरों के साथ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाओं तक भी पहुंचे।





